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'मुझे लगता है वो मारना चाहते हैं...' हमास पर फूटा ट्रंप का गुस्सा, इजरायल को दी खुली छूट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकी संगठन हमास पर कड़ा रुख अपनाते हुए इजरायल को गाजा में सैन्य अभियान तेज करने की खुली छूट दे दी है. ट्रंप ने कहा कि हमास को शांति में कोई दिलचस्पी नहीं है और वह बातचीत नहीं, मरना चाहता है. दरअसल, हमास ने अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि अब डिप्लोमेसी से बात नहीं बनेगी.

'मुझे लगता है वो मारना चाहते हैं...' हमास पर फूटा ट्रंप का गुस्सा, इजरायल को दी खुली छूट
Image: Social Media X

अमेरिका और इजरायल के बीच फिर एक बार युद्ध नीति पर पूर्ण सहमति बनती दिख रही है. गाजा पट्टी में हमास के आतंक और अड़ियल रवैये को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खुलकर मैदान में उतर आए हैं. बीते कुछ समय से अमेरिका, मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहा था, लेकिन हालात अब कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.

दरअसल, ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब हमास से बातचीत का कोई मतलब नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि “हमास को शांति में कोई दिलचस्पी नहीं है. मुझे तो लगता है कि वो बस मरना चाहते हैं.” ट्रंप की यह टिप्पणी उस वक्त आई जब हमास ने अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया. यह प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से मध्यस्थता के लिए भेजे गए स्टीव विटकॉफ और उनकी टीम की कोशिशों का परिणाम था.

शांति वार्ता की कोशिशें नाकाम

अमेरिका ने गाजा पट्टी में सुलह और बातचीत के ज़रिए स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए थे. स्टीव विटकॉफ की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया था, जिसने हमास के नेताओं से बातचीत की कोशिश की. लेकिन जब यह वार्ता अंतिम चरण में पहुंची, तो हमास ने इसे एक झटके में ठुकरा दिया. इस इनकार के बाद विटकॉफ ने साफ कहा कि अमेरिका अब पीछे हट रहा है. उन्होंने कहा, “अब हमें किसी दूसरे विकल्प पर विचार करना चाहिए.” यही वह क्षण था जिसने ट्रंप के रुख को और अधिक सख्त बना दिया.

ट्रंप का दो टूक संदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा, “अब वक्त आ गया है. लड़ो और उन्हें खत्म कर दो.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल अगर गाजा में अपने सैन्य अभियानों को तेज करता है, तो अमेरिका उसका पूरा समर्थन करेगा. ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने खुद हमास के चंगुल से अंतिम अमेरिकी-इजरायली नागरिक एडन एलेक्जेंडर की रिहाई में अहम भूमिका निभाई थी. उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि हमास किसी भी प्रकार की शांति के लिए तैयार नहीं है.

नेतन्याहू ने भी दोहराया ट्रंप का समर्थन

इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बेंजामिन नेतन्याहू ने भी स्टीव विटकॉफ के शब्दों को दोहराया और कहा कि हमास इस पूरे शांति प्रयास में सबसे बड़ी बाधा है. उन्होंने कहा कि हम अपने अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर बंधकों की सुरक्षित वापसी, आतंकवाद का अंत और क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के नए रास्तों पर विचार कर रहे हैं. नेतन्याहू का यह रुख अब साफ करता है कि आने वाले समय में गाजा पर सैन्य कार्रवाई और अधिक तेज हो सकती है.

अब कूटनीति नहीं, कार्रवाई की नीति

ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट हो चुका है कि अमेरिका अब कूटनीति के रास्ते से हट चुका है. उनका रुख इजरायल को खुली छूट देने और हमास के खिलाफ खुला युद्ध छेड़ने के पक्ष में है. यह कदम सिर्फ इजरायल के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है कि अमेरिका आतंक के खिलाफ अब बिना शर्त सख्त रणनीति अपनाने को तैयार है.

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बता दें कि हमास द्वारा शांति प्रस्ताव का इनकार और अमेरिकी प्रयासों का विफल होना एक बड़े टकराव की भूमिका तैयार कर चुका है. डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान कि “अब हमास की खैर नहीं” केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक नीति का हिस्सा लगता है. आने वाले दिनों में गाजा पट्टी की स्थिति और बिगड़ सकती है और इजरायल को एक निर्णायक युद्ध के लिए अमेरिका की सीधी राजनीतिक और सैन्य मंजूरी मिल सकती है. शांति की बात करने वालों के लिए यह एक गहरी चिंता का विषय है, लेकिन ट्रंप की नज़र में अब केवल एक ही विकल्प बचा है, हमास का पूरी तरह अंत.

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