म्यांमार में फिर खून-खराबा... सेना ने अपने ही शहर पर किया एयरस्ट्राइक, 21 की मौत, कई घर तबाह

म्यांमार के मोगोक शहर पर सेना के हवाई हमले में 21 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक गर्भवती महिला, 16 महिलाएं और दो बौद्ध भिक्षु शामिल हैं. यह हमला गुरुवार रात मांडले से 115 किलोमीटर दूर श्वेगु वार्ड में हुआ. तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी (TNLA) ने बताया कि हमले में 15 घर और एक बौद्ध मठ भी तबाह हो गया. बता दें कि मोगोक जुलाई 2024 से टीएनएलए के कब्ज़े में है और सेना इसे वापस लेने के लिए हमले तेज कर रही है.

म्यांमार में फिर खून-खराबा... सेना ने अपने ही शहर पर किया एयरस्ट्राइक, 21 की मौत, कई घर तबाह
Source :X

दक्षिण-पूर्व एशिया का देश म्यांमार एक बार फिर हिंसा और खून-खराबे का गवाह बना है. सेना और जातीय समूहों के बीच छिड़े संघर्ष ने आम नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया है. ताज़ा मामला म्यांमार के मशहूर मोगोक शहर का है, जिसे जेम स्टोन सिटी यानी मणि-रत्नों का शहर कहा जाता है. यहां सेना ने हवाई हमला किया जिसमें एक गर्भवती महिला, कई स्थानीय लोग और प्रतिरोध समूहों से जुड़े लोग मारे गए. स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार मरने वालों की संख्या 21 से कहीं अधिक है.

हमला कब और कैसे हुआ

जानकारी के मुताबिक यह हमला गुरुवार रात करीब 8:30 बजे हुआ. मांडले से लगभग 115 किलोमीटर दूर स्थित मोगोक टाउनशिप के श्वेगु वार्ड में अचानक एक फाइटर जेट से बम गिराया गया. तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी (TNLA) के प्रवक्ता लवे याय ऊ ने बताया कि इस हमले में न केवल घर तबाह हुए बल्कि बौद्ध मठ की इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं.

16 महिलाएं और दो भिक्षु की गई जान

टीएनएलए ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बयान जारी करते हुए कहा कि हवाई हमले में मारे गए लोगों में 16 महिलाएं और दो बौद्ध भिक्षु भी शामिल थे. करीब 15 घर पूरी तरह मलबे में बदल गए। सात लोग गंभीर रूप से घायल हैं और इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मोगोक के दो निवासियों ने एपी को बताया कि मरने वालों की संख्या 30 के करीब है. उनका कहना है कि सेना के डर से सही आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं. कई परिवार अपने प्रियजनों के शव उठाने तक नहीं जा पा रहे. इलाके में चारों तरफ चीख-पुकार, खून और मलबे का मंजर है.

किन वजहों से हुआ हमला 

मोगोक क्षेत्र जुलाई 2024 में टीएनएलए के कब्जे में चला गया था. यह समूह चीन की सीमा के पास सक्रिय सबसे ताकतवर जातीय मिलिशियाओं में से एक है. टीएनएलए, 2023 के अंत में शुरू हुए संयुक्त विद्रोह का हिस्सा है जिसने उत्तर-पूर्वी म्यांमार के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया है. सेना अब इन्हीं इलाकों को वापस लेने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर रही है. म्यांमार में यह हालात फरवरी 2021 के बाद से बने हैं जब सेना ने आंग सान सू की की लोकतांत्रिक सरकार से सत्ता छीन ली. शुरुआत में लोग सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए, लेकिन सेना ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। इसके बाद विरोधी समूहों ने हथियार उठाए और अब यह देश एक गृहयुद्ध की जकड़ में है.

लगातार बढ़ रहे हवाई हमले

म्यांमार की सेना का कहना है कि वह केवल "वैध ठिकानों" को निशाना बनाती है और प्रतिरोध समूहों को आतंकवादी बताती है. लेकिन वास्तविकता यह है कि हर हमले में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं. म्यांमार नाउ और डेमोक्रेटिक वॉयस ऑफ बर्मा जैसी स्वतंत्र मीडिया संस्थाओं ने घटनास्थल से तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं जिनमें खंडहर बने घर और खून से सनी ज़मीन साफ दिखती है. अगस्त 2024 के पहले दो हफ्तों में ही हवाई हमलों में 17 लोग मारे गए और 20 घायल हुए. इनमें दो बौद्ध भिक्षु भी शामिल थे. पिछले हफ्ते ही मध्य म्यांमार के सागाइंग शहर में ट्रकों के काफिले पर हवाई हमला हुआ जिसमें लगभग 16 लोगों की मौत हुई थी.

सेना का नियंत्रण घटा

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विश्लेषकों के अनुसार सेना अब देश के आधे से भी कम हिस्से पर काबिज़ है. हालांकि राजधानी नेपीता और मध्य म्यांमार पर उसका प्रभाव मज़बूत है। इस साल के अंत में सेना ने चुनाव कराने की घोषणा की है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ अपनी सत्ता को वैध ठहराने का एक प्रयास है. विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया है और स्वतंत्र मीडिया पर रोक है. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रस्तावित चुनाव म्यांमार के लोकतंत्र की बहाली की बजाय सेना की पकड़ और मजबूत करेंगे. कई विपक्षी समूहों ने ऐलान किया है कि वे इन चुनावों को नाकाम करने की कोशिश करेंगे.

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