BJP की बढ़ती तैयारी से बढ़ी CM ममता की बेचैनी, CEC ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र, जानिए क्या है पूरा मामला
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने CEC ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी और बिना पर्याप्त तैयारी के लागू की गई है, जिससे लाखों मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
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पश्चिम बंगाल में आने वाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. आरोप-प्रत्यारोप और तीखे बयानों का दौर हर दिन नया मोड़ ले रहा है. इसी बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक अहम पत्र लिखा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.
CM ममता ने पत्र में क्या लिखा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि यह प्रक्रिया बड़े पैमाने पर मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे मौजूदा रूप में जारी रखा गया, तो भारतीय लोकतंत्र की नींव को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है. शनिवार 3 जनवरी 2026 को लिखे गए इस पत्र में ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को अनियोजित और जल्दबाजी में लागू किया गया कदम बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें न तो पर्याप्त तैयारी की गई और न ही जमीनी हकीकत को समझा गया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में इस प्रक्रिया के दौरान कई तरह की अनियमितताएं और प्रक्रियागत उल्लंघन सामने आ रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं.
मताधिकार से वंचित हो जाएंगे मतदाता
ममता बनर्जी के मुताबिक SIR के दौरान दोषपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही अधिकारियों को स्पष्ट और एक समान निर्देश नहीं दिए गए हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस अहम काम के लिए नियुक्त अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया. ऐसे में पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो लाखों मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.
बीजेपी की बंगाल में बड़ी तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पश्चिम बंगाल का चुनावी समीकरण पहले से अलग नजर आ रहा है. पिछले चुनावों में महज तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटों तक पहुंची बीजेपी लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है. कई मुद्दों पर बीजेपी आक्रामक रणनीति अपना रही है. इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद चुनावी कमान संभालते हुए विशेष रणनीति के तहत काम कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि यही वजह है कि ममता बनर्जी दबाव में दिख रही हैं और SIR को बड़ा मुद्दा बना रही हैं. मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर सुधार संभव नहीं है, तो इस मनमानी और अव्यवस्थित प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दिया जाना चाहिए. ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
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बताते चलें कि अपने पत्र में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चेताया कि उसकी देखरेख में की गई किसी भी अवैध, पक्षपातपूर्ण या मनमानी कार्रवाई के लिए आयोग को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या पश्चिम बंगाल की सियासत में यह मुद्दा चुनावी परिणामों को प्रभावित करेगा.
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