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टीएमसी विधायक की मस्जिद घोषणा पर बवाल, सुवेंदु अधिकारी बोले-6 दिसंबर की तारीख चुनना उकसावे की कोशिश

सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में मीडिया से बातचीत में कहा, "मंदिर-मस्जिद बनाने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन 'बाबरी मस्जिद' नामकरण और 6 दिसंबर के दिन ही नींव रखना, ये भड़काने की कोशिश है. इसके जरिए शांति-अमन को खत्म करने के प्रयास हो रहे हैं.

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27 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
05:06 AM )
टीएमसी विधायक की मस्जिद घोषणा पर बवाल, सुवेंदु अधिकारी बोले-6 दिसंबर की तारीख चुनना उकसावे की कोशिश

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 'बाबरी मस्जिद' की घोषणा के बाद राजनीतिक विवाद जारी है. इसी क्रम में गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा लीडर सुवेंदु अधिकारी ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि राज्य में लोगों को भड़काने की कोशिश की जा रही है.

"बंगाल में लोगों को भड़काने की कोशिश"

सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में मीडिया से बातचीत में कहा, "मंदिर-मस्जिद बनाने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन 'बाबरी मस्जिद' नामकरण और 6 दिसंबर के दिन ही नींव रखना, ये भड़काने की कोशिश है. इसके जरिए शांति-अमन को खत्म करने के प्रयास हो रहे हैं." 

 हुमायूं कबीर बांग्लादेश क्यों गए?

उन्होंने कहा कि सरकार और एजेंसियों को कार्रवाई करनी चाहिए. सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर कुछ दिन पहले बांग्लादेश गए थे. उन्होंने मांग उठाई कि खुफिया एजेंसियों को यह जांच करनी चाहिए कि हुमायूं कबीर बांग्लादेश क्यों गए और किसके साथ बैठकें की?

राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा, साधु-संत भी 'बाबरी' नाम से मस्जिद का विरोध कर रहे हैं. निर्गुणानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि हमें मस्जिद बनाने से परेशानी नहीं है, लेकिन इसका नाम बदलना चाहिए."

टीएमसी विधायक ने की थी मस्जिद बनाने की घोषणा

टीएमसी विधायक की घोषणा पर उन्होंने कहा, "यह पार्टी की घोषणा नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत रूप से मस्जिद बनाने की घोषणा की गई है. भारत में मस्जिद, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थल बनाने की आजादी है. आपत्ति इस बात पर है कि जिस बाबर ने हिंदुओं को लूटा और उनके कत्ल किए, उसका नाम नहीं होना चाहिए."

राजनीति  कारण हुए बंगाल में हिंसा

पद्मश्री कार्तिक महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मुर्शिदाबाद में शासक नवाब सिराजुद्दौला थे. हमारे पूर्वज भी वहीं रहते थे. मुर्शिदाबाद में पहले कोई ऐसी परिस्थिति नहीं थी. इसने महान कलाकार और बहुत पढ़े-लिखे लोग दिए हैं. मैं पिछले 50 सालों से मुर्शिदाबाद में रह रहा हूं और मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई."

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उन्होंने कहा कि राजनीतिक वजहों से दिक्कतें आ रही हैं. धुलियान, मालदा और कोलकाता के पास जो घटनाएं हुईं, वे राजनीति से प्रेरित हैं. आम लोग इन चर्चाओं में शामिल नहीं होते, वे बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं.

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