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आतंकियों संग बिरयानी खाकर उन्हें छलनी किया… कौन थे मेजर मोहित शर्मा? जो कहलाए देश के असली ‘धुरंधर’

मेजर मोहित शर्मा, वो नाम जिसने आखिरी सांस भी जीत के साथ ली और कहलाया असली धुरंधर. वो नाम जिसने 6 गोलियां लगने के बाद भी 4 आतंकियों को ढेर किया.

आतंकियों संग बिरयानी खाकर उन्हें छलनी किया… कौन थे मेजर मोहित शर्मा? जो कहलाए देश के असली ‘धुरंधर’

Major Mohit Sharma: हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ सुर्खियों में है. इस मूवी की कहानी भारतीय जासूस के इर्द गिर्द घूमती है. जो पाकिस्तान में रहकर वहां की खुफिया जानकारी मुहैया करवाने के साथ ही देश के दुश्मनों का सफाया करता है. धुरंधर में रणवीर सिंह के किरदार को लेकर दावा किया जाता है कि यह मेजर मोहित शर्मा पर आधारित है. मेजर मोहित शर्मा, वो नाम जिसने आखिरी सांस भी जीत के साथ ली और कहलाया असली धुरंधर. जानते हैं उनकी पूरी कहानी. 

कहते हैं हीरो पैदा नहीं होते हालात उन्हें गढ़ते हैं, लेकिन वो तो लोहे का जिगरा लेकर पैदा हुआ था. जिसने साबित किया कि सैनिक मरते नहीं. मोहित शर्मा का जन्म हरियाणा के रोहतक में 13 जनवरी 1978 को हुआ था, लेकिन उनका बचपन UP के गाजियाबाद में बीता. 

इंजीनियरिंग कॉलेज से कैसे NDA तक 

मोहित शर्मा ने गाजियाबाद के DPS से 12वीं तक पढ़ाई की. इसके बाद शेगांव की इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन ले लिया लेकिन उनका झुकाव सेना की ओर था. साल 1995 में भोपाल के SSB इंटरव्यू क्रैक कर वे NDA पहुंचे और 1998 में देहरादून IMA (Indian Military Academy) जॉइन की. 

11 दिसंबर 1999 को इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) देहरादून से पासआउट होकर उन्हें 5 मद्रास रेजिमेंट में कमीशन मिला

  • दिसंबर 2002 में उन्हें पैरा (स्पेशल फोर्सेज) चुना गया और जून 2003 में प्रशिक्षित पैरा कमांडो बने
  • 11 दिसंबर 2005 को मोहित शर्मा मेजर पदोन्नत हुए 
  • मोहित शर्मा ने कश्मीर में तैनाती के दौरान कई सीक्रेट मिशन में हिस्सा लिया

जनवरी साल 2005 से दिसंबर 2006 तक मोहित शर्मा बेलगाम के कमांडो विंग में प्रशिक्षक रहे. जहां उन्होंने रणनीतिक चालाकी दुश्मनों के इरादों को मात दी. 

दुश्मन के घर में घुसे, आतंकियों के साथ खाई बिरयानी 

मेजर मोहित शर्मा ने न केवल आतंकियों को मार गिराया बल्कि आतंकवाद की जड़ें तक हिला दीं. साल 2004 में उन्होंने एक ऑपरेशन में हिज्बुल मुजाहिदीन के दो कुख्यात आतंकी LoC पार करके भारत में घुसने की फिराक में थे, लेकिन मेजर मोहित ने उन्हें वहीं ढेर कर दिया. इसके लिए उन्होंने खुद को बिल्कुल आतंकियों जैसा हुलिया बनाया. यहां तक कि अपना नाम भी बदल लिया. मेजर मोहित शर्मा बन गए थे ‘इफ्तिखार भट’. 

गेटअप लेने के बाद मोहित शर्मा आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के अड्डे में दाखिल हुए. हुलिया बिल्कुल वैसा ही, लंबी दाढ़ी, कश्मीरी लहजा और एक काल्पनिक कहानी. ‘इफ्तिखार भट’ बने मोहित शर्मा ने अपने कथित भाई के मारे जाने की कहानी आतंकियों को सुनाई और कहा कि उन्हें इसका बदला लेना है. एक अंडरकवपर एजेंट मोहित शर्मा को आतंकी अपना साथी मानने लगे. मोहित शर्मा भी आतंकियों के साथ बैठकर बिरयानी खाने लगे. 

आतंकियों से निकाली खुफिया जानकारी 

मोहित शर्मा ने हिजबुल मुजाहिदीन की हर एक गतिविधि की जानकारी जुटाई. उसने सोचने का तरीका, प्लानिंग, हथियारों का ठिकाना, कनेक्शन और मिशन के बारे में पता लगाया. LoC के अंदर उन्होंने आतंकियों से बेहद खुफिया इनपुट हासिल किए. मोहित शर्मा का अंडरकवर मिशन लगभग-लगभग पूरा हो चुका था, तभी आतंकियों को उनकी पहचान पर शक होने लगा. हालांकि इस दौरान उन्होंने होश नहीं खोए. हौसले बुंलद थे और जज्बा हर हालाक को पलटने का था. मोहित शर्मा ने धैर्य और चालाकी के साथ दो खतरनाक आतंकियों (अबू तोरारा और अबू सब्जार) को मार गिराया. इस तरह उन्होंने अपने मिशन को पूरा किया. 

जख्मी होकर भी चार आतंकियों को मारा 

21 मार्च साल 2009 का दिन, कुपवाड़ा के हाफरूदा जंगलों में शुरू हुई वो जंग, जिसने भारतीय सेना के इस जांबाज सैनिक को अमर कर दिया. मोहित शर्मा ब्रावो असॉल्ट टीम का नेतृत्व कर रहे थे. इस दौरान आतंकियों से उनकी मुठभेड़ हो गई. आतंकी अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे. जिसमें चार जवान घायल हो गए थे. मेजर मोहित ने गोलियों की बारिश के बीच अपने घायल साथियों को कवर करने की कोशिश की. इसके साथ-साथ आतंकियों पर प्रहार भी जारी था. उन्होंने दो आतंकियों पर ग्रेनेड फेंककर मार गिराया. इस दौरान आतंकियों की गोली उनके सीने जा लगी, लेकिन मोहित शर्मा तो मानों फौलादी जिगरा लेकर पैदा हुए थे. गोली लगने के बाद भी वह आतंकियों से लोहा लेते रहे और दो और आतंकियों को मार गिराया, लेकिन तब तक उन्हें भी 6 गोलियां लग चुकीं थी, मात्र 31 साल की उम्र में इस जांबाज सैनिक ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. मेजर मोहित समेत पांच जवान शहीद हो गए थे. निडरता, शौर्यता और देश के लिए सच्ची निष्ठा के लिए मेजर मोहित को मरणोपंरात अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. 

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मेजर मोहित बहादुर सैनिक होने के साथ-साथ बेहतरीन कलाकार भी थे. वे गिटार, माउथ ऑर्गन और सिंथेसाइजर जैसे वाद्य यंत्रों को बजाने में माहिर थे. उन्होंने कई बार लाइव परफोर्मेंस भी दी थी. इसके साथ-साथ NDA के बेस्ट कैडेट्स भी रहे. मेजर मोहित शर्मा का परिवार भी सेना में सेवाएं दे रहा है. उनकी पत्नी मेजर रिशमा शर्मा (अब लेफ्टिनेंट कर्नल रिशमा सारिन) भी भारतीय सेना में हैं और उनके दो बच्चे हैं. साल 2019 में मोहित शर्मा के सम्मान में गाजियाबाद के राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन का नाम ‘मेजर मोहित शर्मा राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन’ किया गया. जब धुरंधर फिल्म का ट्रेलर आया तो मोहित शर्मा के परिवार ने दावा किया कि यह फिल्म उन पर बनी है. हालांकि डायरेक्टर आदित्य धर की टीम ने साफ किया कि यह फिल्म मोहित शर्मा की बायोपिक नहीं है, लेकिन असल जिंदगी में मोहित शर्मा देश के धुरंधर कहलाए. 

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