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ट्रंप को रिझाने के लिए आसिम मुनीर ने खेला था चापलूसी दांव, अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद खोले मुलाकात के राज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद दावा किया कि मई में उनके प्रयासों से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष को रोका जा सका. ट्रंप ने कहा कि युद्ध बेहद विनाशकारी होने वाला था और इससे लाखों जानें बचाई गईं. हालाँकि भारत ने इस दावे को लगातार खारिज किया है.

ट्रंप को रिझाने के लिए आसिम मुनीर ने खेला था चापलूसी दांव, अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद खोले मुलाकात के राज
Asim Munir/ Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर से भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का क्रेडिट लेने का भूत उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है. उन्होंने एक बार फिर ऐसा ही दावा किया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा है कि मई में उनका प्रयास था, जिसके चलते दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोका जा सका. हालांकि, भारत शुरू से ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज करता रहा है. कई मौक़े पर पाकिस्तान के सरकार में शामिल मंत्रियों ने भी ट्रंप के दावे को झूठ बताया था. लेकिन अमेरिका पहुंचने बाद उन्होंने ट्रंप की चापलूसी किस कदर की वो अब खुलकर सामने आ गया है. 

सम्मानित महसूस कर रहा हूं: ट्रंप

ट्रंप ने बताया कि 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ मौजूद थे, जो पाकिस्तान में महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं.' उन लोगों के एक ग़्रुप ने कहा कि इस व्यक्ति (ट्रंप) की वजह से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकी, क्योंकि उसने युद्ध को जारी होने से रोका. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह सुनकर संतोष व्यक्त किया और कहा, 'युद्ध बेहद विनाशकारी होने वाला था. मैं इस बात से बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं. उनका इस मुद्दे पर बात करने का तरीका मुझे बहुत पसंद आया. सबसे अहम बात यह है कि हमने बहुत सारी जानें बचाईं." इस मौके पर व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसान विल्स भी मौजूद थीं.

ट्रंप के दावे पर भारत की प्रतिक्रिया 

इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच चार दिनों में तनाव बहुत बढ़ चुका था. और सात विमानों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें थीं. उन्होंने बताया, 'भारत और पाकिस्तान भिड़ रहे थे, इसलिए मैंने दोनों नेताओं से फोन पर बात की. मैंने उन्हें चेताया कि मैं इस मामले में किसी तरह का ट्रेड नहीं करूंगा. आप दोनों परमाणु संपन्न देश हैं, और इस भयानक युद्ध में उतरना अस्वीकार्य है. मैंने इसे रोक दिया.' ट्रंप ने स्पष्ट नहीं किया कि सात विमान किस देश के थे. हालांकि, भारत ने उनके इस दावे को हमेशा से खारिज करता रहा है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, मई में पाकिस्तान के साथ सीजफायर का समझौता दोनों देशों के सैन्य प्रमुखों (DGMO) के बीच सीधे वार्ता से हुआ था. मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने पाकिस्तानी वायुसेना पर बड़े हमले किए थे, जिनमें सैटेलाइट इमेजरी से हैंगर और रनवे को नुकसान की पुष्टि हुई.

शहबाज का दावों की क्या है वास्तविकता 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालिया भाषण में दावा किया कि उनकी वायुसेना ने मई की झड़प में सात भारतीय जेट नष्ट कर दिए. उन्होंने कहा, 'हमारे बाज उड़ गए और सात भारतीय जेट कबाड़ में बदल गए.' हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी से स्पष्ट हुआ कि भारतीय हमलों के दौरान पाकिस्तानी एयरबेस को गंभीर नुकसान हुआ, जिसमें रनवे और हैंगर क्षतिग्रस्त हो गए. इसके अलावा, पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई पूरी तरह विफल रही. इस तरह वास्तविक सैन्य स्थिति उनके दावों को खारिज करती है.

नोबेल पुरस्कार न मिलना निराशाजनक: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी निराशा व्यक्त की. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति को भी दिया जा सकता है जिसने वास्तव में कुछ नहीं किया. इसके बावजूद, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद व्यक्तिगत पहचान हासिल करना नहीं था. उन्होंने कहा, 'मुझे यह व्यक्तिगत रूप से नहीं चाहिए, मेरा उद्देश्य देश के लिए योगदान देना है.'

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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित पर्यटन स्थल बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने कायराना हरकत करते हुए पर्यटकों को निशाना बनाकर हमला किया. आतंकियों ने सैलानियों का धर्म पूछकर उन्हें मार डाला. इस हमले में कुछ 26 लोगों की जान हेली गई थी. इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पीओके में आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया. इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी एयरबेस को गंभीर क्षति पहुंचाई. इसके बाद भारत के सात प्रतिनिधि मंडलों ने दुनियाभर में सबूत के साथ पाकिस्तान को बेनाकाब करने के काम किया था. 

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