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महाराष्ट्र चुनाव में गरमाई राजनीति, शाइना एनसी ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टिकरण का आरोप

महाराष्ट्र में विधासभा चुनाव से पहले 7 नवंबर को उलेमा बोर्ड ने महाविकास अघाड़ी को समर्थन देने के लिए मुस्लिमों को 10 फीसदी आरक्षण, आरएसएस पर बैन जैसी 17 शर्तें रखी हैं। इस पर शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कांग्रेस पार्टी को घेरा है।

महाराष्ट्र चुनाव में गरमाई राजनीति, शाइना एनसी ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टिकरण का आरोप
 महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले तुष्टिकरण की राजनीति का मुद्दा एक बार फिर गरमाया हुआ है। हाल ही में शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है। शाइना का यह बयान तब आया जब महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी को समर्थन देने के लिए उलेमा बोर्ड ने कुछ विशेष शर्तें रखीं, जिनमें मुस्लिमों को 10 प्रतिशत आरक्षण और आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग प्रमुख थी।

शाइना एनसी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी, वोट बैंक की राजनीति के चलते, कुछ समुदायों को लगातार तुष्ट करती आ रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा तुष्टिकरण की नीति अपनाती रही है, जिसमें किसी खास वर्ग या समूह का समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें सुविधाएं और आश्वासन दिए जाते हैं। शाइना एनसी के अनुसार, पिछले छह दशकों में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम और दलित समुदाय को तुष्टिकरण की राजनीति से दबाने का प्रयास किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के "सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास" के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नारा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश देता है, जबकि कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य वोट बैंक की राजनीति करना रह गया है। शाइना ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस आज सिर्फ लॉलीपॉप देने की राजनीति कर रही है।"
महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी और उलेमा बोर्ड की शर्तें
7 नवंबर को उलेमा बोर्ड ने महाविकास अघाड़ी को समर्थन देने के लिए 17 शर्तें रखीं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण और आरएसएस पर प्रतिबंध जैसी मांगें शामिल हैं। महाराष्ट्र में यह मुद्दा चुनावी माहौल को गर्म कर रहा है, और राजनीतिक पार्टियों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इस पर सवाल उठाते हुए शाइना एनसी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उलेमाओं को वोट बैंक के रूप में देख रही है और लगातार उनके लिए आश्वासन दे रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस पर यूबीटी (शिवसेना का उद्भव बाला ठाकरे गुट) का क्या रुख है, क्या वे भी तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा बनेंगे?
कांग्रेस की राजनीति पर शाइना का प्रहार
शाइना एनसी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य में आम जनता की समस्याओं को कभी प्राथमिकता नहीं दी। उनका मानना है कि जब तक जनता स्वयं बदलाव की मांग नहीं करेगी, तब तक किसी भी पार्टी की रैली या प्रचार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। "मुंबई के मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र के लोग पिछले 15 सालों से बुरी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं और अब वे बदलाव चाहते हैं।"
कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति पर भी सवाल
शाइना एनसी ने कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस की हालत अब निराशाजनक हो गई है। मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए बयानों को उन्होंने कांग्रेस की नैतिक स्थिति के पतन का प्रतीक बताया। "कांग्रेस ने 15 साल में कुछ खास काम नहीं किया और लोग अब इस पार्टी से परेशान हो चुके हैं," शाइना ने कहा।
महाराष्ट्र में बीजेपी की ताकतवर स्थिति
शाइना एनसी के मुताबिक, महाराष्ट्र में जनता ने महायुति और उनकी पार्टी का समर्थन किया है। उन्होंने दावा किया कि मुंबादेवी क्षेत्र के लोग महायुति को ही समर्थन देंगे, क्योंकि जनता पिछले कई वर्षों से चली आ रही समस्याओं से तंग आ चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले चुनावों में महायुति की जीत निश्चित है, क्योंकि जनता अब कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति से ऊब चुकी है।

चुनावों में तुष्टिकरण का मुद्दा और कांग्रेस की चुनौतियां
महाराष्ट्र में चुनावी माहौल में तुष्टिकरण का मुद्दा तेजी से उठ रहा है। कांग्रेस पार्टी को इस मुद्दे पर भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने अपने बयानों से कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। इस समय यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर किस तरह से अपने कदम बढ़ाती है और क्या वह इस चुनौती का सामना कर पाएगी।

राजनीति में तुष्टिकरण का मुद्दा हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है, खासकर चुनावी समय में। कांग्रेस पर लगे इन आरोपों ने महाराष्ट्र चुनाव में एक नई बहस को जन्म दिया है। शाइना एनसी के बयानों ने इस चुनावी जंग में आग में घी का काम किया है। अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र के मतदाता किसके पक्ष में अपना मत देते हैं और क्या इस मुद्दे का कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।
Source- IANS

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