विवाद के बाद झारखंड प्रदेश आरजेडी अध्यक्ष बने संजय सिंह यादव

संजय सिंह यादव पलामू जिले के हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र से पिछले साल राजद के टिकट पर विधायक चुने गए थे. पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि अभय सिंह और सदाकत हुसैन अंसारी के नामांकन प्रपत्रों में पार्टी की राज्य परिषद के किसी भी सदस्य का प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर नहीं हैं. ऐसे में तकनीकी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया.

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16 Jun 2025
( Updated: 11 Dec 2025
04:04 AM )
विवाद के बाद झारखंड प्रदेश आरजेडी अध्यक्ष बने संजय सिंह यादव

संजय सिंह यादव को एक बार फिर झारखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष के पद पर निर्वाचित घोषित किया गया है. इस पद के लिए दावेदारी करने वाले दो अन्य उम्मीदवारों अभय सिंह और सदाकत हुसैन अंसारी के नामांकन पर्चे रविवार को स्क्रूटनी के दौरान अमान्य करार दिए जाने के बाद एकमात्र संजय सिंह यादव मैदान में रह गए थे.

झारखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष बने संजय सिंह यादव 

पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी गिरधारी यादव और सहायक निर्वाचन पदाधिकारी कलामुद्दीन खान के हस्ताक्षर से रविवार देर शाम जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में संजय सिंह यादव के निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा की गई है. यह निर्वाचन 2025-2028 सत्र के लिए हुआ है.

पलामू जिले के हुसैनाबाद विधानसभा से विधायक है संजय सिंह

संजय सिंह यादव पलामू जिले के हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र से पिछले साल राजद के टिकट पर विधायक चुने गए थे. पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि अभय सिंह और सदाकत हुसैन अंसारी के नामांकन प्रपत्रों में पार्टी की राज्य परिषद के किसी भी सदस्य का प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर नहीं हैं. ऐसे में तकनीकी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया.

दो दावेदारों का नामांकन रद्द

संजय सिंह यादव के नामांकन प्रपत्र में राज्य परिषद के 10 सदस्यों ने प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर किया है. रविवार दोपहर पर्चा रद्द करने की जानकारी मिलते ही अभय सिंह और उनके समर्थकों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया. उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया. सदाकत हुसैन अंसारी ने भी गलत तरीके से पर्चा रद्द करने का आरोप लगाया.

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उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व अभय सिंह लंबे समय तक प्रदेश राजद के अध्यक्ष रह चुके हैं. सदाकत हुसैन अंसारी भी पार्टी की प्रदेश इकाई में बड़े पदों पर रहे हैं. दोनों ने कहा कि चुनाव पदाधिकारी ने मनमानी की है. पार्टी की राज्य परिषद के लिए कोई चुनाव नहीं हुआ है. ऐसे में नामांकन पत्र में राज्य परिषद के किस सदस्य का प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर लिया जाता? उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत पार्टी के आलाकमान तक पहुंचाई जाएगी.

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