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नेतन्याहू के दावे को UN न्यूक्लियर चीफ ने किया खारिज, कहा- ईरान का परमाणु बम बनाने का कोई प्लान नहीं

इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है. इस युद्ध को लेकर दुनिया के कई बड़े देश दो धड़ों में बंटे हुए दिखाई दे रहे है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर बड़ा बयान जारी किया है.

नेतन्याहू के दावे को UN न्यूक्लियर चीफ ने किया खारिज, कहा- ईरान का परमाणु बम बनाने का कोई प्लान नहीं

ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग दिन पर दिन और उग्र होती जा रही है. दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं. कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर बड़ा बयान जारी किया है. एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि ईरान के पास कई परमाणु वारहेड्स बनाने लायक यूरेनियम भंडार तो मौजूद है, लेकिन उसके पास परमाणु हथियार बनाने की कोई सक्रिय योजना या ठोस कार्यक्रम का प्रमाण नहीं है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का यह बयान उस समय सामने आया है, जब  इजरायल और ईरान के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसको लेकर दुनिया के कई देश दो धड़ों में बंटे दिखाई दे रहे हैं. IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान के पास तकनीकी रूप से आवश्यक मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिससे कई वारहेड्स बनाए जा सकते हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह इस दिशा में आगे बढ़ चुका है. फिलहाल हमारे पास इस बात के कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु हथियार बना रहा है.” ग्रॉसी ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान में कुछ ऐसी गतिविधि हुई है, जिन पर एजेंसी की नजर बनी हुई है. उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी बनी रहे और ईरान पारदर्शिता के साथ सहयोग करता रहे. वही दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कई बार सार्वजनिक रूप से दावा कर चुके हैं कि ईरान जल्द ही परमाणु हथियार प्राप्त कर सकता है और इज़रायल की सुरक्षा को इससे गंभीर खतरा है. नेतन्याहू के मुताबिक, इसी खतरे के मद्देनज़र इज़रायल ने पहले ही सैन्य कार्रवाई को सही विकल्प माना.

ईरान को कूटनीतिक प्रयासों से रोका जा सकता है
राफेल ग्रॉसी ने इस बात की उम्मीद जताई है कि मौजूदा संकट के बावजूद राजनयिक प्रयासों के जरिए ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों के साथ इस विषय पर बातचीत जारी है और कूटनीति के रास्ते अब भी खुले हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक हालिया बैठक में भी ग्रॉसी ने चिंता जताते हुए कहा था, "ईरान के परमाणु स्थलों पर हुए हमलों के कारण परमाणु सुरक्षा और संरक्षा मानकों में गंभीर गिरावट आई है." हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी रेडियोलॉजिकल लीकेज का आम जनता पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन खतरा बना हुआ है.

ईरान का दो टूक बयान, पहले हमला रोके इजरायल 
जंग के हालात के बीच ईरानी अधिकारियों ने हाल के बयानों में बार-बार इस बात को दोहराया है कि इजरायल की आक्रामक कार्रवाइयों के बीच कूटनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है. इसके बावजूद यूरोपीय देश अब भी प्रयासरत हैं कि ईरान को किसी तरह बातचीत की मेज पर लाया जा सके.  वही दूसरी तरफ बात अगर अमेरिका की करें तो वो दुविधा में दिखाई दे रहा है. वो यह फैसला नहीं कर पा रहा है कि इजरायल के सैन्य अभियान में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होगा या नहीं, अमेरिकी नीति फिलहाल “वेट एंड वॉच” वाली बनी हुई है. 

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अमेरिका दो हफ्ते में लेगा बड़ा फैसला: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका आने वाले दो हफ्तों के भीतर यह तय करेगा कि वह ईरान के खिलाफ इज़रायल के सैन्य अभियान में शामिल होगा या नहीं. दूसरी तरफ इजरायल ने अपने अभियान के पहले सप्ताह के पूरा होने पर बड़ा दावा किया है, इजरायली सेना के अनुसार, उसने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. इन ठिकानों में मिसाइल यूनिट्स, परमाणु हथियारों से जुड़े रिसर्च सेंटर और तेहरान सहित पश्चिमी व मध्य ईरान के एयरबेस शामिल हैं.

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