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'ये दोनों मानसिक दिवालिया...',जीतनराम मांझी का राहुल-तेजस्वी पर तीखा प्रहार, कहा- चुनाव के बाद इन्हें कोई याद भी नहीं करेगा

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने राहुल-तेजस्वी पर तीखा प्रहार किया और यात्रा को निरर्थक करार दिया. मांझी ने कहा कि दोनों नेता मानसिक रूप से दिवालिया हैं और 2025 के चुनाव के बाद उन्हें कोई याद नहीं रखेगा. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणियों की आलोचना की और प्रशांत किशोर की पार्टी को 'हवा-हवाई' बताया.

'ये दोनों मानसिक दिवालिया...',जीतनराम मांझी का राहुल-तेजस्वी पर तीखा प्रहार, कहा- चुनाव के बाद इन्हें कोई याद भी नहीं करेगा
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बिहार में बीते कई दिनों से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चल रही वोटर अधिकार यात्रा का आज राजधानी पटना में समापन हुआ. इस यात्रा के जरिए राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने एक तीर से कई निशाने साधने के प्रयास किए. एक तो सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ प्रचार और दूसरा चुनाव आयोग पर दबाव. इस दौरान नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी खूब देखने को मिला है. इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने राहुल-तेजस्वी पर तीखा प्रहार किया और यात्रा को निरर्थक करार दिया. 

दरअसल, जीतन राम मांझी ने चुनावी प्रचार के दौरान राहुल और तेजस्वी पर हमला बोलते हुए दोनों नेता मानसिक रूप से दिवालिया बताया. मांझी ने यह भी कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद इन दोनों नेताओं को कोई याद नहीं रखेगा. इसके साथ ही उन्होंने राहुल-तेजस्वी द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ कही गई टिप्पणियों की भी आलोचना की और प्रशांत किशोर की पार्टी को 'हवा-हवाई' करार दिया.

जीतनराम मांझी ने की कई घोषणाएएं

जीतनराम मांझी रविवार को टाउन हॉल में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की जनसमर्थन सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने मंच से साफ ऐलान किया कि अगर उनकी पार्टी के 20 से 30 सदस्य विधानसभा में पहुंच जाते हैं, तो वह गरीब और जरूरतमंदों की आवाज़ को और मजबूती से उठाएंगे. उन्होंने लोगों से अपील की कि चुनाव में लालच और शराब से प्रभावित न होकर अपने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए सोच-समझकर वोट दें. मांझी ने अपने भाषण में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी कीं. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के विधायक संख्या में बढ़त हासिल करते हैं, तो राज्य के 13 लाख भूमिहीन लोगों को घर और खेती के लिए सवा-सवा एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. इसके अलावा, उन्होंने प्रति पांच व्यक्ति पर एक ट्रैक्टर उपलब्ध कराने की भी योजना साझा की. उनके अनुसार यह कदम किसानों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए उठाया जाएगा. मांझी ने मतदाता पुनरीक्षण कार्य की सराहना भी की और कहा कि यह एक सही प्रक्रिया है.उन्होंने यह भी कहा कि हार के डर से महागठबंधन के नेता जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका यह बयान चुनावी रणनीति और प्रचार की कड़ी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

मंच पर मौजूद महत्वपूर्ण चेहरे

कार्यक्रम के दौरान मंच पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के साथ सिकंदरा के विधायक प्रफुल्ल मांझी, हम सेक्युलर के राष्ट्रीय सचिव निलेश सिंह, महादलित आयोग के सदस्य मुकेश मांझी, प्रदेश पार्टी के प्रधान महासचिव एवं भागलपुर प्रभारी अविनाश सिंह और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हाशमी मौजूद थे. इसके अलावा कार्यक्रम के आयोजन में हम के जिलाध्यक्ष अशोक रजक और महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष डॉ. श्रावणी सिन्हा ने भी अपनी भूमिका निभाई. मंच पर इन सभी नेताओं की मौजूदगी ने सभा को और प्रभावशाली बनाया और जनता में उत्साह का माहौल तैयार किया.

राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वोटर अधिकार यात्रा और इसके समापन के साथ राज्य में चुनावी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा ने युवाओं और आम जनता में मतदान के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा की है. वहीं जीतनराम मांझी का आक्रामक रुख और घोषणाएँ यह संकेत देती हैं कि चुनावी रणनीतियों में अब हर छोटी-बड़ी चीज़ मायने रखने लगी है. विश्लेषकों के अनुसार, मांझी द्वारा गरीबों और भूमिहीनों के लिए की गई घोषणाएँ उनके समर्थकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश हैं. साथ ही, यह भी साफ है कि राज्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ बड़े नेताओं के बीच नहीं रह गई, बल्कि नए युवा और मध्यम वर्ग के नेता भी अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं.

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बता दें कि पटना में वोटर अधिकार यात्रा का समापन एक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है. जहां एक ओर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जनता को मतदान के महत्व से अवगत कराने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर जीतनराम मांझी ने मंच से साफ संकेत दिए कि उनके लिए जनता की समस्याएं और विकास के मुद्दे सर्वोपरि हैं। यह दर्शाता है कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव केवल नेताओं की प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं होगा, बल्कि यह आम जनता और युवा मतदाताओं की भागीदारी और उनके भविष्य के निर्णय का भी खेल होगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावों में मतदान के महत्व को जनता तक पहुँचाना और सही जानकारी के साथ वोट करना ही असली बदलाव की कुंजी है. पटना में हुई यह सभा और यात्रा यही संदेश जनता तक पहुँचाने में सफल रही है और आने वाले दिनों में इसके असर राज्य की राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखने लगेंगे.

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