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दिल्ली ब्लास्ट… 32 जगहों को दहलाना चाहते थे आतंकी, हमास जैसे हमले की थी प्लानिंग, 2 साल से बना रहे थे योजना

Delhi Blast: दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले की जांच कर रहे जांच एजेंसियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें पता चला है कि आतंकी दिल्ली में हमास जैसे हमले की योजना बना रहे थे.

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23 Nov 2025
( Updated: 10 Dec 2025
10:18 PM )
दिल्ली ब्लास्ट… 32 जगहों को दहलाना चाहते थे आतंकी, हमास जैसे हमले की थी प्लानिंग, 2 साल से बना रहे थे योजना

दिल्ली में हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियां अब कई खुलासे कर रही हैं और ये खुलासे वाकई ख़ौफनाक भी हैं. सबसे पहले तो जांच एजेंसियों ने एक नए आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया. जांच में ये भी पता चला कि आतंकी किस तरह से पढ़े-लिखे व्हाइट कॉलर जॉब कर रहे युवाओं को टार्गेट करते थे, और उन्हें आतंकी की जाल में फंसाया. अब एक और नया खुलासा हुआ है जिसमें पता चला है कि दिल्ली को दहलाने की तैयारी आतंकी साल 2023 से कर रहे थे, और शहर के 32 जगहों पर ब्लास्ट करने की योजना थी. 

दिल्ली में हमास जैसे हमले की थी योजना

दिल्ली में फिदायीन हमले में खुद को उड़ा देने वाले आतंकी उमर उन नबी के साथियों ने जो खुलासा किया है, उससे जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. दरअसल, जांच में पता चला है कि हमास की तरह ही दिल्ली में हमला करने की तैयारी थी. पिछले 2 सालों से आतंकी इस योजना पर काम कर रहे थे. इस बात का खुलासा जांच एजेंसियों की पूछताछ में आरोपी डॉक्टर उमर मोहम्मद के साथ डॉक्टर मुकम्मिल शकील ने किया है. गिरफ्तार हुए आतंकियों के मुताबिक पिछले दो सालों से विस्फोटक जमा किया जा रहा था, और इन सब नापाक कारनामों को पाकिस्तान से ही अंजाम दिया जा रहा था. जिनका मक़सद था 6 दिसंबर के दिन दिल्ली के साथ-साथ कई शहरों के 32 जगहों को दहलाना. 

आतंकियों की कौन कर रहा था आर्थिक मदद?

जांच में पता चला है कि दिल्ली में धमाका करने के लिए आतंकी डॉक्टरों ने खुद 26 लाख रूपये जुटाए थे. फिदायीन हमलावर उमर ने अकेले 2 लाख रूपये दिए थे. ये सभी आतंकी बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर अयोध्या, लखनऊ, दिल्ली समेत कई शहरों में एक साथ धमाका करना चाहते थे. 

कौन था फिदायीन डॉक्टर उमर उन नबी?

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दिल्ली में लाल किले के पास फिदायीन हमले में ख़ुद को उड़ा देने वाला उमर उन नबी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर था. यूनिवर्सिटी के दूसरे डॉक्टरों का कहना है कि उमर न के बराबर क्लास लेता था. यहां तक कि मरीजों के देखने के लिए उसे कॉल करके बुलाना पड़ता था. उसकी शिफ्ट आमतौर पर शाम या रात में होती थी. और उमर अपना ज़्यादातर समय अपने रूम में ही बिताता था. 

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