इजरायल के निशाने पर हैं ईरान के परमाणु ठिकाने, नई खुफिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा

एक नई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि इजरायल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने की तैयारी में है. यह जानकारी उस वक्त सामने आई है जब अमेरिका ईरान से परमाणु समझौता करने की कोशिश में जुटा है.

इजरायल के निशाने पर हैं ईरान के परमाणु ठिकाने,  नई खुफिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा
मध्य पूर्व एक बार फिर से खौफ के साये में है. अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने की योजना बना रहा है. यह खुलासा उस समय हुआ है जब अमेरिका ईरान के साथ एक कूटनीतिक समझौते की कोशिश में जुटा है. ऐसे में इजरायल की सैन्य तैयारी को गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इजरायल ने यह कदम उठाया तो यह सिर्फ एक देश पर हमला नहीं होगा, बल्कि पूरे पश्चिमी एशिया में युद्ध की चिंगारी को हवा दे सकता है.

इजरायल की रणनीति और अमेरिका की चिंता

अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर मतभेद है कि क्या इजरायल वास्तव में हमला करेगा या यह सिर्फ दबाव की रणनीति है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में इस हमले की संभावना काफी बढ़ गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल की सैन्य गतिविधियों जैसे हवाई हथियारों की आवाजाही, ड्रिल्स और युद्धाभ्यास इस ओर इशारा करते हैं कि कोई बड़ी तैयारी चल रही है. अमेरिका इस स्थिति को लेकर सतर्क है क्योंकि उसका रुख अब भी कूटनीति पर आधारित है. लेकिन अगर इजरायल ने यह कदम उठाया तो यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति के खिलाफ होगा और गाजा युद्ध के बाद से जो संघर्ष टालने की कोशिश हो रही है, वह फिर से भड़क सकती है.

खामनेई पर दबाव बनाने की कोशिश या सीधा हमला?

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल शायद सीधे हमले की बजाय ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई को पहले ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक पत्र भेजा गया था जिसमें 60 दिनों की बातचीत की समय सीमा तय की गई थी. अब यह समय सीमा बीत चुकी है और अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है. ऐसे में यह आशंका और गहराती जा रही है कि अगर कूटनीतिक वार्ता असफल होती है तो इजरायल सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुन सकता है. हालांकि यह भी स्पष्ट नहीं है कि इजरायल अकेले हमला करेगा या अमेरिका की सहमति से कोई साझा अभियान चलाया जाएगा.

नेतन्याहू की कूटनीतिक उलझन

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने इस समय दोहरी चुनौती है. एक तरफ वे अमेरिका के साथ अपने संबंधों को खराब नहीं करना चाहते और दूसरी तरफ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी कोई समझौता नहीं कर सकते. अगर ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता करता है जो इजरायल को कमजोर महसूस कराता है, तो नेतन्याहू के लिए चुप रहना मुश्किल हो जाएगा. इसके साथ ही इजरायल का यह भी मानना है कि अगर वह अभी कड़ा रुख नहीं अपनाता तो भविष्य में ईरान का परमाणु खतरा और गंभीर हो सकता है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल वास्तव में हमला करेगा या नहीं, लेकिन खुफिया रिपोर्ट्स और सैन्य गतिविधियों को देखते हुए इस संभावना को पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता. अगर हमला होता है तो यह केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. इसका असर सीधा तेल बाजार, वैश्विक सुरक्षा और भारत जैसे देशों की विदेश नीति पर भी पड़ेगा. भारत, जो मध्य पूर्व के साथ व्यापार और ऊर्जा के मामलों में गहराई से जुड़ा है, उसे भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है.

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि नेतन्याहू का यह संभावित फैसला सिर्फ खामनेई के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत हो सकता है. यह वक्त बेहद नाज़ुक है और आने वाले दिन यह तय करेंगे कि मध्य पूर्व में शांति की डोर मजबूत होगी या एक और युद्ध का अध्याय लिखा जाएगा.

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