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हर साल जनवरी महीने की कमाई दान कर देता है ये चायवाला, इमोशनल कर देगी वजह

शिंबा शंकर जेना की कमाई बेहद सीमित है. बचपन में ही पिता का साया उठ गया. इसके बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन पर चाय का ठेला लगा लिया.

हर साल जनवरी महीने की कमाई दान कर देता है ये चायवाला, इमोशनल कर देगी वजह

सोशल मीडिया (Social Media) में चायवाले (Tea Seller) का फर्श से अर्श सफर दिखाया जाता है. उनके चाय स्टॉल से चाय फ्रेंचाइजी बनने तक की कहानियां प्रेरणा बनती हैं लेकिन क्या किसी ऐसे चायवाले के बारे में सुना है जो हर साल अपने एक महीने की कमाई दान कर देता है. 

ओडिशा (Odisha) की राजधानी भुवनेश्वर के चाय वाले शिंबा शंकर जेना अपने जनवरी महीने की कमाई दान कर देते हैं. ऐसा वह पिछले 10 सालों से कर रहे हैं. इस दान के पीछे कोई पब्लिसिटी स्टंट या शान दिखाना नहीं है. बल्कि इस पहल में उनका वर्षों पुराना दर्द और संघर्ष छुपा है. शिंबा अपनी एक महीने की कमाई गरीब, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक में खर्च करते हैं. 

बचपन में पिता का निधन, स्टेशन के बाहर बेची चाय

शिंबा शंकर जेना 11 साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया था. इसके बाद उन्होंने घर के खर्च के साथ भाई-बहनों की पढ़ाई का जिम्मा खुद उठाया. स्टेशन के बाहर चाय का स्टॉल लगाने लगे. समय बीतने के साथ शिंबा खुदको मजबूत करते गए. कई बार भूखे भी रहना पड़ा. उन्होंने अपने संघर्षों से औरों के दर्द को भी समझा और चाय बेचते हुए उन्होंने दूसरों की मदद करने का भी फैसला लिया. यहीं से वह असली हीरो बन गए. शिंबा ने खुदको ब्रांड नहीं बनाया बल्कि खामोशी से कई घरों तक खुशी पहुंचाई. 

हर साल जनवरी की कमाई करते हैं दान 

शिंबा का कहना है कि उन्हें बचपन में मदद मिलती तो लाइफ इतनी मुश्किल न होती. जिस तरह उन्हें कॉपी किताबों और रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ा. वह किसी और को न करना पड़े. इसी सोच के साथ उन्होंने ठाना, ‘अगर मैं किसी और बच्चे की जिंदगी आसान कर सकता हूं, तो यह मेरा फर्ज है.’ 

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शिंबा ने कहा, अपनी सीमित कमाई से मैं जितना बचा पाता हूं, वह बहुत ज़्यादा नहीं है लेकिन मेरी छोटी-सी मदद भी किसी ज़िंदगी में बड़ा फर्क ला सकती है. चाय बेचते-बेचते मैं ऐसे लोगों को तलाशता रहता हूं. किसी गरीब बच्चे के लिए किताबें खरीदना हो, किसी दिव्यांग के लिए व्हीलचेयर, मंदिरों और अस्पतालों में मुफ्त खाना बांटना, या शहर में कूड़ेदान लगवाना हो. शिंबा कुछ न कुछ नेक काज करते रहते हैं. शिंबा अपनी एक महीने की कमाई हर साल दान कर देते हैं. 

परिवार का मिला पूरा साथ

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शिंबा की इस पहल में परिवार भी उनका पूरा साथ देता है. जबकि वह खुद बेहद सामान्य सी जिंदगी जीते हैं. शिंबा जैसे लोग मिसाल हैं जो मानते हैं कि भला काम करने के लिए पैसों से बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि दिल बड़ा होना चाहिए. एक तरफ वो लोग हैं जो रिश्वत, भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से धन जुटाकर अकूत संपत्ति जमा करते हैं. एक तरफ शिंबा जैसे लोग हैं जिन्होंने गरीबी से निकलकर दया सिखी न कि दिखावा. जिन्होंने अपने दर्द को दूसरों की मदद का आधार बना लिया. 

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