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क्या बिहार चुनाव से पहले RJD-कांग्रेस में होने जा रहा गठबंधन? 15 अप्रैल को होने वाली तेजस्वी-खड़गे की बैठक से सियासी हलचल तेज

बता दें कि राजद और कांग्रेस दोनों ही पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं. यह दोनों राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के रूप में एकजुट होकर लड़ रही हैं. बिहार में तेजस्वी यादव विपक्ष का एक बड़ा चेहरा हैं. यहां कांग्रेस सिर्फ एक सहयोगी की भूमिका में है. 15 अप्रैल को होने वाली बैठक में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि 2025 बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर चर्चा हो सकती है.

क्या बिहार चुनाव से पहले RJD-कांग्रेस में होने जा रहा गठबंधन? 15 अप्रैल को होने वाली तेजस्वी-खड़गे की बैठक से सियासी हलचल तेज
बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं. इस चुनावी मैदान में सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. इधर सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि राजद और कांग्रेस एक बार फिर से साथ होने जा रहे हैं.
यह खबर काफी चौंकाने वाली है क्योंकि कई महीनों से दोनों ही पार्टी एक दूसरे के ऊपर हमलावर हैं. हाल ही में कांग्रेस की एक पदयात्रा भी हुई थी. जिसका नाम था "पलायन रोको-नौकरी दो।" ऐसे में दोनों ही पार्टियों का एक बार फिर से चुनाव से पहले साथ होना सत्ता पक्ष के लिए करारा झटका है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 15 अप्रैल को  बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात हो सकती है. हालांकि, दोनों ही पार्टियों का गठबंधन कोई  चौंकाने वाला नहीं है. लेकिन हाल ही के कुछ महीनो में जो दिखा उसके मुताबिक थोड़ा अजीब सा लग रहा है. बीते कई महीनों से यह चर्चा काफी तेज थी कि दोनों ही पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेंगे. 
आखिर कैसा है कांग्रेस-राजद का गठबंधन इतिहास
कांग्रेस और राजद के बीच गठबंधन कोई नई बात नहीं है. दोनों ही पार्टियों के बीच कई दशकों से गठबंधन होता रहा और टूटता रहा है. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस,जेडीयू और राजद एक साथ आए थे. जिसमें तीनों ही पार्टियों को शानदार जीत मिली थी. बीजेपी को करारी शिकस्त मिली थी. फिर साल 2020 का विधानसभा चुनाव इन दोनों दलों ने साथ मिलकर लड़ा. लेकिन नीतीश कुमार की एनडीए को बहुमत मिला. इस चुनाव में महागठबंधन को करारी शिकस्त  मिली. इसमें महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चीजें काफी ज्यादा खराब हुईं. कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन की वजह से राजद के नेताओं में नाराजगी दिखाई दी. वहीं 2019 का लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस और राजद ने एक साथ महागठबंधन के तहत लड़ा. लेकिन यह पूरी तरीके से फ्लॉप रहा. 

कैसा है दोनों पार्टियों का जातीय और सामाजिक समीकरण 

राजद का मुख्य जनाधार यादव वोट बैंक है. लेकिन कांग्रेस तुलनात्मक रूप से कमजोर है. हालांकि, कांग्रेस मुख्य रूप से अल्पसंख्यक, दलित और कुछ ऊंची जातियों के बीच अपना जातीय समीकरण बनाए हुए हैं. दोनों पार्टियों का सामाजिक समीकरण चुनाव को काफी ज्यादा प्रभावित करता है. 

15 अप्रैल की बैठक में सीट शेयरिंग पर हो सकती है चर्चा

बता दें कि राजद और कांग्रेस दोनों ही पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं. यह दोनों राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के रूप में एकजुट होकर लड़ रही हैं. बिहार में तेजस्वी यादव विपक्ष का एक बड़ा चेहरा हैं. यहां कांग्रेस सिर्फ एक सहयोगी की भूमिका में है. 15 अप्रैल को होने वाली बैठक में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि 2025 बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर  चर्चा हो सकती है. इस दौरान दोनों ही पार्टियों के कई अन्य नेता भी मौजूद रहेंगे.

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