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पहले जेलेंस्की, ट्रूडो और रामाफोसा... और अब नेतन्याहू पर भड़क उठे डोनाल्ड ट्रंप, आखिर क्या है झुंझलाहट की वजह?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हाल ही में कई विश्व के दिग्गज नेताओं पर भड़कते नजर आए हैं. जेलेंस्की, ट्रूडो और रामाफोसा के बाद अब पीएम नेतन्याहू ट्रंप के गुस्से का शिकार हो गए. ट्रंप की आक्रामकता और वैश्विक नेताओं के साथ उनके संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है.

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27 May 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:00 AM )
पहले जेलेंस्की, ट्रूडो और रामाफोसा... और अब नेतन्याहू पर भड़क उठे डोनाल्ड ट्रंप, आखिर क्या है झुंझलाहट की वजह?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से काफी ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं. वो अपनी बात सभी पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं. और जो उनकी बात नहीं मान रहे हैं, उन्हें ट्रंप के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा रह है. इस लिस्ट में अमेरिकी नेता से लेकर दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं का नाम शामिल है.
अब ताजा जानकारी के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल में बहस छिड़ गई. इस फोनकॉल पर ईरान के साथ चल रही अमेरिका की बातचीत और गाजा युद्ध पर चर्चा हो रही थी. इजरायल के चैनल 12 ने सोमवार को जानकारी दी कि दोनों नेता तेहरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकने के लिए एकमत नहीं है.

आखिर क्यों हुई बहस? 
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने गुरुवार को कॉल के दौरान नेतन्याहू से कहा, ‘मैं ईरानियों के साथ एक कूटनीतिक समाधान चाहता हूं. मुझे एक अच्छा सौदा करने की अपनी क्षमता पर विश्वास है.’ उन्होंने कथित तौर पर इस बात पर भी जोर दिया कि वह एक ऐसे समझौते की तलाश कर रहे हैं जो दोनों पक्षों के हितों की पूर्ति करेगा. लेकिन इजरायल नहीं चाहता कि ईरान के साथ अमेरिका के रिश्ते सामान्य हों.

चैनल 12 ने बताया कि कॉल का लहजा पहले से अलग प्रतीत होता है. ट्रंप नेतन्याहू से इन दिनों अलग चल रहे है, उन्होंने अपने मध्य पूर्व दौरे से भी इजरायल को दूर रखा था. हालांकि चैनल 12 ने बताया कि बातचीत आपसी समझ के नोट पर समाप्त हुई.

जेलेंस्की, रामफोसा और ट्रूडो पर भी ग़ुस्सा चुके हैं ट्रंप
बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब किसी बड़े नेताको ट्रंप के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा हो. ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका रामाफोसा से बातचीत के दौरान एक वीडियो चलाया, जिसमें श्वेतों के नरसंहार के साक्ष्य दिखाए जाने का दावा किया गया था. दक्षिण अफ्रीका ने इन सभी आरोपों को खारिज करते कहा कि गोरे लोग अपराध के मामले में औसतन ज्यादा निशाना बनते है, लेकिन देश में हत्या की दर बहुत ज्यादा है और पीड़ितों में ज्यादातर अश्वेत है. इसके अलावा वह यूक्रेन रूस युद्ध पर जेलेंस्की से भी भिड़ चुके हैं. वहीं वह कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर भी तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं.

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