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पहले बरसाए बम, अब खोल दिया अरबों डॉलर का खजाना! ईरान को लेकर ट्रंप का बड़ा यू-टर्न

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध में अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरान की तीन परमाणु साइट्स पर बी-2 बॉम्बर्स से हमला किया. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद अमेरिका ने युद्धविराम में मध्यस्थता की, लेकिन अब खबर है कि वह कूटनीति के रास्ते पर लौटते हुए ईरान को 30 अरब डॉलर तक के निवेश की पेशकश कर रहा है.

पहले बरसाए बम, अब खोल दिया अरबों डॉलर का खजाना! ईरान को लेकर ट्रंप का बड़ा यू-टर्न

पश्चिम एशिया में बीते दो हफ्तों से लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब हालात एक नया मोड़ लेते दिख रहे हैं. जहां एक ओर ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक सैन्य संघर्ष हुआ, वहीं अमेरिका की भूमिका भी इस संघर्ष में लगातार गहराती जा रही है. इस बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है कि अमेरिका अब कूटनीति के रास्ते पर लौटता दिख रहा है.

दरअसल, व्हाइट हाउस ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह ईरान के साथ संघर्ष के बजाय बातचीत और समझौते के जरिए समाधान निकालना चाहता है. अमेरिकी प्रशासन ने पुष्टि की है कि वे ईरान के साथ "डिप्लोमैटिक चैनल्स" के माध्यम से संपर्क में हैं. लेकिन इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने ईरान को 20 से 30 अरब डॉलर के संभावित निवेश की पेशकश की है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे गहन बातचीत चल रही है. इसमें आर्थिक सहयोग से लेकर ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी तक के मुद्दे शामिल हैं. रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिका ईरान के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम में निवेश करने पर विचार कर रहा है, यानी परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए मदद देना चाहता है. हालांकि अमेरिका यह धनराशि सीधे तौर पर न देकर खाड़ी के कुछ अरब देशों के माध्यम से ईरान तक पहुंचा सकता है, ताकि कूटनीतिक स्तर पर किसी तरह का प्रत्यक्ष विरोध न झेलना पड़े.

आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं
इस संभावित डील को लेकर न तो अमेरिका की ओर से और न ही ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि यह डील आगे बढ़ती है तो यह न सिर्फ ईरान-अमेरिका संबंधों में एक बड़ा मोड़ होगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र की राजनीतिक दिशा भी बदल सकती है.

अमेरिका से बातचीत पर ईरान का पलटवार
जहां एक ओर अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, वहीं ईरान की ओर से इस पर विपरीत बयान सामने आया है. ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ अब तक कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है. अराघची ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा, "अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा होती है या नहीं." अराघची ने आगे कहा, "हमारे निर्णय पूरी तरह से ईरान के हितों पर आधारित होंगे. यदि हमें लगेगा कि बातचीत से हमारे हितों को फायदा हो सकता है, तभी हम इस पर विचार करेंगे." ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इस मुद्दे पर किसी तरह की कोई बातचीत, कोई समझौता, या कोई वादा नहीं किया गया है. उनका यह बयान अमेरिका द्वारा संभावित 30 अरब डॉलर की डील की पेशकश की खबरों के बीच आया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल इस विषय पर सतर्क और स्थितिपरक रुख अपना रहा है.

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बताते चलें कि अमेरिका की ओर से डील और बातचीत के संकेत, और ईरान की ओर से सतर्क प्रतिक्रिया, यह इस बात संकेत हैं कि हालात बेहद संवेदनशील और अनिश्चित हैं. इज़रायल की सैन्य सक्रियता, ईरान की रणनीतिक चुप्पी और अमेरिका की दोहरी नीति ये तीनों ही पश्चिम एशिया को आने वाले दिनों में किसी बड़े फैसले या टकराव की ओर धकेल सकते हैं. ऐसे में दुनिया की निगाहें अब इस त्रिकोणीय तनाव के अगले कदम पर टिकी हैं.

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