Advertisement

इस्लामिक देश के राजाई की जनता से अपील, ‘ईद पर पशुओं की कुर्बानी से बचें’

उत्तर अफ्रिकी देश मोरक्को के राजा ने लोगों से इस साल बक़रीद यानी इद -उल-अजहा के मौक़े पर धार्मिक त्यौहार के दौरान भेड़ों की क़ुर्बानी नहीं देने का आह्वान किया है। क्या है पूरी ख़बर देखिए इस ख़ास रिपोर्ट में

Author
15 Mar 2025
( Updated: 10 Dec 2025
03:48 PM )
इस्लामिक देश के राजाई की जनता से अपील, ‘ईद पर पशुओं की कुर्बानी से बचें’

"काश सभी मुस्लिम देशों के नेता करें ऐसी अपील, और धरातल पर दिखे असर, जानवरों की हत्या हो जाए बंद। असली मान जाएंगे, कन्वर्टेड को कौन समझाए?""जब मोरक्को जैसे इस्लामिक देश में पशुधन की चिंता में कुर्बानी टालने की अपील हो सकती है, तो भारत में पर्यावरण और जीव रक्षा पर चर्चा क्यों नहीं?"कुछ ऐसे ही कमेंट्स की बाढ़ सोशल मीडिया पर आई हुई है। लेकिन ऐसा क्यों? चलिए आपको भी बता देते हैं, क्या है पूरा माजरा और इसमें मोरक्को का नाम क्यों आया है। दरअसल, इस्लामिक देश मोरक्को के राजा मोहम्मद 6 ने अपने देश के लोगों से आग्रह किया है कि वो इस साल ईद-उल-अजहा (Eid Al-Adha) के मौके पर कुर्बानी की रस्म न निभाएं। मोरक्को में ईद के मौके पर अन्य जानवरों समेत भेड़ों की बलि दी जाती है, जिसपर राजा मोहम्मद ने कहा है कि देश में भेड़ों की संख्या में भारी गिरावट आई है, इसलिए इस साल भेड़ों की कुर्बानी न दी जाए। उनकी इस अपील की चर्चा अब चारों तरफ़ हो रही है। लोग इनकी बातों को सुनकर हैरान हैं। उन्होंने राष्ट्रीय टेलीविजन पर पढ़े गए एक भाषण के दौरान कहा कि "देश जलवायु और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, पशुधन में काफी गिरावट आई है, इसलिए ईद पर पशुओं की कुर्बानी से बचें।"

उत्तर अफ्रिकी देश मोरक्को के राजा ने लोगों से इस साल बक़रीद यानी ईद-उल-अजहा के मौक़े पर धार्मिक त्यौहार के दौरान भेड़ों की क़ुर्बानी नहीं देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश लगातार सातवें साल सूखे की मार झेल रहा है। इस वजह से देश में पशुधन की आबादी कम हो गई है और मांस की क़ीमतें बढ़ गई हैं। ईद-उल-अजहा के दौरान हर साल दुनिया भर में बसे मुसलमान लाखों भेड़, बकरियां और अन्य पशुओं की बलि देते हैं। इस साल 6 या 7 जून को बक़रीद मनाई जाएगी।

क्यों की गई ऐसी अपील?

मोरक्को के आधिकारिक आँकड़ों से पता चलता है कि एक दशक में भेड़ों की संख्या में 38% की गिरावट आई है, क्योंकि देश सूखे की चपेट में है, जिसकी वजह से चारागाह सूख गए हैं। इससे भेड़ों को ज़रूरी भर का खाना नहीं मिल पा रहा है। इससे मांस के दाम बहुत बढ़ गए हैं। और इन ही परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने एक लाख भेड़ों को ऑस्ट्रेलिया से इम्पोर्ट भी किया है।

पहले भी की जा चुकी है अपील

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब देश में भेड़ों की संख्या में कमी आई हो। इससे पहले भी 1966 में राजा मोहम्मद के पिता की तरफ़ से ऐसी अपील की गई थी। हसन 2 ने अपने देश में भयंकर सूखा देखने के बाद अपने देश के लोगों से इसी तरह की अपील की थी।


मोरक्को में बारिश की कमी से पड़ रहा सूखा

पिछले तीन दशकों के औसत की तुलना में इस साल बारिश में 53% की कमी आ गई है, जिससे देश सूखे जैसी स्थिति से गुजर रहा है। बारिश की कमी के कारण चारागाह कम हो गए और मांस के उत्पादन में कमी आ गई। इस वजह से मांस की क़ीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मोरक्को ने अपने 2025 के बजट में मवेशियों, भेड़ों, ऊँटों और रेड मीट पर इम्पोर्ट टैक्स और वैल्यू एडेड टैक्स को निलंबित कर दिया है।

बक़रीद में अभी कुछ वक्त बाकी है, लेकिन परेशानियों को देखते हुए राजा मोहम्मद 6 ने अभी से ही लोगों से अपील की है, ताकि लोग परिस्थितियों को समझें और अपनी धार्मिक प्रथा को थोड़ा बदलने की कोशिश करें। लेकिन इस अपील का विरोध भी देखा जा रहा है। कोई कह रहा है कि "ईद पर मांस नहीं तो घास खाएंगे क्या?" तो कोई कह रहा है कि "ये यहूदियों के हाथों बिक चुके हैं।" खैर, मामले पर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा हुआ है। कोई कह रहा है कि हालात के हिसाब से रवायतों को लेकर कदम उठने चाहिए, जिन परंपराओं में बदलाव की ज़रूरत है वो बदलने चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ़ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि आसमान टूटे या धरती फट जाए, परंपराओं में जो कहा गया है सिर्फ़ वही करना चाहिए।


यह भी पढ़ें

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें