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मद्रास हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल तक बढ़ाई कुणाल कामरा की अंतरिम जमानत

कामरा ने मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। यह उस क्षेत्राधिकार से अलग क्षेत्राधिकार में गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा प्रदान करती है, जहां एफआईआर दर्ज की गई है।

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07 Apr 2025
( Updated: 11 Dec 2025
02:01 AM )
मद्रास हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल तक बढ़ाई कुणाल कामरा की अंतरिम जमानत
 महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बिना उनका नाम लिए व्यंग्य करने के बाद विवादों में घिरे स्टैंड-अप कमीडियन कुणाल कामरा की मद्रास हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल तक अंतरिम जमानत बढ़ा दी है।  

मद्रास हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल तक अंतरिम जमानत बढ़ाई !
इससे पहले कामरा ने मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। यह उस क्षेत्राधिकार से अलग क्षेत्राधिकार में गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा प्रदान करती है, जहां एफआईआर दर्ज की गई है। कमीडियन के मामले में महाराष्ट्र के मुंबई में खार पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने पहले की सुनवाई में कामरा को 7 अप्रैल तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, जो सोमवार (7 अप्रैल) को खत्म हो रही थी।

हालांकि, अदालत ने अंतरिम जमानत अब 17 अप्रैल तक बढ़ा दी है।न्यायमूर्ति सुंदर मोहन ने उन्हें जमानत के लिए औपचारिक रूप से वनूर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के बाद, वनूर अदालत ने राहत प्रदान की थी।


जानिए क्या है मामला ! 

उल्लेखनीय है कि 23 मार्च को मुंबई के खार इलाके में हैबिटेट कॉमेडी क्लब में एक शो के दौरान कामरा ने 1997 की बॉलीवुड फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के एक गाने की पैरोडी की, जिसका इस्तेमाल शिंदे पर व्यंग्य के लिए किया गया। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्हें “गद्दार” कहा, जो शिंदे की पार्टी शिवसेना को गवारा नहीं हुआ।

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विरोध में शो के आयोजन स्थल पर तोड़फोड़ की। कुछ दिनों बाद, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने कॉमेडी क्लब के कुछ हिस्सों को ध्वस्त करने का काम शुरू किया, जिससे घटना की ओर लोगों का ध्यान और अधिक गया।पूछताछ के लिए उपस्थित न होने के बाद मुंबई पुलिस के कई अधिकारी कथित तौर पर शहर में कामरा के पंजीकृत पते पर गए।

कमीडियन को अस्थायी राहत देने वाली वनूर की अदालत तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में है।

Source Input - IANS 

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