नहीं रहे आचार्य किशोर कुणाल, याद कर भावुक हुए बिहार के मंत्री और CM Yogi
बिहार के चर्चित पूर्व IPS और आध्यात्मिक शख़्सियत किशोर कुणाल का हार्ट अटैक से निधन हो गया. उनके निधन पर राजनीतिक हस्तियों से लेकर आम आदमी तक गहरे दुख में है.
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जब तक तन पर वर्दी रही। तेज तर्रार IPS अफसर के तौर पर प्रशासनिक सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। और जब IPS की सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया तो सामाजिक कार्यकर्ता, आध्यात्मिक रोल मॉडल, सामाजिक क्रांति और सनातन धर्म का मुख्य चेहरा बनकर उभरे। जिनका नाम है किशोर कुणाल। जो पूर्वी चंपारण में विराट रामायण मंदिर बनवा रहे थे। जिसका पीएम मोदी से उद्घाटन करवाना चाहते थे। लेकिन मंदिर निर्माण पूरा होने से पहले उनका निधन हो गया। जिससे बिहार ही नहीं पूरे देश का साधु संत समाज भी दुखी है। तो वहीं सीएम योगी भी उनके निधन पर दुख जताया।
आचार्य किशोर कुणाल अब इस दुनिया में नहीं रहे। प्रशासनिक सेवाओं के साथ साथ उनके धार्मिक पक्ष ने देश में अलग छाप छोड़ी। वे महावीर मंदिर न्यास के सचिव और अयोध्या मंदिर ट्रस्ट के संस्थापकों में से एक थे। 74 साल की उम्र में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। कुणाल किशोर की प्रशासनिक शख़्सियत जितनी चर्चा में रही उससे कई ज़्यादा वे अपने आध्यात्मिक पहलू की वजह से चर्चा में रहे। ये ही वजह है कि उनके आलोचक भी उनका सम्मान करते थे। उनके निधन पर बिहार समेत देशभर में राजनेताओं ने दुख जताया। तो वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर उन्हें नमन करते हुए लिखा। "महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल जी का निधन अत्यंत दुःखद और सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों शुभचिन्तकों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति दें. ॐ शांति!"
सीएम योगी के साथ ही बिहार में सत्तारूढ़ JDU के साथ बीजेपी और आरजेडी नेताओं ने भी किशोर कुणाल को अंतिम नमन किया। खुद आरजेडी नेता और बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी परिवार को ढांढस बँधाते दिखे। एक आचार्य होने के साथ साथ कुणाल किशोर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी के समधी भी थे जिनकी बेटी और सांसद शांभवी चौधरी की शादी उनके बेटे शायन कुणाल से हुई है। अपने समधी को आख़िरी बार देखने पहुंचे अशोक चौधरी भावनाओं पर क़ाबू ना रख सके और फफक फलक कर रो पड़े। अपने दामाद और बेटी को सांत्वना देने पहुंचे अशोक चौधरी ख़ुद को नहीं संभाल पाए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उन्हें संभालते दिखे।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी जहां समाज जात-पात से पार नहीं पा सका ऐसे दौर में किशोर कुणाल ने दलित को मंदिर का पुजारी बनाकर सामाजिक भेदभाव मिटाया।किशोर कुणाल सवर्ण भूमिहार परिवार से आते हैं उनके मन में समाज के सभी वर्गों, जातियों के लिए सम्मान रहा। महावीर न्यास समिति के सचिव रहते हुए उन्होंने कई अस्पताल, कैंसर संस्थान, आरोग्य संस्थान जैसे कई धर्माथ संस्थान स्थापित किए। किशोर कुणाल जब भी अपने गांव जाते थे वहां भी गांव के मंदिर की ख़ुद ही साफ़ सफ़ाई किया करते थे। उनकी पहली सैलरी से दादी ने गांव में मंदिर बनवाया था। इतने व्यस्त होने के बाद भी वह समय समय पर अपने गाँव जाना नहीं भूलते थे। अब किशोर कुणाल इस दुनिया में नहीं हैं उनके गांव कोठियां में सन्नाटा पसर गया। किशोर कणाल ने कई ऐसे कदम उठाए जो किसी सामाजिक क्रांति से कम नहीं थे।
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