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'अपराधियों में डर, जनता के लिए भरोसा...', यूपी पुलिस मंथन में CM योगी ने दिए सख्त निर्देश, तय किया बेहतर पुलिसिंग का रोडमैप

शनिवार को ‘यूपी पुलिस मंथन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने ग्राम चौकीदारों को बीट पुलिस से जोड़कर स्थानीय सुरक्षा मजबूत करने और नागरिकों में भरोसा बढ़ाने पर जोर दिया.

'अपराधियों में डर, जनता के लिए भरोसा...', यूपी पुलिस मंथन में CM योगी ने दिए सख्त निर्देश, तय किया बेहतर पुलिसिंग का रोडमैप
Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को आयोजित ‘यूपी पुलिस मंथन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए कई अहम निर्देश दिए. कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली को और प्रभावी बनाना तथा बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप उसे आधुनिक स्वरूप देना रहा. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी पुलिस अपराधियों के लिए खौफ और आम जनता के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुकी है. उन्होंने बताया कि बीते साढ़े आठ वर्षों में पुलिस की छवि, संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली में व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिले हैं. साथ ही सीएम योगी ने यह भी कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ग्राम स्तर से लेकर साइबर और फॉरेंसिक व्यवस्था तक समन्वित और परिणामोन्मुखी रणनीति अपनाई जा रही है.

ग्राम स्तर पर सुरक्षा तंत्र को मजबूती

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात चौकीदारों को पुलिस की बीट व्यवस्था से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि ग्राम चौकीदार स्थानीय सामाजिक ढांचे से भली-भांति परिचित होते हैं और उनकी सक्रिय भागीदारी से अपराध की रोकथाम, समय पर सूचना और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। इससे ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

जनविश्वास बढ़ाने पर जोर

सीएम योगी ने कहा कि बीट पुलिस, दारोगा और आरक्षी गांव स्तर पर निरंतर संवाद और जनसंपर्क बनाए रखें. इससे नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और कानून-व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा. तब यह व्यवस्था भरोसेमंद मॉडल के रूप में स्थापित होगी.

CM योगी ने महिला सुरक्षा के लिए दिया 'मिशन शक्ति' का मंत्र 

महिला, बाल सुरक्षा और मानव तस्करी से जुड़े सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन शक्ति की सफलता पुलिस के साथ-साथ सभी विभागों के आपसी समन्वय का परिणाम है. उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को आंतरिक और बाह्य दोनों स्तरों पर सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई. सार्वजनिक स्थलों पर एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिला बीट पुलिस को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने महिला बीट पुलिस को स्थानीय स्तर पर नियमित संवादात्मक बैठकें करने और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों के व्यापक प्रचार पर जोर दिया. साथ ही महिला पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को और मजबूत करने की बात कही.

थाना प्रबंधन को बताया पुलिसिंग की रीढ़

थाना प्रबंधन और उन्नयन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना प्रभारी की तैनाती केवल मेरिट के आधार पर होनी चाहिए और राजनीतिक हस्तक्षेप न्यूनतम रखा जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरत के अनुसार हो, न कि स्टेटस सिंबल के रूप में. मुख्यमंत्री ने थानों में आधारभूत ढांचे के सुधार, आधुनिक सुविधाओं, पार्किंग, बैरक और पब्लिक-सर्विस स्पेस के विकास पर बल दिया. साथ ही पुलिस व्यवहार में सुधार को एक केंद्रीय मुद्दा बताते हुए नियमित काउंसलिंग और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए. सीएम योगी ने यह भी कहा कि संरचना सुधार के तहत लगभग 50,000 पुलिसकर्मियों को थानों में तैनात करने, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मॉडल के आधुनिक थाने, पार्किंग, बैरक, पब्लिक-सर्विस स्पेस जैसी सुविधाओं के साथ विकसित करने की आवश्यकता है. साथ ही पुलिस व्यवहार (Police Behaviour) सुधार एक केंद्रीय मुद्दा है. महाकुंभ, प्रवासी भारतीय दिवस जैसे बड़े आयोजनों में पुलिस के उत्कृष्ट व्यवहार को सराहा गया, जबकि नियमित व्यवस्था में शिकायतें बनी हुई हैं. इसलिए नियमित काउंसलिंग, बीट प्रणाली की प्रभावी मॉनिटरिंग, और इसे ACR से जोड़कर जवाबदेही तय करना अनिवार्य है.

साइबर अपराध पर कड़ा रुख

साइबर अपराध सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर ठगी की घटनाएं भी बढ़ी हैं. इससे निपटने के लिए बीसी सखी, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट और बीट पुलिस के सहयोग से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में साइबर हेल्प डेस्क की संख्या बढ़ाई गई है और हेल्पलाइन 1930 को और प्रभावी किया जा रहा है. भविष्य में साइबर मुख्यालय की स्थापना और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया.

पुलिस प्रशिक्षण और मानव संसाधन में ऐतिहासिक विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद पुलिस प्रशिक्षण क्षमता में दस गुना से अधिक वृद्धि हुई है. बेहतर प्रशिक्षण से पुलिस बल अधिक दक्ष, अनुशासित और जनसंवेदनशील बना है. उन्होंने पुलिस लाइनों को जन-जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए.

अभियोजन और कारागार सुधार पर फोकस

अभियोजन और कारागार सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित मानव संसाधन से ही न्यायिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध और प्रभावी बनाया जा सकता है. आकांक्षी जिलों के विकास की नियमित समीक्षा और कारागारों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर भी उन्होंने बल दिया. उन्होंने माफिया और संगठित अपराधियों पर कड़ी निगरानी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी और कारागार में आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए.

फॉरेंसिक और भारतीय न्याय संहिता से सख्त कार्रवाई

सीसीटीएनएस 2.0 और फॉरेंसिक सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच के प्रभावी उपयोग से अब अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव हो रही है. प्रत्येक जिले में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रशिक्षण बढ़ाने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को भविष्य की चुनौतियों के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और संवेदनशीलता तीनों स्तरों पर लगातार सशक्त किया जाएगा.

संगठित अपराध पर सख्त नियंत्रण

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कारागार में बंद कुख्यात माफिया और संगठित अपराधियों पर कड़ी निगरानी के निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि इन अपराधियों की न्यायालय में उपस्थिति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार का अवसर न मिले, इसके लिए प्रशिक्षित और सक्षम कार्मिकों की तैनाती अनिवार्य है.

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