Advertisement

Metro In Dino Movie Review: रिश्तों की मार्डन कहानी है अनुराग बसु की फिल्म, म्यूजिक है इसका असली हीरो

मेट्रो इन दिनों फाइनली थियेटर्स पर रिलीज हो गई है. अगर आप इसे देखने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ये रिव्यू पढ़कर जान लें कि क्या यह फिल्म आपके समय और पैसे के लायक है. अनुराग बासू के निर्देशक में बनी इस फिल्म को भूषण कुमार समेत कई लोगों ने प्रोड्यूस किया है. आइए, कहानी, अभिनय, तकनीकी पहलुओं, और निर्देशन के आधार पर इसका रिव्यू करते हैं.

Metro In Dino Movie Review: रिश्तों की मार्डन कहानी है अनुराग बसु की फिल्म, म्यूजिक है इसका असली हीरो

मेट्रो... इन दिनों मूवी रिव्यू
रिलीज डेट: 4 जुलाई 2025
निर्देशक: अनुराग बसु
कलाकार: आदित्य रॉय कपूर, सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी, कोंकणा सेन शर्मा, नीना गुप्ता, अनुपम खेर, अली फजल, फातिमा सना शेख
जॉनर: रोमांटिक ड्रामा, म्यूजिकल
रनटाइम: 2 घंटे 42 मिनट
रेटिंग्स: 3.5 स्टार्स

डायरेक्टर अनुराग बासू की फिल्म मेट्रो इन दिनों फाइनली थियेटर्स पर रिलीज हो गई है. इस रोमांटिक म्जूजिकल ड्रामा फिल्म में आदित्य रॉय कपूर, सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी, कोंकणा सेन शर्मा, नीना गुप्ता, अनुपम खेर, अली फजल, और  फातिमा सना शेख अहम रोल में नज़र आए हैं. 

अगर आप इसे देखने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ये रिव्यू पढ़कर जान लें कि क्या यह फिल्म आपके समय और पैसे के लायक है. अनुराग बासू के निर्देशक में बनी इस फिल्म को भूषण कुमार समेत कई लोगों ने प्रोड्यूस किया है. आइए, कहानी, अभिनय, तकनीकी पहलुओं, और निर्देशन के आधार पर इसका रिव्यू करते हैं.

क्या है फिल्म की कहानी?
मेट्रो... इन दिनों अनुराग बसु की 2007 की फिल्म "लाइफ इन अ मेट्रो" का सीक्वल है.ये चार जोड़ों की कहानियों की है, जो मॉर्डन शहरी जीवन में प्यार, रिश्तों की उलझनों, और तन्हाइयों को दर्शाती है.फिल्म मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, और दिल्ली जैसे शहरों की पृष्ठभूमि में रिश्तों की जटिलताओं को खूबसूरती से पेश करती है.प्रत्येक कहानी भावनात्मक गहराई और मानवीय रिश्तों की खामोशियों को उजागर करती है.

फिल्म में मोंटी (पंकज त्रिपाठी) और काजोल (कोंकणा सेन शर्मा)  मुंबई में रहते हैं और 20 साल से शादीशुदा है, बाहरी तौर पर खुशहाल लेकिन अंदर से इनका रिश्ता बिखरा हुआ है.मोंटी डेटिंग ऐप पर अफेयर की कोशिश करता है, जिसके विनाशकारी नतीजे सामने आते हैं.

शिवानी (नीना गुप्ता) और संजीव (सास्वत चटर्जी) पुणे में बेजान वैवाहिक जीवन जी रहे हैं.शिवानी को कॉलेज रीयूनियन में पुराने प्रेमी परिमल (अनुपम खेर) से मिलने का मौका मिलता है, जो उनकी जिंदगी में उत्साह लाता है.

चुमकी (सारा अली खान) और पार्थ (आदित्य रॉय कपूर) दिल्ली की चुमकी बेंगलुरु में पार्थ से गलती से मिलती है, जिससे उसके मंगेतर आनंद (कुश जोटवानी) के साथ गलतफहमी हो जाती है.

श्रुति (फातिमा सना शेख) और आकाश (अली फजल) बेंगलुरु में रहते हैं, जहां श्रुति मां बनना चाहती है, लेकिन आकाश अपने सिंगिंग करियर के लिए कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ देता है.श्रुति दिल्ली जाने और अबॉर्शन का फैसला करती है, जबकि आकाश मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष शुरू करता है.इन चारों जोड़ों की जिंदगी में आगे क्या होता है ये आगे फिल्म में देखने को मिलेगा. 

तकनीकी पहलू 
बता दें कि मेट्रो इन दिनों को क्रिटिक्स की तरफ़ से अच्छे रिव्यू मिले हैं. फिल्म की कहानी आज के टाइम की जिंदगियों और रिश्तों से गहराई से जुड़ी है. भले ही कुछ जगहों पर फिल्म चूक गई हो, लेकिन स्क्रीनप्ले काफी प्रभावशाली है. फिल्म थोड़ी लंबी ज़रूर है. लेकिन ये आपको बांधे रखने में कामयाब होती है. दर्शक फिल्म को देखते वक्त जरा भी बोर फ़ील नहीं करते हैं. फिल्म की कहानी में प्रतीम के म्यूज़िक को बेहद ही शानदार तरीके से इस्तेमाल किया गया है. 

फिल्म में कई जगहों पर गानों के ज़रिए भावनाएं व्यक्त की गई हैं. फिल्म को देखते वक्त आपको नया पन महसूस होगा. फिल्म के शुरूआती 10 मिनट लोगों को कनेक्ट नहीं कर पाते ,लेकिन जैसे ही फिल्म आगे बढ़ती है अपनी रफ़्तार पकड़ लेती है. और दर्शक फिल्म में इस कदर चिपक जाते हैं अंत तक सीट से उठ नहीं पाते. अभिषेक बसू और अनुराग बसू की सिनेमैटोग्राफी काफी कमाल की है. उन्होंने फिल्म में दिखाए गए सभी शहरों को बेहद ही स्टाइलिश तरीके से कैमरे में क़ैद किया है. फिल्म का प्रोडक्शन डिज़ाइन भी अच्छा है. वही एडिटिंग भी बढ़िया है. 

म्यूज़िक 
फिल्म का म्यूज़िक इसकी सबसे बड़ी ताक़त और ख़ासियत है. फिल्म की कहानी में जिस तरह से गानों को सेट किया गया है, वो क़ाबिल ए तारीफ़ है. हर गाने को बढ़िया ढंग से पेश किया गया है. जो फिल्म की भावनाओं को गहराई से उभारते हैं. प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर बेहद ही शानदार है जो आपका दिल छू लेगा. 

परफॉर्मेंस
फिल्म में सभी ने अच्छा काम किया है, लेकिन सबसे ज्यादा पंकज त्रिपाठी और कोंकणा सेन शर्मा प्रभाव शाली लगे हैं. पंकज त्रिपाठी की मासूमियत और हास्य के साथ पूरा शो अपने नाम कर लिया है. कोंकणा सेन शर्मा भी किरदार में पूरी तरह ढलकर प्रभावित करती हैं.फातिमा सना शेख और अली फजल ने कम स्क्रीन टाइम में भी गहरी छाप छोड़ी है. सारा अली खान का नाम औसत है, जबकि आदित्य रॉय कपूर बिंदास लगे हैं. नीना गुप्ता और अनुपम खेर का काम भी बढ़िया है. 

निर्देशन
अनुराग बसु का निर्देशन भी काबिल-ए-तारीफ है. उन्होंने हर किरदार को शानदार तरीके से दिखाया है. उनका निर्देशन फिल्म को मज़बूत बनाता है, पहले पार्ट की तरह फिल्म के दूसरे पार्ट पर भी उन्होंवे खूब मेहनत की है, फिल्म लंबी होने के बाद भी आपको जरा भी बोर नहीं करती. अनुराग की मेहनत की तारीफ़ करना बनता है, जिन्होंने चारों कहानियों को ढंग से पेश किया है. 

यह भी पढ़ें

क्यों देखें?
"मेट्रो... इन दिनों" रिलेटेबल किरदारों, हास्य, ड्रामा, और शानदार संगीत का मिश्रण है.यह मल्टीप्लेक्स दर्शकों के लिए भावनात्मक और मनोरंजक अनुभव है, जो रिश्तों की गहराई को म्यूजिकल अंदाज में देखना चाहते हैं.आप एक बार इस फिल्म को देख सकते हैं.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें