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जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी या जहाज, जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य

मंदिर के ऊपर लगे नीलचक्र की वजह से भी पक्षी नजदीक नहीं आते. यह चक्र आठ धातुओं से बना है और दूर से चमकता हुआ दिखाई देता है. इसके कारण भी पक्षी शायद ऊंचाई पर जाने से बचते हों. हालांकि, यह सिर्फ अनुमान है, क्योंकि इस पर कोई पक्का वैज्ञानिक शोध मौजूद नहीं है

जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी या जहाज, जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यों और अद्भुत घटनाओं का मेल है. ऐसा ही एक रहस्य है मंदिर के ऊपर से किसी भी पक्षी या जहाज का ना गुजरना. यह सुनने में किसी चमत्कार जैसा लगता है, जो आज भी भक्तों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए एक दिलचस्प रहस्य बना हुआ है.

क्यों जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी या जहाज?

भक्तों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं जगत के नाथ हैं और उनके वाहन गरुड़ देव, जो पक्षियों के राजा माने जाते हैं, हमेशा मंदिर की रक्षा करते हैं. कहा जाता है कि जब गरुड़ देव पहरे पर हों, तो कोई दूसरा पक्षी मंदिर के ऊपर उड़ने की हिम्मत नहीं करता. लोग इसे भगवान की दिव्य शक्ति और मंदिर की पवित्रता का प्रमाण मानते हैं, जहां प्रकृति खुद भगवान की मर्यादा का पालन करती है. 

वैज्ञानिकों का क्या है मानना?

वैज्ञानिकों की मानें तो पुरी समुद्र के बिल्कुल करीब है, जहां तेज और उलटे-सीधे झोंकों वाली हवाएं हमेशा चलती रहती हैं.  मंदिर लगभग 214 फीट ऊंचा है और इसकी संरचना भी ऊंची, सीधी और शंक्वाकार है. ऐसी आकृति पर हवा टकराकर एक तरह का जटिल बहाव बनाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'वोर्टेक्स' कहा जाता है. इस तेज और अनिश्चित हवा में पक्षियों के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है. इसलिए वे मंदिर के ऊपर कम जाते हैं और आसपास ही उड़कर निकल जाते हैं. 

क्या ये है असली वजह?

कुछ लोग कहते हैं कि मंदिर के ऊपर लगे नीलचक्र की वजह से भी पक्षी नजदीक नहीं आते.  यह चक्र आठ धातुओं से बना है और दूर से चमकता हुआ दिखाई देता है.  इसके कारण भी पक्षी शायद ऊंचाई पर जाने से बचते हों. हालांकि, यह सिर्फ अनुमान है, क्योंकि इस पर कोई पक्का वैज्ञानिक शोध मौजूद नहीं है. 

क्यों विमान मंदिर के ऊपर नहीं दिखते?

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जहां तक बात हवाई जहाजों की है, तो पुरी किसी भी मुख्य हवाई मार्ग पर नहीं आता है. हवाई जहाजों को यहां से गुजरने की जरूरत ही नहीं पड़ती. इसके लिए कोई सरकारी 'नो-फ्लाई जोन' जारी नहीं किया गया है. विमान मंदिर के ऊपर नहीं दिखते, क्योंकि उनका मार्ग ही यहां से गुजरता नहीं.  

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