'उसे वोट देकर पछता रहा हूं...', अपनों पर ही कहर बनकर टूट रहे ट्रंप, पछता रहे सपोर्टर्स, उठ रहे 'विद्रोह' के सुर
59 वर्षीय ब्रिटिश महिला डोना ह्यूजेस-ब्राउन, जो पिछले तीन दशकों यानी कि करीब 37 सालों से अधिक समय से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रही थीं, उन्हें निर्वासित कर दिया गया है. शिकागो के ओ’हारे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें पांच दिन तक रोका गया और फिर केंटकी के एक डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया. अब उनके पति ट्रंप को सपोर्ट करने पर पछता रहे हैं.
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डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं दुनियाभर के लोगों पर कहर बनकर टूट रहे हैं. और तो और उनके समर्थक, दोस्त और खुद उनके वोटर ही सबसे ज्यादा परेशानी का सामना कर रहे हैं. Make America Great Again (MAGA) सपोर्टर्स को खुश करने को लेकर ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे कि एक-एक कर लोग, करीबी, साथी सब दूर होने लगे हैं. ऐसा ही एक मामला शिकागो से सामने आया है, जहां कथित इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर एक ब्रिटिश महिला को डिपोर्ट कर दिया गया.
दरअसल 59 वर्षीय ब्रिटिश महिला डोना ह्यूजेस-ब्राउन, जो पिछले तीन दशकों यानी कि करीब 37 सालों से अधिक समय से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रही थीं, उन्हें निर्वासित कर दिया गया है. शिकागो के ओ’हारे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें पांच दिन तक रोका गया और फिर केंटकी के एक डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया.
'ट्रंप को वोट देकर गलती कर दी'
डोना, मूल रूप से इंग्लैंड की रहने वाली हैं और जेम्स ब्राउन की पत्नी हैं. जेम्स ब्राउन कभी डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक थे, लेकिन अब खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें ट्रंप को वोट देने पर अफसोस है. उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन की कड़ी इमिग्रेशन नीति के कारण उनकी पत्नी पर कार्रवाई हुई है. 29 जुलाई को जब डोना आयरलैंड की छुट्टी से लौटीं, तभी उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
'पछता रहा हूं कि मैंने...'
जेम्स ब्राउन ने कहा कि वह सौ प्रतिशत पछता रहे हैं कि उन्होंने ट्रंप को समर्थन दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी मीडिया सच्चाई नहीं दिखा रहा और यह नहीं बता रहा कि कानूनी प्रवासियों के साथ क्या हो रहा है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रवासियों के प्रति अपमानजनक रवैया अपनाते हैं और इतनी प्रतिशोधी प्रवृत्ति रखते हैं कि लोग डर के कारण आवाज तक नहीं उठा पाते.
डोना का मामला 2015 की एक मामूली आपराधिक घटना से जुड़ा है. उनके पति का कहना है कि यह प्रकरण सालों पहले ही खत्म हो चुका था. डोना ने 37 साल से अधिक समय तक अमेरिका का ग्रीन कार्ड अपने पास रखा है और इसे दो बार रिन्यू भी कराया. उन्होंने अपने जीवन को चार बच्चों और पांच पोते-पोतियों के साथ बसाया है.
ट्रंप की गलती का भुगतना पड़ रहा अंजाम!
उनकी बॉन्ड सुनवाई एक प्रशासनिक गलती के कारण विलंब से हुई और बाद में नए नियमों के तहत दो बार खारिज कर दी गई. फिलहाल वह केंटकी में हिरासत में हैं. जेम्स ब्राउन का कहना है कि उनकी पत्नी हमेशा सामुदायिक कार्यों में सक्रिय रही हैं. वह सिंगल मॉम्स की मदद करती हैं, मुफ्त भोजन के लिए “ब्लेसिंग बॉक्स” चलाती हैं और पिछले साल आए तूफान हेलेन के बाद प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री भी जुटाई थी. ब्राउन ने कहा कि हमने तूफान हेलेन के समय राहत सामग्री बांटी, हमेशा वॉलंटियर वर्क करते हैं, फौजी परिवारों की मदद करते हैं. हमारा एक बेटा मरीन है और इसके बावजूद हमारी यह हालत हो रही है.
जेम्स ब्राउन खुद 1985 से 2005 तक अमेरिकी नौसेना में सेवा कर चुके हैं. अगर डोना को निर्वासित किया जाता है तो वह अगले दस साल तक अमेरिका में वापसी नहीं कर पाएंगी.
यह घटना केवल अमेरिका में रह रहे यूरोपीय प्रवासियों तक सीमित नहीं है. हाल के वर्षों में ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों का असर भारत समेत कई देशों से गए प्रवासियों पर भी पड़ा है. भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जिसे अब तक अमेरिका की सबसे सफल प्रवासी आबादी माना जाता है, भी इस सख्ती से अछूता नहीं रहा. कई भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स ने वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़ी नई जटिलताओं के कारण कठिनाइयों का सामना किया है. एच-1बी वीजा पर काम करने वाले हजारों भारतीय इंजीनियर और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के भविष्य पर भी इसका असर पड़ा है.
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भारत के लिहाज से यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी अमेरिका की अर्थव्यवस्था और समाज में योगदान दे रहे हैं. अगर इस तरह की कार्रवाई और कड़ी होती है तो इसका सीधा असर भारतीय परिवारों और समुदायों पर पड़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों की यह दिशा दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों पर भी असर डाल सकती है.
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