जानिए सांसदों की कुल मासिक इनकम! सैलरी के अलावा क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

भारतीय सांसदों को केवल सैलरी ही नहीं, बल्कि कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं, जो उनकी कुल कमाई को लाखों में पहुंचा देते हैं। हाल ही में सरकार ने सांसदों की मासिक सैलरी 1 लाख से बढ़ाकर 1.24 लाख रुपये कर दी है। इसके अलावा, दैनिक भत्ता, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, ऑफिस भत्ता, यात्रा भत्ता और सरकारी आवास जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

जानिए सांसदों की कुल मासिक इनकम! सैलरी के अलावा क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?
भारतीय संसद के सदस्यों को मिलने वाली सैलरी और भत्तों को लेकर हमेशा चर्चा बनी रहती है। आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि सांसदों को सैलरी के अलावा और कौन-कौन से भत्ते मिलते हैं और उनकी कुल कमाई कितनी होती है? हाल ही में केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के वेतन और भत्तों में वृद्धि का ऐलान किया है, जिससे यह विषय फिर से सुर्खियों में आ गया है।

संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अप्रैल से सांसदों की सैलरी में बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां सांसदों को 1,00,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता था, अब इसे बढ़ाकर 1,24,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसके अलावा, सांसदों को मिलने वाला दैनिक भत्ता भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति दिन कर दिया गया है।

सांसदों को मिलने वाले अन्य भत्ते

सांसदों को सिर्फ वेतन ही नहीं बल्कि कई प्रकार के भत्ते भी दिए जाते हैं, जो उनकी कुल मासिक आय को काफी बढ़ा देते हैं। इनमें शामिल हैं निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Constituency Allowance) सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र में लोगों से मिलने और वहां काम करने के लिए हर महीने 70,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता दिया जाता है।

कार्यालय भत्ता (Office Allowance) अपने ऑफिस को सुचारु रूप से चलाने और कर्मचारियों की मदद के लिए सांसदों को हर महीने 60,000 रुपये का कार्यालय भत्ता मिलता है।

दैनिक भत्ता (Daily Allowance)  जब संसद सत्र चल रहा होता है, तब सांसदों को प्रति दिन 2,500 रुपये दैनिक भत्ता दिया जाता है। पहले यह राशि 2,000 रुपये थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।

यात्रा भत्ता (Travel Allowance) सांसदों को हवाई यात्रा और रेल यात्रा के लिए विशेष सुविधाएं दी जाती हैं। उन्हें प्रति वर्ष 34 हवाई यात्राओं का निःशुल्क लाभ मिलता है, साथ ही एसी फर्स्ट क्लास ट्रेन यात्रा की सुविधा भी दी जाती है।

आवास सुविधा (Housing Allowance) सांसदों को दिल्ली में सरकारी आवास या हाउस रेंट अलाउंस दिया जाता है। उन्हें दिल्ली में बंगला, फ्लैट या सरकारी गेस्ट हाउस में रहने की सुविधा मुफ्त में मिलती है। फोन और इंटरनेट सुविधा, सांसदों को हर महीने 1,50,000 फ्री कॉल्स करने की सुविधा दी जाती है, साथ ही इंटरनेट और टेलीफोन बिल का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है।

पेंशन और अतिरिक्त पेंशन में बढ़ोतरी

जो सांसद कम से कम एक कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, उन्हें जीवनभर पेंशन दी जाती है। पहले यह पेंशन 25,000 रुपये प्रति माह थी, जिसे बढ़ाकर 31,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। अगर कोई सांसद दो बार या उससे अधिक कार्यकाल पूरा कर चुका है, तो उसे हर अतिरिक्त कार्यकाल के लिए 2,500 रुपये प्रति माह अतिरिक्त पेंशन दी जाती है। अगर सांसद की कुल मासिक आय को जोड़ा जाए तो औसतन एक सांसद की कुल मासिक आय 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है, जो अन्य सरकारी पदों की तुलना में काफी अधिक है।

सांसदों की सैलरी बढ़ाने का आधार क्या है?

भारत में सांसदों का वेतन और भत्ता सांसदों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत तय किया जाता है। इसके अलावा, सरकार आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index - CII) को ध्यान में रखते हुए वेतन वृद्धि करती है।

पिछली बार सांसदों के वेतन में 2018 में बदलाव किया गया था और अब 5 साल बाद 2023 में फिर से इसे बढ़ाया गया है। सरकार का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन लागत को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी थी।

सांसदों की सैलरी बढ़ाने पर विवाद क्यों?

जब भी सांसदों की सैलरी बढ़ाई जाती है, तो यह मुद्दा विवादों में आ जाता है। कई लोगों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था और गरीब जनता की स्थिति को देखते हुए सांसदों को इतनी अधिक सैलरी और भत्ते नहीं मिलने चाहिए। आलोचकों का तर्क है देश में लाखों लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि महंगाई के अनुसार धीमी गति से होती है, जबकि सांसदों की सैलरी जल्दी-जल्दी बढ़ा दी जाती है। कई सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जनता के लिए पर्याप्त काम नहीं करते, फिर भी उन्हें इतने लाभ दिए जाते हैं। वही समर्थकों का तर्क है कि सांसदों को पूरे देश की जिम्मेदारी संभालनी होती है, इसलिए उन्हें अच्छा वेतन मिलना चाहिए। वेतन और भत्ते न बढ़ाने से सांसदों को बाहरी स्रोतों से पैसा लेने की आदत पड़ सकती है, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।

सांसदों की सैलरी और भत्ते हमेशा चर्चा और बहस का विषय रहते हैं। एक तरफ जहां सांसदों की सुविधाएं और वेतन उन्हें अपने काम को प्रभावी तरीके से करने में मदद करते हैं, वहीं दूसरी ओर जनता को लगता है कि इन पर नियंत्रण रखा जाना चाहिए। आपका इस मुद्दे पर क्या विचार है? क्या सांसदों को मिलने वाली सैलरी और भत्ते जायज हैं, या इसमें कटौती होनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!

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