Being Ghumakkad की ओंकारेश्वर यात्रा आरंभ हुई मध्यप्रदेश के शहर उज्जैन से। महाकाल की नगरी से ओंकारेश्वर की दूरी करीब 140 किलोमीटर है। इस सफर में हरे-भरे खेत खलिहान मिले, पहाड़ी रास्ते मिले, जंगल, नदियां भी मिले और वो लोग भी मिले जो आस्था के नाम पर नदियों को गंदा करने से बाज़ नहीं आते। ऐसे नज़ारों से रूबरू होते हुए Being Ghumakkad की यात्रा पहुंच गई ओंकारेश्वर। मंदिर से करीब 700 मीटर पहले पार्किंग की व्यवस्था है। यहां कुछ दुकाने हैं, जिनमें पत्थरों को तराशकर शिवलिंग बनाए गए हैं। यहीं पर हमने ठंड के मौसम में चाय की चुस्कियों का आनंद लिया। इस स्थान से करीब 100 मीटर आगे ओमकारेश्वर का प्रवेश द्वार है, जहां से पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
-
Being Ghumakkad27 May, 202401:17 PMओंकारेश्वर महादेव मंदिर में रोज़ रात में आते हैं शिव !
-
Being Ghumakkad26 May, 202412:23 PMBeing Ghumakkad को मिले ईश्वरा महादेव में अदृश्य शक्ति के सबूत | कैसी थी ये खतरनाक यात्रा?
दूर-दूर तक फैली पहाड़गढ़ की पहाड़ियां साफ-साफ नज़र आ रही थीं। लेकिन यहां तक पहुंचने से पहले हम अंजान थे कि ईश्वरा महादेव जाने में कितने कठिन रास्तों से होकर गुज़रना होगा। इसका पहला ट्रेलर कुछ ही दूरी पर मिल गया, जब एक नदी को पार कर दूसरी तरफ़ जाना था। हम खुशकिस्मत थे जो इन दिनों पानी की रफ्तार उतनी ज्यादा नहीं थी।
-
न्यूज24 May, 202401:05 PMसनातन की आवाज बुलंद करने Kashi पहुंचे Swami Abhishek Brahmachari, हर तरफ गूंजने लगा हर हर महादेव
वाराणसी पहुंचे वरिष्ठ संत स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, सनातन धर्म का ध्वज लेकर यात्रा कर रहे स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी
-
Being Ghumakkad08 May, 202405:00 PMUttarakhand में महादेव का रहस्यमयी अवतार ‘महासू’, चावल के दाने से पल में कर देते हैं चमत्कार
महासू देवता एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है और स्थानीय भाषा में महासू शब्द 'महाशिव' का पर्याय है | चारों महासू भाइयों के नाम बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू और चालदा महासू है, जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं |
-
Being Ghumakkad07 May, 202401:16 PMUttarakhand का वो रहस्यमयी स्थान, जहां ‘कालकूट’ ज़हर पीकर महादेव Neelkanth बने
ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव जाने के दो रास्ते हैं एक पुराना पैदल रास्ता है, जो स्वर्गआश्रम से होते हुए जाता है। 7 किलोमीटर का ये रास्ता जंगल से trekking करते हुए मंदिर तक जाता है। जहां लंगूरों को संतो द्वारा भोजन देने के दृश्य दिख जाना आम बात है। दूसरा रास्ता वाया रोड है, ये मंदिर के बेहद नज़दीक तक आपको ले जाता है। लेकिन रोड नेटवर्क से ये दूरी करीब 30 किलोमीटर है। पहाड़ियां घुमावदार हैं, इसलिए वाया रोड भी नीलकंठ महादेव पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग जाता है। मंदिर से काफी पहले ही श्रद्धालुओं को पार्किंग करनी पड़ती है |
-
Advertisement
-
Being Ghumakkad07 May, 202412:45 PMअद्भुत करिश्मा, Rajasthan में मिला दूसरा अमरनाथ, गुफा में रोज़ आते हैं महादेव। Parashuram Mahadev
आज ऐसे ही शिव के अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय स्थान की खोज में Being Ghumakkad की टीम बढ़ रही है, पहाड़ की कंदराओं में बसे परशुराम महादेव की ओर। यहां के नज़ारे, पहाड़, जंगल, हरियाली और झील देखकर हैरान मत हो जाना। ये हिमालय रेंज नहीं है, ये प्रकृति की गोद में बसे राजस्थान का सबसे दुर्लभ हिस्सा है, जिसकी चर्चा नहीं होती। ये राजस्थान का अप्रतिम सुंदरता से भरपूर स्थान है।
-
Being Ghumakkad26 Apr, 202405:07 AMUttarakhand में महादेव का रहस्यलोक ‘लाखामंडल’, जहां मरे इंसान ज़िंदा हो जाते थे!
देहरादून के विकास नगर से चकराता होते हुए हमारी टीम लाखामंडल के रास्ते पर चल पड़ी। सड़क के साथ बहती यमुना नदी इस यात्रा को सुखद और यादगार अनुभव में तब्दील कर देती है। करीब साढ़े तीन घंटे में Being Ghumakkad की टीम देहरादून से लाखामंडल पहुंच सकी।