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तीन दिन, तारीफ हजार! चीन पर टैरिफ लगाकर बुरे फंसे ट्रंप, ड्रैगन ने किया पलटवार, अब पलटी मारने का खोज रहे बहाना

चीन पर 100% टैरिफ की धमकी देकर डोनाल्ड ट्रंप बुरे फंस गए हैं. चीन के पलटवार और रेअर अर्थ मिनरल की सप्लाई को नियंत्रित करने की धमकी के बाद उनके होश फाख्ता होते दिख रहे हैं. बीते तीन दिनों में ट्रंप ने तीन बार जिनपिंग और चीन की तारीफ की है. इसे ट्रंप का बीते 72 घंटों में यू-टर्न कहा जा रहा है.

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13 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:24 AM )
तीन दिन, तारीफ हजार! चीन पर टैरिफ लगाकर बुरे फंसे ट्रंप, ड्रैगन ने किया पलटवार, अब पलटी मारने का खोज रहे बहाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के ऊपर 100 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाने का ऐलान किया है. चीन ट्रंप के इस फैसले पर जबरदस्त भड़क गया. उसने अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले पर निशाना साधा और इस कदम को "दोहरे मानदंडों" का प्रदर्शन बताया. ड्रैगन के सख्त रुख को देखते हुए ट्रंप के होश ठिकाने लग गए हैं. दो दिन के अंदर अर्श से फर्श पर आ गए हैं. चीन ने उन्हें गरमी का एहसास करा दिया है. ऐसा लग रहा है जैसे ट्रंप जल्दी ही अपने इस फैसले से भी पलटी मारेंगे. इससे पहले उन्होंने भारत के फार्मा सेक्टर पर लगाए गए टैरिफ पर यू-टर्न लिया था और इसे कम कर दिया था. 

आपको बता दें कि चीन के स्टैंड और धमकी के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को बीजिंग से अच्छे रिश्ते की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका और चीन का रिश्ता आगे ठीक रहेगा. इतना ही नहीं उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ की और कहा है कि वे अपने देश के लिए अच्छे नेता हैं. ट्रंप का ये बयान उस वक्त आया है जब उन्होंने अगले महीने से चीनी आयात पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.

अपने आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छा रिश्ता है. मालूम हो कि ट्रंप का टोन उस वक्त से चेंज नजर आ रहा है जब से चीन ने भी पलटवार की धमकी दी है. अब उन्होंने बीजिंग के साथ अपने रिश्तों में अलग रुख अपनाना शुरू कर दिया है.

'जिनपिंग की तारीफ में ट्रंप ने पढ़े कसीदे'

इतना ही नहीं उन्होंने एक और पोस्ट किया और गुड कॉप-बैड कॉप वाली नीति अपनाने की कोशिश की. एक तरफ तो उन्होंने जीनपिंग, उनके नेतृत्व और चीन की तारीफ भी की तो दूसरी तरफ ताना भी मारा. उन्होंने लिखा कि, "चीन की चिंता मत कीजिए, सब ठीक हो जाएगा! आदरणीय राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हाल ही में एक बुरा दौर आया-देखा. वे भी अपने देश में मंदी नहीं चाहते, और ना ही मैं चाहता हूं. अमेरिका चीन की मदद करना चाहता है, उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता!!!"

इससे पहले भी ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर कहा था कि ‘वह बहुत सख्त आदमी हैं, बहुत बुद्धिमान हैं, और अपने देश के लिए बड़े अच्छे नेता हैं.’ ये बात उन्होंने इजरायल और मिस्र के लिए यात्रा पर रवाना होने के बाद कही थी.

ट्रंप की टैरिफ धमकी का चीन ने दिया जवाब 

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि चीन पर लगाए गए ये अतिरिक्त टैरिफ 1 नवंबर से लागू होंगे. ऐसे में एक बार फिर से चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर होता हुआ नजर आ रहा है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, "9 अक्टूबर को, चीन ने रेयर-अर्थ एलिमेंट्स और संबंधित वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण उपाय जारी किए. यह चीनी सरकार द्वारा अपनी निर्यात नियंत्रण प्रणाली को परिष्कृत करने के लिए कानूनों और नियमों के अनुसार की जाने वाली सामान्य कार्रवाई है."

चीनी कॉमर्स मंत्रालय ने कहा, "एक जिम्मेदार प्रमुख देश के रूप में, चीन हमेशा अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय साझा सुरक्षा की दृढ़ता से रक्षा करता है, हमेशा एक न्यायसंगत और उचित सैद्धांतिक रुख अपनाता है, और निर्यात नियंत्रण उपायों को विवेकपूर्ण और उदार तरीके से लागू करता है."

चीन ने अमेरिका की 'दोगली नीति' को किया एक्सपोज

बीजिंग ने वाशिंगटन पर सितंबर से चीन के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी टिप्पणी 'दोहरे मानदंड' को दर्शाती है. लंबे समय से, अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, निर्यात नियंत्रण का दुरुपयोग कर रहा है, चीन के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहा है, और सेमीकंडक्टर डिवाइस और चिप्स सहित विभिन्न उत्पादों पर एकतरफा दीर्घकालिक अधिकार क्षेत्र के उपाय लागू कर रहा है."

बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिकी वाणिज्य नियंत्रण सूची (सीसीएल) में 3,000 से अधिक वस्तुएं शामिल हैं, जबकि चीन की दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं की निर्यात नियंत्रण सूची में केवल लगभग 900 वस्तुएं शामिल हैं.

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चीनी मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय से निर्यात नियंत्रण के जो उपाय अपनाएं हैं, उन्होंने कंपनियों के वैध और कानूनी अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया. अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार व्यवस्था को गंभीर रूप से बाधित किया है, और वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर किया है."

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