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आम चुनाव टाले जाने पर घिरे मोहम्मद यूनुस, अप्रैल 2026 की घोषणा से बढ़ा बांग्लादेश में सियासी तनाव

ईद-उल-अजहा की पूर्व संध्या पर बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है. अपने टेलीविजन संबोधन में यूनुस ने ऐलान किया कि देश में अगला आम चुनाव अब अप्रैल 2026 में होगा. यूनुस ने अपने संबोधन में अंतरिम सरकार के पिछले 10 महीनों के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया और बताया कि उनकी सरकार तीन बिंदुओं न्याय, सुधार और पारदर्शी चुनाव के एजेंडे पर काम कर रही है.

आम चुनाव टाले जाने पर घिरे मोहम्मद यूनुस, अप्रैल 2026 की घोषणा से बढ़ा बांग्लादेश में सियासी तनाव

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस इन दिनों चौतरफा विरोध का सामना कर रहे हैं. देश के भीतर राजनीतिक दलों से लेकर सेना तक, हर कोई जल्द आम चुनाव कराने का दबाव बना रहा है. लेकिन ईद-उल-अजहा की पूर्व संध्या पर यूनुस ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है. अपने टेलीविजन संबोधन में यूनुस ने ऐलान किया कि देश में अगला आम चुनाव अब अप्रैल 2026 में होगा. 

दरअसल, बकरीद की पूर्व संध्या पर नेशनल टेलीविजन पर देश के नाम एक संबोधन में कहा, "मैं देशवासियों को यह बताना चाहता हूं कि अगला राष्ट्रीय चुनाव अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े में किसी भी दिन होगा में होगा." इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग समय आने पर विस्तृत चुनावी रोडमैप जारी करेगा. यूनुस ने अपने संबोधन में अंतरिम सरकार के पिछले 10 महीनों के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया और बताया कि उनकी सरकार तीन बिंदुओं न्याय, सुधार और पारदर्शी चुनाव के एजेंडे पर काम कर रही है.

त्रुटिपूर्ण चुनावों से फासीवाद पनपा: मोहम्मद यूनुस
देश के नाम संबोधन के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना पर अप्रत्यक्ष रूप से तीखा हमला बोला. यूनुस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश को चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर पहले भी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. उन्होंने कहा, "हमें यह अच्छे से याद रखना चाहिए कि जब-जब बांग्लादेश में त्रुटिपूर्ण चुनाव हुए हैं, देश गहरे संकट में फंसा है.” इसके साथ ही उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पूर्ववर्ती सरकार पर इशारा करते हुए कहा, "एक राजनीतिक दल ने अतीत में ऐसे चुनावों के ज़रिए सत्ता हथियाई थी और देखते ही देखते एक बर्बर फासीवादी ताकत बन गया था.” बंगलादेश की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों की माने तो यह टिप्पणी शेख़ हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग पर सीधा हमला है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रही है और जिन पर चुनावों में धांधली के आरोप लगते रहे हैं.

विपक्ष ने जताई नाराज़गी
हालांकि यूनुस की यह घोषणा विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी के गले नहीं उतर रही. तमाम विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह चुनाव टालने की रणनीति है ताकि मौजूदा सत्ता को ज़्यादा समय मिल सके. सेना के कुछ हलकों से भी असंतोष के सुर सुनाई दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात काबू में नहीं आए तो बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता की एक नई लहर में प्रवेश कर सकता है. बताते चलें कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि देश में दिसंबर से पहले राष्ट्रीय चुनाव कराना पूरी तरह संभव है, क्योंकि आम सहमति के आधार पर आवश्यक सुधार पूरे करने में एक महीने से भी कम समय लग सकता है.

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मोहम्मद यूनुस के चुनाव के ऐलना के बाद सलाहुद्दीन ने दोहराया कि उन्हें अभी तक दिसंबर के बाद चुनाव टालने का कोई वैध तर्क नहीं मिला है. उन्होंने कहा, "हम सभी लोकतंत्र और लोगों के मतदान के अधिकार को स्थापित करने के लिए शीघ्र चुनाव के पक्ष में हैं.  ऐसा एक भी कारण नहीं है जो दिसंबर के बाद चुनाव कराने को उचित ठहराए." बीएनपी को चुनावों में बहुमत हासिल करने का भरोसा है, जबकि यूनुस, जो वर्तमान में देश की अराजक, हिंसक, अस्थिर राजनीति की प्रबल धाराओं में उतरा रहे हैं, पहले लोकतांत्रिक सुधारों को लागू करने और चुनावों को जून 2026 तक टालने पर जोर दे रहे हैं.

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