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दिल्ली ब्लास्ट… इरफान तीन तरीकों से मुस्लिम युवको को आतंकी बनाता था, तीसरा सबसे खतरनाक, मास्टरमाइंड का खुलासा

Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट में फकड़ा गया आरोपी इरफान को लेकर सूत्रों के हलावे से पता चला है कि आतंकियों की भर्ती के लिए उसने तीन तरीके अपना रखे थे.

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22 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:26 AM )
दिल्ली ब्लास्ट… इरफान तीन तरीकों से मुस्लिम युवको को आतंकी बनाता था, तीसरा सबसे खतरनाक, मास्टरमाइंड का खुलासा

दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के बाद कई अहम जानकारियां निकलकर सामने आ रही है. मास्टरमाइंड इरफान अहमद पुलिस की गिरफ्त में है और उसने कई खुलासे किए हैं. जांचकर्ताओं का कहना है कि इरफान ही जैश-ए-मोहम्मद के लिए आतंकियों की भर्ती करता था. इसका पूरा फोकस पढ़े-लिखे मुसलमान होते थे, ताकि आतंक के एक नए मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ को तैयार किया जा सके. इसके लिए इरफान तीन तरह के अपने खास रणनीति पर काम करता था. 

तीन तरीके से मुस्लिमों को टॉरगेट करता था इरफान

एक रिपोर्ट के मुताबिक मास्टरमाइंड इरफान ने पढ़े-लिखे मुसलमानों को आतंकी बनाने के लिए तीन तरीका अपनाया हुआ था. इन्हीं तीन तरीकों को अपनाकर जैश-ए-मोहम्मद के लिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती करता था. इनमें पहला तरीका ये था कि वह मुस्लिम युवाओं से बातचीत करके उनके अंदर अलगाववाद और कट्टरता की भावना का पता लगाता था. दूसरा, वह सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगालता था, उसकी पड़ताल करता था और सामने वाली की मानसिकता को समझकर उससे बातचीत करता था. फिर अपने हिसाब से उसका ब्रेन वॉश करता था. इरफान का तीसरा तरीका सबसे खतरनाक तरीका था. वह पढ़े-लिखे जॉब करने वाले व्हाइट कॉलर लोगों पर नजर रखता था. और ऐसे लोगों से निरंतर संपर्क बनाता था. इसी तरीके से उसने कईयों को ‘व्हॉइट कॉलर टेरर’ मॉड्यूल का हिस्सा बनाया था. 

टॉरगेट को अपनी बातों में फंसाता था इरफान

जानकारी के मुताबिक इरफान अपने टॉरगेट से दोस्ताना रिश्ता बना लेता था और उनसे दोस्त की तरह ही मिलता था. इस दौरान वह अंदाजा लगाता रहता था कि सामने वाला उसकी गिरफ्त में आ सकता है या नहीं. अगर उसे लगता था कि टारगेट फंस सकता है, तब पूरा भरोसा हो जाने के बाद ही उससे कोई सीक्रेट साझा करता था.

आतंकियों को मिली थी खास जिम्मेदारी

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जांचकर्ताओं का मानना है कि आतंकी मॉड्यूल का हर आतंकी, जिसमें फिदायीन हमलावर डॉक्टर उमर भी शामिल था, सबको खास जिम्मेदारी मिली हुई थी. जिसमें लॉजिस्टिक जुटाने से लेकर विस्फोटकों को तैयार करने तक का काम शामिल था. सूत्रों के मुताबिक मास्टरमाइंड इरफान अहमद को जैश-ए-मोहम्मद की ओर से यह जिम्मेदारी मिली हुई थी कि वह संभावित आतंकियों की पहचान करे, उनके मन में चल रहे विचारों को पढ़ सके और फिर उन्हें आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा बनाए

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