इजरायल के PM नेतन्याहू के खिलाफ ICC का वारंट क्या इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का नया अध्याय लिखेगा?

इजरायल और फिलिस्तीन के लंबे संघर्ष में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया, जब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट, और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद जईफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह वारंट गाजा में किए गए कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों को लेकर जारी किया गया है।

इजरायल के PM नेतन्याहू के खिलाफ ICC का वारंट क्या इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का नया अध्याय लिखेगा?
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दशकों से चल रहे संघर्ष में अब एक बड़ा मोड़ आ गया है, दरअसल इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट, और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद जईफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह घटना वैश्विक राजनीति और मानवाधिकार की दृष्टि से ऐतिहासिक मानी जा रही है।

इस वारंट के पीछे ICC का तर्क यह है कि इन नेताओं ने इजरायल-हमास संघर्ष के दौरान ऐसे कार्यों को अंजाम दिया, जिन्हें युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ICC ने अपने बयान में कहा कि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो इन व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी को प्रमाणित करते हैं।
गिरफ्तारी के पीछे का कारण
ICC ने अपने फैसले में कहा कि नेतन्याहू और गैलेंट ने गाजा पट्टी में युद्ध अपराधों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया। गाजा में लाखों लोगों को भुखमरी के कगार पर लाना, आवश्यक मानवीय मदद को रोकना, और निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना, इन्हीं अपराधों की सूची में आता है। हालांकि ICC का यह कदम कई सवाल खड़े करता है। क्या यह अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा, या इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में देखा जाएगा? इजरायल ने ICC के अधिकार क्षेत्र को खारिज करते हुए इस कदम को पक्षपातपूर्ण बताया है। वहीं, फिलिस्तीन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत कहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू और गैलेंट जैसे उच्च पदों पर बैठे नेताओं पर मुकदमा चलाना आसान नहीं होगा। इजरायल के पास अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों का समर्थन है, जो इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोक सकते हैं।

दूसरी ओर, हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद जईफ पर इजरायली नागरिकों और सैनिकों पर हमले करने और बंधकों को कैद में रखने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इजरायली सेना ने दावा किया कि जईफ जुलाई में एक हवाई हमले में मारे गए थे, लेकिन हमास ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की भूमिका
इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में युद्धविराम का प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव में गाजा में तुरंत, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग की गई थी। हालांकि, अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर चौथी बार वीटो लगा दिया। अमेरिका का कहना है कि जब तक सभी बंधकों को रिहा नहीं किया जाता और हमास के हमले बंद नहीं होते, तब तक गाजा में युद्धविराम संभव नहीं है। अमेरिका के इस कदम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्य नाराज दिखे, जिन्होंने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
गाजा में मौजूदा हालात
गाजा पट्टी में युद्ध ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। लाखों लोग भोजन, पानी, और चिकित्सा सहायता के बिना जीवन जीने को मजबूर हैं। इजरायली हवाई हमलों में हजारों निर्दोष लोग मारे गए हैं, जबकि हमास के रॉकेट हमलों ने इजरायल के कई इलाकों को तबाह कर दिया है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा शिकार आम नागरिक बन रहे हैं। गाजा में न सिर्फ बुनियादी सुविधाओं की कमी है, बल्कि संचार माध्यमों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे बाहर की दुनिया को सही जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है।

वैसे आपको बता दें कि ICC का यह फैसला न केवल इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष, बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित करेगा। यह पहली बार नहीं है जब ICC ने किसी राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की है। इससे पहले सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ भी वारंट जारी किया गया था। हालांकि, इन मामलों में कार्रवाई करना हमेशा मुश्किल रहा है। ICC के पास न तो अपनी कोई पुलिस है, न ही वारंट लागू करने की कोई ताकत। इसलिए, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला किस दिशा में बढ़ता है।

नेतन्याहू और गैलेंट के खिलाफ ICC का यह फैसला इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को एक नया मोड़ देगा। जहां एक ओर इजरायल इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर चुनौती देगा, वहीं दूसरी ओर, यह फैसला फिलिस्तीन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकता है। इस संघर्ष का समाधान निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता, लेकिन ICC का यह कदम एक संदेश देता है कि युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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