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Pahalgam Attack: अफगानिस्तान से तबाही का रास्ता खोल बैठा पाकिस्तान, मौलाना फजल के बयान ने खोली फौज की पोल
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और इस बीच पाकिस्तान के कद्दावर नेता मौलाना फजल उर रहमान का एक वीडियो बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने खुलकर पाकिस्तान सरकार और सेना की नीतियों पर हमला बोला है।
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पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है। इस हमले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत ने कड़े तेवर दिखाए हैं। भारतीय एजेंसियों के मुताबिक इस हमले के तार सीधे-सीधे पाकिस्तान की जमीन से जुड़े हैं। वहीं पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने खुद को निर्दोष साबित करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बार पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के ताकतवर मौलाना और राजनेता फजल उर रहमान ने कर दिया है।
मौलाना का खुला हमला
मौलाना फजल उर रहमान, जिन्हें पाकिस्तान की जनता 'सरकार गिराने वाला मौलाना' भी कहती है, उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना पर खुलकर हमला बोला है। एक वीडियो बयान में मौलाना ने कहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देश के साथ रिश्ते सुधारने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया है। उनके मुताबिक, तालिबान की सरकार को पाकिस्तान अपना रणनीतिक सहयोगी बना सकता था, लेकिन सेना की गलत रणनीतियों के कारण यह मौका भी हाथ से निकल गया।
उन्होंने कहा “जाहिर शाह से लेकर अशरफ गनी तक अफगानिस्तान की सभी सरकारें भारत समर्थक रही हैं। तालिबान के साथ हमारे रिश्ते कूटनीति से सुधर सकते थे। लेकिन हमने उन्हें भी खदेड़ दिया।”
सीमा पर ट्रकों की कतार, बर्बाद होती संपत्ति
मौलाना ने यह भी बताया कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर मालवाहक ट्रकों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं। व्यापार ठप है और दोनों देशों के आम लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान ने अपनी 'सैन्य सोच' में बदलाव नहीं किया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश की जनता और अर्थव्यवस्था को होगा।
उनके मुताबिक “हमारी नीति तब तक विफल होती रहेगी जब तक सैन्य सोच को राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं जोड़ा जाएगा।”
भारत से लड़ने की तैयारी, लेकिन अफगानिस्तान से हार?
मौलाना का यह बयान उस वक्त आया है जब पाकिस्तान में चारों ओर 'भारत विरोधी' माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। मीडिया से लेकर राजनीति तक हर जगह ‘एकजुटता’ की बात की जा रही है। लेकिन मौलाना ने तंज कसते हुए कहा कि भारत के मुद्दे पर तो सब एक पेज पर हैं, लेकिन अफगानिस्तान के मुद्दे पर देश बंटा हुआ है। उनका सवाल था “भारत, मलेशिया, चीन, अफगानिस्तान सभी की अर्थव्यवस्था ऊपर जा रही है… तो पाकिस्तान क्यों डूब रहा है?”
मौलाना फजल ने अपनी बात को और भी स्पष्ट करते हुए सेना को दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह वक्त 'बयान देने' का नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत को स्वीकार करने का है। “आप मान लीजिए कि देश में कोई मजबूत राजनीतिक सोच नहीं है। अब वक्त है कि फौज लोगों की बात सुने, उन्हें साथ लेकर चले। मीडिया के जरिए डराना बंद करें. उन्होंने सरकार और सेना को यह भी कहा कि जनता अब सब जानती है, मीडिया के ज़रिए दवाब बनाने की कोशिश अब नहीं चलेगी।
कौन हैं मौलाना फजल उर रहमान?
मौलाना फजल उर रहमान पाकिस्तान की राजनीति का ऐसा चेहरा हैं जो किसी भी सरकार को हिलाने की ताकत रखते हैं। 2022 में इमरान खान की सरकार को गिराने वाले Pakistan Democratic Movement के अध्यक्ष वही थे। उनका एक आह्वान पाकिस्तान के किसी भी शहर में लाखों की भीड़ इकट्ठा कर सकता है। वे अभी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और 1988 से लेकर 2018 तक लगातार सांसद रहे हैं। 2024 में एक बार फिर उन्होंने संसद में वापसी की। वह पाकिस्तान की संसद में नेता विपक्ष भी रह चुके हैं।
मौलाना फजल को अक्सर तालिबान समर्थक भी कहा जाता है। वह कई बार अफगानिस्तान में तालिबान के समर्थन में बयान दे चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने की भी मांग रखी थी।
पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से सख्त कार्रवाई शुरू हो चुकी है। वहीं पाकिस्तान का अंदरूनी संघर्ष एक बड़ा सबक बन सकता है कि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की 'सैन्य सोच' को ही टारगेट करना जरूरी है।
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