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'जय श्रीराम' नारा लगाने वाले नेता की हत्या के मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, 4 आरोपियों को उम्रकैद

UP: भाकियू नेता विनोद कश्यप की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस तरह के अपराध समाज में भय और अराजकता फैलाते हैं, इसलिए ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलना जरूरी है.

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08 Jan 2026
( Updated: 08 Jan 2026
06:51 AM )
'जय श्रीराम' नारा लगाने वाले नेता की हत्या के मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, 4 आरोपियों को उम्रकैद
Image Source: Social Media

Unnao Jai Shree Ram Murder Case: उन्नाव में एक गंभीर और दुखद घटना का नतीजा सामने आया है. भाकियू नेता विनोद कश्यप की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने कहा - कि इस तरह के अपराध समाज में भय और अराजकता फैलाते हैं, इसलिए ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलना जरूरी है.
विनोद कश्यप की हत्या 14 जनवरी 2024 को हुई थी. घटना तब हुई जब उनके भाई मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम के लिए चंदा मांगने गए थे. जय श्रीराम का नारा लगाने पर आरोपियों ने उनसे पैसे मांगने शुरू कर दिए. जब पैसे नहीं दिए गए, तो आरोपियों ने उन्हें बुरी तरह पीटा. विनोद कश्यप जब उन्हें बचाने पहुंचे तो उन पर भी हमला कर दिया गया. गंभीर चोटों के कारण विनोद की अस्पताल में मौत हो गई.

मामले की पूरी कहानी


यह घटना गंगाघाट थाना क्षेत्र के चंपापुरवा मोहल्ले में हुई थी. अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के दिन मोहल्ले के शिव मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था. विनोद की पत्नी प्रीति कश्यप के अनुसार, उनके देवर बउवा कश्यप सुबह करीब 11 बजे चंदा मांगने मंदिर गए. तभी काले खां, उसके बेटे जमेश, छोटे उर्फ छोटू खां और शहबाज उर्फ सोहेल ने बउवा को पकड़ लिया. आरोपियों ने जय श्रीराम के नारे लगाने के बहाने उनसे पैसे मांगना शुरू किया. जब बउवा ने पैसे देने से मना किया, तो आरोपियों ने उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया. भाई की मारपीट की खबर सुनकर विनोद कश्यप मौके पर पहुंचे. आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया. दोनों भाइयों के सिर में गंभीर चोटें आईं और वे बेहोश हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई.

पुलिस कार्रवाई और मुकदमे की प्रक्रिया


घटना के अगले दिन 15 जनवरी 2024 को गंगाघाट पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था. इसके बाद 23 फरवरी 2024 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई. पुलिस ने मामले में गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों को आधार बनाया. कोर्ट ने पाया कि रुपए की मांग को लेकर आरोपियों ने जानबूझकर विनोद और उनके भाई पर जानलेवा हमला किया था. बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधीश कविता मिश्रा ने सभी सबूतों और तर्कों पर विचार करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई.

कोर्ट ने दिया सख्त संदेश


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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं में कड़ी सजा मिलना जरूरी है. अदालत का कहना है कि ऐसे अपराध समाज में डर और अराजकता फैलाते हैं, इसलिए अपराधियों को छोड़ना नहीं चाहिए. 

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