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3 महीने में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सीएम धामी ने लिए बड़े एक्शन, दर्जनों अफसरों पर की धाकड़ कार्रवाई!

उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ धामी सरकार तेजी से एक्शन ले रही है इसी का नतीजा है कि 12 अधिकारियों पर गाज गिरी है. और इससे पहले भी बड़े बड़े अफसरों को भ्रष्टाचार के केस में निलंबित किया गया. कुछ को गिरफ़्तार कर जेल भी भेजा गया. पिछले 3 महीने में धामी सरकार के एक्शन ने विभागों में हड़कंप मचा दिया है

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05 Jun 2025
( Updated: 10 Dec 2025
10:09 PM )
3 महीने में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सीएम धामी ने लिए बड़े एक्शन, दर्जनों अफसरों पर की धाकड़ कार्रवाई!

यूपी से लेकर उत्तराखंड, असम से लेकर महाराष्ट्र तक, अवैध घुसपैठियों के साथ-साथ भ्रष्टाचारियों पर सख्ती से नकेल कसी जा रही है. आम हो या खास, जो भी सिस्टम में घुन लगाता पकड़ा जा रहा है, तुरंत उसे तोड़ते हुए सलाखों के पीछे डाला जा रहा है.

धामी सरकार ने उत्तराखंड के बड़े-बड़े अधिकारियों के पसीने छुड़ाकर सिस्टम में मानों हड़कंप ही मचा दिया है. हाल ही में डीएम समेत कई और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में गाज गिरी है. यह पहली बार नहीं है, बल्कि इससे पहले जिन अधिकारियों को धामी सरकार की तरफ से नापा गया है, उसको लेकर खुलासा करेंगे तो आप भी हैरान हो जाएंगे.

चलिए, एक-एक कर भ्रष्टाचार के जाल में फंसे अधिकारियों की लिस्ट दिखाते हैं और बताते हैं कैसे इन्होंने हिमाकत कर देवभूमि को घुन लगाया.

आईएएस रामविलास यादव – आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में निलंबित किया गया. उन पर अपनी आय से लगभग 550 गुना अधिक संपत्ति रखने का आरोप है. उनके खिलाफ आय का स्रोत स्पष्ट न होने पर जांच एजेंसियों ने जांच शुरू की है.

आईएफएस किशन चंद – वन विभाग से जुड़े इस वरिष्ठ अधिकारी पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे हैं. उनके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है.

हरमिंदर सिंह बवेजा (उद्यान निदेशक) – बागवानी विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के कारण निलंबित किए गए.

अमित जैन (वित्त नियंत्रक, आयुर्वेद विवि) – भ्रष्टाचार संबंधी आदेशों की अनदेखी और वित्तीय नियमों की अवहेलना पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.

भूपेंद्र कुमार (उपमहाप्रबंधक वित्त, परिवहन निगम) – रिश्वत लेने और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों में निलंबन. विजिलेंस में विस्तृत जांच चल रही है.

महिपाल सिंह (लेखपाल) – रिश्वत मांगने के मामले में रंगे हाथ पकड़े गए. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है.

रामदत्त मिश्र (उप निबंधक, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग) – स्टांप शुल्क व भूमि पंजीकरण में अनियमितताओं के कारण निलंबित.

तो ये वो बड़े अधिकारी हैं जिन्हें भ्रष्टाचार के केसों में या तो जेल भेजा गया है या फिर पद से ही निलंबित कर दिया गया है. खैर, सीएम धामी साफ़ संदेश दे चुके हैं कि देवभूमि में भ्रष्टाचार क़तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है. इसी का नतीजा है कि हाल ही में दो IAS और एक PCS अफसर समेत 12 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है. डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त पर भी गाज गिरी है.

दरअसल, इन लोगों पर जिस मामले में कार्रवाई हुई है, वह मामला 1.5 करोड़ की ज़मीन को 54 करोड़ में खरीदने का है. जिसमें हरिद्वार नगर निगम ने एक अनुपयुक्त और बेकार भूमि को अत्यधिक दाम में खरीदा. जिसके बाद जांच में खुलासा हुआ कि भूमि की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं थी और न ही ख़रीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई थी. सरकार के अफसरों ने ही शासन के नियमों को दरकिनार कर यह घोटाला किया और सरकार को अंधेरे में रखा.

लेकिन जैसे ही धामी सरकार को जांच के बाद रिपोर्ट मिली, वैसे ही 12 अधिकारियों को नाप दिया गया, जिससे शासन से लेकर प्रशासन तक में हड़कंप मच गया.

वैसे भी बीते कुछ दिनों से सीएम धामी खुद विभागों में पहुँच जाते हैं, मोर्चा संभालते नजर आते हैं. हाल ही में उन्हें खुद जनता से फोन पर जुड़ते हुए, उनकी समस्याओं को सुनते हुए देखा गया.

तो संदेश साफ है — देवभूमि में कोई हिमाकत दिखाएगा, तो किसी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा.

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