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Pakistan अब पानी के लिए तरसेगा ! सिंधु जल संधि में बदलाव को लेकर भारत ने दिया नोटिस

भारत के एक नोटिस ने पाकिस्तान सरकार की नींद उड़ा दी है।सिंधु जल संधि में बदलाव की मांग को लेकर भारत ने पाकिस्तान को नोटिस भेजा है जिससे पाकिस्तान को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। नोटिस में कहा गया है कि हालात में “मौलिक और अप्रत्याशित” परिवर्तनों के कारण सिंधु जल संधि की समीक्षा जरूरी है।

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20 Sep 2024
( Updated: 10 Dec 2025
06:41 PM )
Pakistan अब पानी के लिए तरसेगा ! सिंधु जल संधि में बदलाव को लेकर भारत ने दिया नोटिस
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हाहाकार है। पहले ही महंगाई और अपने ही पाले आतंकियों से जूझ रहे पड़ोसी मुल्क पर अब एक और गाज गिर पड़ी है। ये सबको पता है कि कैसे Pakistan के आकाओं ने अपनी जनता को दहशत का डोज दिया है ताकि महंगाई और बाकि दिक्कतों पर लोगों का ध्यान न जाए। ये भी सबको पता है कि क्रिकेट का फील्ड हो या। बैटल फील्ड। हर जगह भारत पाकिस्तान से कोसों दूर निकल चुका है। लेकिन अब भारत के एक नोटिस ने पाकिस्तान सरकार की नींद उड़ा दी है। सिंधु जल संधि में बदलाव की मांग को लेकर भारत ने पाकिस्तान को नोटिस भेजा है जिससे पाकिस्तान को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। नोटिस में कहा गया है कि हालात में “मौलिक और अप्रत्याशित” परिवर्तनों के कारण सिंधु जल संधि की समीक्षा जरूरी है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि सिंधु जल संधि के अनुच्छेद 12(3) के तहत 30 अगस्त को पाकिस्तान को नोटिस जारी किया गया। हालांकि इस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है, दरअसल, भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वो दोनों देशों के बीच हुए एक पुराने समझौते, सिंधु जल संधि, में बदलाव चाहता है। 


यह समझौता दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे के बारे में है। भारत का कहना है कि इस समझौते के बाद से बहुत कुछ बदल गया है, इसलिए इसमें बदलाव की जरूरत है।भारत का कहना है कि जब यह समझौता हुआ था, तब की स्थिति अब नहीं है। देश की जनसंख्या बढ़ गई है, खेती के तरीके बदल गए हैं और हमें पानी का इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए भी करना है।

क्या है सिंधु जल समझौता?


भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में इस पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का नियंत्रण प्राप्त हुआ।

यह संधि भारत को पश्चिमी नदियों पर रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट्स के जरिए हायड्रो इलेक्ट्रिसिटी पावर जनरेट का अधिकार देती है, जो खास डिजाइन और संचालन मानदंडों के अधीन है। पाकिस्तान के पास यह अधिकार है कि वह इन नदियों पर भारत के हायड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर आपत्ति खड़ी कर सकता है।

सिंधु जल समझौते के मुताबिक भारत घरेलू उपयोग के लिए इस नदी का 20 फीसदी पानी और पाकिस्तान 80 फीसदी पानी उपयोग कर सकता था। लेकिन धीरे-धीरे इसके उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए।

सिंधु नदी से होता है पाकिस्तान का गुजारा

दूसरी तरफ पाकिस्तान बहुत ज्यादा हद तक सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है खासकर पंजाब प्रांत में, जो बाकी देश का पेट भरता है।जब भी भारत अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल करने या फिर बांध बनाने की कोशिश करता है तो पाकिस्तान आपत्ति जताता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत लगातार कोशिशें कर रहा है कि इस मामले के हल पर पहुंचा जाए, जो दोनों पक्षों को मंजूर हो। लेकिन 2017 से लेकर 2022 के बीच पांच बैठकों में पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर बातचीत से ही मना कर दिया। सिर्फ यही नहीं पाकिस्तान की तरफ से बढ़ते आतंकवाद को भी देखते हुए अब भारत ने ये नोटिस पाकिस्तान को थमा दिया है।

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