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'स्पेस में परमाणु युद्ध…', ट्रंप के 'गोल्डन डोम' प्लान से कांप उठा उत्तर कोरिया, कहा- यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस योजना पर उत्तर कोरिया भी भड़क उठा है. उत्तर कोरिया ने इसे बेहद खतरनाक बताया है. नॉर्थ कोरिया ने कहा कि इससे अंतरिक्ष में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है, जो बेहद गंभीर है.

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27 May 2025
( Updated: 08 Dec 2025
05:35 AM )
'स्पेस में परमाणु युद्ध…', ट्रंप के 'गोल्डन डोम' प्लान से कांप उठा उत्तर कोरिया, कहा- यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस योजना पर रूस और चीन के बाद अब उत्तर कोरिया भड़क गया है. उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया ने इस योजना को बेहद खतरनाक बताया है. उन्होंने कहा कि इससे ‘अंतरिक्ष में परमाणु युद्ध’ छिड़ सकता है. उत्तर कोरिया के अनुसार, यह पहल पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. 

विदेश मंत्रालय ने लगाया आरोप
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस योजना के ज़रिए अंतरिक्ष को सैन अड्डा बनाना चाहता है. उन्होंने कहा कि ‘ट्रंप की यह नीति परमाणु संपन्न देशों की रणनीतिक स्थिरता नुकसान पहुंचाने वाली है और इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और हथियारों की दौड़ बढ़ सकती’ 

क्या है 'गोल्डन डोम’ योजना?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्द ट्रंप ने इस नई मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए शुरुआती फंडिंग की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि  यह " देश की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है. यह प्रणाली इजरायल के 'आयरन डोन' एटम से - प्रेरित बताई जा रही है, जो अल्प दूरी की मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है. 

उत्तर कोरिया ने क्यों जताई नाराजगी? 
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरिया को डर है कि यह अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम उसकी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों (ICBMS) की क्षमता को बेअसर कर सकता है. कोरियन इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ विश्लेषक होंग मिन ने कहा, ‘अगर अमेरिका इस प्रणाली को पूरा करता है, तो उत्तर कोरिया को इसे चकमा देने या बेअसर करने के लिए वैकल्पिक हथियार विकसित करने पड़ेंगे.’

रूस-चीन ने भी जताई थी नाराजगी
उत्तर कोरिया से पहले चीन और रूस ने भी गोल्डन डोम को लेकर नाराजगी जताई थी. चीन ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह वैश्विक स्थिरता को कमजोर करती है. वहीं रूस ने शुरूआत में ही इस योजना को अस्थिर करने वाली बताया था. लेकिन इसके बाद इस योजना को अमेरिका का संप्रभु मामला मानते हुए नरम रवैया अपनाया गया. 

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