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श्रीमाता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द, 50 सीटें, 42 मुस्लिम छात्रों का एडमिशन, हिंदू संगठनों में जश्न!

श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के 45 दिनों के आंदोलन के बाद श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी गई. इसके बाद संघर्ष समिति ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई. समिति का कहना है कि माता वैष्णो देवी का चढ़ावा परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार ही होना चाहिए और श्राइन बोर्ड को हिंदू हितों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए.

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08 Jan 2026
( Updated: 08 Jan 2026
07:49 AM )
श्रीमाता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द, 50 सीटें, 42 मुस्लिम छात्रों का एडमिशन, हिंदू संगठनों में जश्न!
Shri Vaishno Devi Medical College Recognition Cancelled

जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता बीते दिन रद्द कर दी गई. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कॉलेज में पाई गई कई गंभीर तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी. आयोग की ओर से यह कार्रवाई न्यूनतम मानकों के उल्लंघन, भारी फैकल्टी की कमी और मरीजों की संख्या कम होने के चलते की गई है, हालांकि वजहें और भी हैं.

एनएमसी की यह सख्त कार्रवाई मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में नियमों के पालन का कड़ा संदेश भी देती है. हालांकि, मानकों के उल्लंघन के अलावा हिंदू संगठनों के लगातार प्रदर्शन और दबाव को भी इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. पूरा विवाद मुस्लिम छात्रों के एडमिशन, श्राइन बोर्ड के कामकाज और श्री माता वैष्णो देवी के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ था. हिंदू संगठनों का आरोप था कि माता वैष्णो देवी के चढ़ावे से कॉलेज का संचालन हो रहा है, जबकि इसका लाभ और दाखिले समाज विशेष तक सीमित किए जा रहे हैं.

मुस्लिम छात्रों के एडमिशन को लेकर हुआ था विवाद

माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने वाले मेडिकल छात्रों के पहले बैच को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था. कॉलेज को कुल 50 एमबीबीएस सीटें आवंटित की गई थीं, लेकिन इनमें से सिर्फ आठ हिंदू छात्रों ने ही एडमिशन लिया. अधिकारियों के अनुसार, NEET क्वालिफाई करने के बावजूद किसी भी अन्य हिंदू उम्मीदवार ने इस कॉलेज को चुनना उचित नहीं समझा.

इसके बाद 2025-26 एकेडमिक ईयर के लिए नए बने इस संस्थान ने काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी की और शेष 42 सीटों पर मुस्लिम छात्रों को एडमिशन दे दिया. इन दाखिलों के बाद जम्मू में भारी हंगामा मच गया. कई हिंदू संगठनों ने आंदोलन की धमकी दी और कॉलेज की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई. ‘संघर्ष समिति’ ने इस फैसले का स्वागत किया. उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति हाल ही में गठित हुआ एक संगठन है, जो पिछले साल नवंबर से जम्मू में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा था.

संघर्ष समिति कॉलेज में हुए एडमिशन रद्द करने की मांग कर रही थी. इसके साथ ही समिति ने खास तौर पर माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए सीटों में आरक्षण की मांग भी उठाई. संघर्ष समिति का गठन 50 एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच के लिए NEET मेरिट लिस्ट के जरिए एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद किया गया था.

50 में से 42 छात्रों को एडमिशन, भड़के हिंदू संगठन

पहले बैच में शामिल 50 छात्रों में से 42 मुस्लिम छात्र हैं, जिनमें ज्यादातर कश्मीर से हैं. इसके अलावा जम्मू से सात हिंदू छात्र और एक सिख छात्र भी शामिल है. एडमिशन रद्द करने की मांग के साथ-साथ संघर्ष समिति हिंदू छात्रों के लिए सीटों में आरक्षण की भी मांग कर रही है.

संघर्ष समिति ने बांटी मिठाइयां

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के फैसले के बाद संघर्ष समिति ने ढोल बजाकर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया. समिति ने कहा, “हम अपना 45 दिन का सफल आंदोलन समाप्त कर रहे हैं. हालांकि, हम श्राइन बोर्ड की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे. श्राइन बोर्ड को सरकारी मामलों में दखल देने के बजाय केवल हिंदुओं के कल्याण के लिए काम करना चाहिए.”

समिति ने यह भी दोहराया कि श्री माता वैष्णो देवी का चढ़ावा परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार ही होना चाहिए और भविष्य में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए, जो हिंदू समाज के हितों के खिलाफ हो.

आंदोलन की सफलता, हिंदू समाज में जश्न

आंदोलन की सफलता के बाद सभी के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी. संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे और एकजुटता का संदेश दिया. इस अवसर पर गीता भवन में विशेष पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद संघर्ष समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें आंदोलन की रणनीति और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई.

मान्यता रद्द, लेकिन छात्रों का भविष्य सुरक्षित

एनएमसी ने छात्रों को राहत देने का प्रावधान भी किया है. शैक्षणिक सत्र 2025–26 में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा. आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र की एमबीबीएस सीट नहीं जाएगी. केंद्र शासित प्रदेश की सक्षम काउंसलिंग अथॉरिटी इस स्थानांतरण की जिम्मेदारी संभालेगी, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे और उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए.

बीते दिनों मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने कहा कि हमने 5 नवंबर 2025 को मेडिकल कॉलेज के खिलाफ पहला विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद से संगठन लगातार सड़कों पर है. 

हिंदू संगठन ने कहा कि संगठन की मुख्य मांग है कि या तो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड इस मेडिकल कॉलेज को बंद करे और वहां गुरुकुल की स्थापना करे, या फिर मेडिकल कॉलेज में 100 प्रतिशत हिंदू छात्रों को ही प्रवेश दिया जाए. 

'हिंदुओं के चढ़ावे से हो हिंदू समाज का कल्याण!'

उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर से श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं और चढ़ावे के रूप में दिया गया धन हिंदू धर्म के उत्थान, गुरुकुलों, गौशालाओं और यात्रियों की सुविधाओं पर खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन श्राइन बोर्ड इस धन का उपयोग एक विशेष समुदाय के लोगों को डॉक्टर बनाने में कर रहा है, जिसे हिंदू समाज स्वीकार नहीं करेगा.

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के फंड से बना था कॉलेज!

हिंदू संगठनों की दलील है कि यह मेडिकल कॉलेज माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के फंड से बनाया गया है, इसलिए इसमें हिंदू छात्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पहली सूची में केवल सात हिंदू और एक सिख छात्र को जगह मिली, जबकि बाकी सभी मुस्लिम हैं, जो “अस्वीकार्य” है.

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राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने कहा कि मंदिर में चढ़ाई गई धनराशि से बने संस्थान का लाभ हिंदू समुदाय को मिलना चाहिए और दाखिला नियमों की फिर से समीक्षा की जानी चाहिए.

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