भारत की पहली मेड-इन-इंडिया चिप ‘विक्रम’ हुई लॉन्च, इसकी खूबियां जानकर हर कोई हो जाएगा हैरान

'विक्रम' चिप सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन इससे यह तय हो गया है कि भारत अब दुनिया के टॉप सेमीकंडक्टर हब्स की कतार में खड़ा है. जिस तकनीक के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर थे, अब वही तकनीक भारत में, भारतियों द्वारा, भारत के लिए तैयार हो रही है.

भारत की पहली मेड-इन-इंडिया चिप ‘विक्रम’ हुई लॉन्च, इसकी खूबियां जानकर हर कोई हो जाएगा हैरान
Source: CHip

Vikram Chip: भारत ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है. देश ने पहली बार अपनी खुद की माइक्रोप्रोसेसर चिप बनाई है, जिसे पूरी तरह भारत में डिजाइन और डेवलप किया गया है. इस चिप का नाम ‘विक्रम’ रखा गया है, और इसे इसरो (ISRO) की सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला में तैयार किया गया है.मंगलवार को सेमीकॉन इंडिया 2025 के कार्यक्रम में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस खास चिप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया. इसके साथ ही भारत ने साबित कर दिया है कि अब वो सेमीकंडक्टर जैसी हाई-टेक्नोलॉजी में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

क्या है 'विक्रम' प्रोसेसर और क्यों है खास?

'विक्रम' भारत का पहला स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे ‘VIKRAM3201’ नाम दिया गया है. यह चिप खासतौर पर अंतरिक्ष मिशनों के लिए तैयार की गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह अत्यधिक गर्मी, ठंड, कंपन और दबाव जैसे कठिन हालात में भी सही तरीके से काम कर सकती है.
इस तरह की चिप्स को आमतौर पर भारत दूसरे देशों से आयात करता रहा है. लेकिन अब 'विक्रम' के ज़रिए भारत की विदेशों पर निर्भरता घटेगी और देश खुद अपने ज़रूरी सिस्टम्स के लिए चिप बना सकेगा.

पहले से ज्यादा पावरफुल और एडवांस

'विक्रम 3201' चिप एक एडवांस वर्जन है, जो 2009 में बनी 'VIKRAM1601' चिप से काफी ज्यादा ताकतवर है.यह एक बार में 32 बिट्स डेटा को प्रोसेस कर सकती है, जिससे यह ज्यादा तेज और कुशलता से काम कर सकती है जैसे कि डेटा एनालिसिस, कंट्रोलिंग सिस्टम्स या ऑटोमैटिक फैसले लेना आदि.

हर चीज देश में बनी- कोई आयात नहीं

इस चिप को बनाने के लिए सभी टूल्स और सॉफ्टवेयर भी भारत में ही डेवलप किए गए हैं. चाहे वो कोडिंग टूल हो, कंपाइलर, डेवलपमेंट एनवायरनमेंट (IDE) या फिर टेस्टिंग सिस्टम सबकुछ स्वदेशी है. यानी यह चिप ना सिर्फ बाहर से मंगाए गए हार्डवेयर की जगह लेगी, बल्कि इसको बनाने के लिए किसी विदेशी टेक्नोलॉजी पर भी भारत को निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

देश में लग रहे हैं सेमीकंडक्टर प्लांट्स

सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर बड़े पैमाने पर काम शुरू कर दिया है. फिलहाल देश में 5 सेमीकंडक्टर यूनिट्स का निर्माण चल रहा है, जिनमें से एक की पायलट लाइन पूरी हो चुकी है और दो में जल्द उत्पादन शुरू हो सकता है.इसके अलावा सरकार ने 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जो हाई-टेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जैसे फैब्रिकेशन यूनिट्स, चिप पैकेजिंग, और चिप असेंबली जैसी टेक्नोलॉजी.

डिजाइन और स्टार्टअप्स को भी मिल रही है मदद

भारत सरकार सिर्फ चिप बनाने में ही नहीं, बल्कि चिप डिजाइन करने वाले कॉलेजों और स्टार्टअप्स को भी सपोर्ट कर रही है. अब तक 280 से ज्यादा कॉलेजों और 72 स्टार्टअप्स को जरूरी सॉफ्टवेयर टूल्स दिए जा चुके हैं. इसके अलावा डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम के तहत 23 स्टार्टअप्स को सीधा फायदा दिया गया है,

क्या कहता है दुनिया का भरोसा?

भारत में चिप डिजाइन का सेंटर बनने की दिशा में पहले से ही बड़ी प्रगति हो चुकी है. आज दुनिया की 20% चिप डिजाइन इंजीनियरिंग भारत में होती है. बड़ी कंपनियां जैसे इंटेल, क्वालकॉम, एनवीडिया और मीडियाटेक भारत के शहरों बेंगलुरु, नोएडा और हैदराबाद में अपने बड़े रिसर्च सेंटर चला रही हैं.

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'विक्रम' चिप सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन इससे यह तय हो गया है कि भारत अब दुनिया के टॉप सेमीकंडक्टर हब्स की कतार में खड़ा है. जिस तकनीक के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर थे, अब वही तकनीक भारत में, भारतियों द्वारा, भारत के लिए तैयार हो रही है.

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