बिहार चुनाव में क्यों होता है नाव और घोड़ों का इस्तेमाल? CEC ज्ञानेश कुमार ने बताए दिलचस्प फैक्ट

बिहार चुनाव की रणभेरी बज गई है. चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है. बिहार में 6 नवंबर और 11 नवंबर को वोटिंग होगी.

बिहार चुनाव में क्यों होता है नाव और घोड़ों का इस्तेमाल? CEC ज्ञानेश कुमार ने बताए दिलचस्प फैक्ट

बिहार में सभी 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे. 6 नवंबर और 11 नवंबर को वोटिंग होगी. जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे. मतदान का ऐलान करते समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेजेंटेशन के जरिए बिहार चुनाव की प्रक्रिया के हर पहलू को बारीकी से समझाया. 

ज्ञानेश कुमार ने बिहार चुनाव के कुछ दिलचस्प पहलुओं के बारे में बताया. इनमें नावों और घोड़ों का इस्तेमाल भी शामिल है. CEC ने कहा कि, बिहार में कुछ दिलचस्प चीजें भी हैं. जैसे दियारा इलाके में जो 250 पोलिंग स्टेशन हैं. वहां घोड़े से पेट्रोलिंग होती है. वहीं, लगभग 197 पोलिंग स्टेशनों पर पोलिंग पार्टियां नाव से जाती हैं. 

बिहार चुनाव में क्यों होता है नाव और घोड़ों का इस्तेमाल? 

दरअसल, बिहार का एक बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ का शिकार होता है. यहां बाढ़ के पानी से सैकड़ों गांवों का संपर्क टूट जाता है. ऐसे में लोगों तक पहुंचने में नाव बड़ा सहारा बनती हैं. पोलिंग पार्टियां भी नाव का ही इस्तेमाल करती हैं. 

वहीं, बिहार के कुछ इलाके नक्सल प्रभावित और सुदूर हैं. ऐसे में पुलिस और पोलिंग पार्टियां यहां पेट्रोलिंग के लिए घोड़ों का इस्तेमाल करती हैं. चुनाव आयोग ने प्रेजेंटेशन के जरिए नावों और घोड़ों से होने वाली पेट्रोलिंग की तस्वीरें भी दिखाईं. 

बिहार में कितने मतदान केंद्र हैं? 

चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में कुल 90,712 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इनमें  76,801 केंद्र ग्रामीण इलाकों में और 13,911 केंद्र शहरी इलाकों में हैं. हर मतदान केंद्र पर औसतन 818 मतदाता रजिस्टर्ड हैं. वहीं, चुनाव के ऐलान के साथ ही बिहार में आचार संहिता लागू हो गई है. काउंटिंग से लेकर 40 दिन चलेगी. तमाम राजनीतिक दलों की मांग थी कि, चुनाव छठ के बाद करवाएं जाएं इसलिए पहले फेज का मतदान छठ के 8 दिन बाद होगा. 

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