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न मुस्लिम न ईसाई... कौन हैं द्रुज समुदाय, जिनके लिए इजरायल ने सीरिया को कर दिया बर्बाद!

द्रुज समुदाय की धार्मिक जड़ें भले ही इस्लाम से जुडी रही हों, लेकिन वे स्वयं को मुख्यधारा के इस्लाम से अलग मानते हैं. द्रुज समुदाय मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान, इजराइल और जॉर्डन में आबाद है, हालांकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इनकी छोटी-छोटी बस्तियां हैं. अकेले सीरिया और गोलान हाइट्स में इनकी जनसंख्या लगभग 5 लाख के आसपास है. चलिए जानते हैं इस समुदाय के बारे में

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17 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:16 AM )
न मुस्लिम न ईसाई... कौन हैं द्रुज समुदाय, जिनके लिए इजरायल ने सीरिया को कर दिया बर्बाद!

हाल के दिनों में इजरायल और अमेरिका के रिश्तों में सुधार की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन इसी बीच इजरायल ने बुधवार को अचानक सीरिया पर हवाई हमले कर सभी को चौंका दिया. ये हमले सीरिया के रक्षा मंत्रालय को निशाना बनाकर किए गए, जिसमें राजधानी दमिश्क के भीतर भी गंभीर नुकसान पहुंचाया गया.
इजरायल ने इन हमलों को जायज ठहराते हुए दावा किया है कि सीरिया में द्रुज अल्पसंख्यक समुदाय पर सरकारी सुरक्षा बलों द्वारा अत्याचार किया जा रहा था. इजरायली सरकार का कहना है कि उसने द्रुज समुदाय की रक्षा के लिए यह कार्रवाई की है और आगे भी इस समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

द्रुजों की सुरक्षा को लेकर इजरायल का दावा 
बता दें आपको कि दक्षिण सीरिया में लगभग 5 लाख की आबादी वाला द्रुज समुदाय एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समूह माना जाता है. इजरायल का कहना है कि सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल शारा के नेतृत्व में जिहादी ताकतें मजबूत हो रही हैं और अब उनका निशाना दक्षिणी सीरिया बन चुका है, जहां द्रुजों की बडी आबादी बसती है.
इजरायली सरकार के अनुसार, द्रुज बहुल शहर स्वैदा में हाल ही में कई हमले हुए हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मारे गए. इजरायल का यह भी दावा है कि सोमवार को सीरियाई सेना ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया था. इजरायल का तर्क है कि उसने इन हमलों के जवाब में और द्रुजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य कार्रवाई की है.

द्रुज समुदाय की अहम अल्पसंख्यक पहचान
द्रुज समुदाय की धार्मिक जड़ें भले ही इस्लाम से जुडी रही हों, लेकिन वे स्वयं को मुख्यधारा के इस्लाम से अलग मानते हैं. 11वीं सदी में शिया इस्माइली मत से अलग होकर द्रुज संप्रदाय की उत्पत्ति हुई थी. द्रुज भी अब्राहमिक धर्मों के व्यापक परिवार का हिस्सा माने जाते हैं और एकेश्वरवाद में विश्वास रखते हैं — यानी उनका भी यह मानना है कि ईश्वर एक ही है.
हालांकि, उनकी कई मान्यताएं इस्लाम से भिन्न हैं. द्रुज समुदाय के लोग पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं और आमतौर पर भाग्यवाद के सिद्धांत को भी मानते हैं. मूलतः यह समुदाय अरबी मूल का है और इनकी प्रमुख भाषा अरबी ही है.

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द्रुज समुदाय मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान, इजराइल और जॉर्डन में आबाद है, हालांकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इनकी छोटी-छोटी बस्तियां हैं. अकेले सीरिया और गोलान हाइट्स में इनकी जनसंख्या लगभग 5 लाख के आसपास है. इस समुदाय की एक महत्वपूर्ण आबादी इजराइल में भी रहती है और इजरायली समाज में उसकी खास जगह है.
इजरायल और यहूदी समुदाय द्रुजों को अपने करीब मानते हैं. इसकी एक बडी वजह यह है कि द्रुज भी अब्राहमिक परंपरा से जुड़े हैं, लेकिन इस्लाम की मुख्यधारा की मान्यताओं को नहीं मानते. द्रुज धर्म में न तो धर्म परिवर्तन की अनुमति है, न ही अंतरधार्मिक विवाह की.
इजरायली सेना में भी द्रुजों की भागीदारी उल्लेखनीय रही है. इसके बावजूद, इस्लामिक चरमपंथी समूहों द्वारा यह समुदाय अकसर निशाने पर रहा है और हिंसा का शिकार बनता रहा है.

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