Advertisement

एनएमसी के फैसले से जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल, वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द

मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में सबसे गंभीर मुद्दा एक पूरी तरह से कार्यरत मेडिकल कॉलेज को बंद किए जाने को बताया. उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र सालों तक मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए संघर्ष करते हैं और ऐसे समय में एक चालू कॉलेज को बंद करना बेहद चिंताजनक है.

Author
08 Jan 2026
( Updated: 08 Jan 2026
12:55 PM )
एनएमसी के फैसले से जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल, वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द
Image Credits_IANS

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में सियासी और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है. एनएमसी ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई), कटरा के एमबीबीएस कोर्स की मान्यता रद्द कर दी है. आयोग की टीम ने हालिया निरीक्षण में कॉलेज में बुनियादी ढांचे, फैकल्टी की कमी और जरूरी मानकों में गंभीर खामियां पाई थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया. 

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर बोले उमर अब्दुल्ला

इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने गुरुवार को जम्मू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान उन मेधावी छात्रों को हुआ है, जिन्होंने कड़ी मेहनत करके नीट परीक्षा पास की और योग्यता के आधार पर इस कॉलेज में दाखिला लिया. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि छात्रों को उन कारणों की सजा नहीं मिलनी चाहिए जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं.

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई बीच में न रुके. उन्होंने कहा कि छात्रों ने मेहनत और योग्यता के दम पर नीट पास किया है. उन्हें उनके घरों के पास ही किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाया जाएगा, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो.

एसएमवीडीआईएमई कटरा का एमबीबीएस कोर्स रद्द

हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में सबसे गंभीर मुद्दा एक पूरी तरह से कार्यरत मेडिकल कॉलेज को बंद किए जाने को बताया. उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र सालों तक मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए संघर्ष करते हैं और ऐसे समय में एक चालू कॉलेज को बंद करना बेहद चिंताजनक है. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि शायद जम्मू-कश्मीर ही एकमात्र ऐसी जगह है, जहां एक काम कर रहे मेडिकल कॉलेज को बंद कर दिया गया है. उनके मुताबिक, यह फैसला ऐसे वक्त में गलत संदेश देता है, जब देश को ज्यादा डॉक्टरों और मजबूत स्वास्थ्य ढांचे की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि अगर आज भाजपा इस बात पर खुश है कि यूनिवर्सिटी अपने मानक यानी स्टैंडर्ड्स बनाए नहीं रख पाई, तो फिर सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है. अगर स्टैंडर्ड्स में कमी रही है तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? मुख्यमंत्री ने कहा कि मान लीजिए इन 50 बच्चों को तो सरकार कहीं न कहीं एडजस्ट कर देगी, लेकिन जो नुकसान उनके भविष्य को हुआ है, उसकी जिम्मेदारी किसी न किसी को तो लेनी ही होगी.

एनएमसी के फैसले से जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल

वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने इस मुद्दे पर कहा कि मुख्यमंत्री पहले ही विभाग को निर्देश दे चुके हैं कि प्रभावित छात्रों को उनके घरों के नजदीक मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यही है कि बच्चे अपनी पढ़ाई आगे जारी रख सकें.

धर्म के आधार पर उठ रहे सवालों पर सकीना इटू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि शिक्षा को मजहब से जोड़ना गलत है. जो बच्चे वहां पढ़ रहे थे, वे किसी भी धर्म के हों, कल को वही डॉक्टर बनेंगे और बिना किसी भेदभाव के लोगों का इलाज करेंगे. डॉक्टर कभी मरीज से यह नहीं पूछता कि वह किस मजहब से है. बाहर से आने वाले मरीजों के साथ भी कभी कोई फर्क नहीं किया जाता. ऐसे में शिक्षा को धर्म से जोड़ना बेहद गलत बात है.

"पिछले 12-13 महीनों में शिक्षा विभाग ने काफी मेहनत की"

इसके अलावा, सकीना इटू ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों पर भी बात की. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 14 जिलों को शिक्षा के मामले में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने वाला घोषित किया गया है. उन्होंने कहा कि पिछले 12-13 महीनों में शिक्षा विभाग ने काफी मेहनत की है और मुख्यमंत्री की खास चिंता रही है कि शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाए.

उन्होंने यह भी बताया कि बाकी छह जिलों, बड़गाम, कुपवाड़ा, बांडीपोरा, रियासी, डोडा और किश्तवाड़ में भी तेजी से काम चल रहा है. सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में ये जिले भी 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लें. फिलहाल इसके लिए कोई तय समयसीमा नहीं बताई गई है, लेकिन काम लगातार जारी है.

यह भी पढ़ें

यह फैसला ऐसे समय आया है जब कॉलेज पहले से ही एमबीबीएस दाखिलों को लेकर विवादों में घिरा हुआ था. पहले बैच की 50 सीटों में चयन को लेकर भेदभाव के आरोपों के चलते इलाके में लगातार आंदोलन भी चल रहा था.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें