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फिर टूटेगा मुलायम परिवार? सपा की स्टार प्रचारकों की लिस्ट से शिवपाल यादव का नाम गायब, चर्चाओं का बाजार गर्म

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव और आजम खान के नाम शामिल हैं. लेकिन इस लिस्ट से शिवपाल यादव का नाम गायब है, जिससे सपा के भीतर एक बार फिर पारिवारिक मतभेद की चर्चा तेज हो गई है.

फिर टूटेगा मुलायम परिवार? सपा की स्टार प्रचारकों की लिस्ट से शिवपाल यादव का नाम गायब, चर्चाओं का बाजार गर्म
Akhilesh Yadav/ Shivpal Yadav (File Photo)

Bihar Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है. सत्ता पक्ष एनडीए हो या विपक्षी गठबंधन इंडिया, सभी दल अब पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. इस बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि देश की संसद में संख्यबल के हिसाब से तीसरे नंबर की समाजवादी पार्टी सीधेतौर पर चुनाव में भाग लेने के बजाय विपक्षी गठबंधन का समर्थन कर रही है. सपा ने प्रचार युद्ध में अपनी ताकत दिखाने के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है. इसमें पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, उनकी पत्नी और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव, साथ ही हाल ही में जेल से रिहा हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां का नाम शामिल है. लेकिन सबसे हैरत की बात यह है कि इस लिस्ट में पार्टी के बड़े नेताओं के नाम तो शामिल हैं, लेकिन दो बेहद महत्वपूर्ण पारिवारिक और राजनीतिक सदस्य गायब हैं. इससे अब सवाल उठने लगा है कि क्या मुलायम परिवार में फिर से अंतरकलह शुरू हो गया है. 

लिस्ट में किसका नाम शामिल?

बिहार चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने जिसे स्टार प्रचारक बनाया है. उनमें अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव का नाम सबसे ऊपर है. इसके साथ ही पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे और वरिष्ठ नेता आजम खान का नाम प्रचारकों की लिस्ट में शामिल किया गया है. इसके अलावा अन्य प्रमुख नेताओं में इकरा हसन, प्रिया सरोज, राजीव राय, अफजाल अंसारी, अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा, पूर्व सांसद एवं विधायक तेज प्रताप सिंह यादव का शामिल है. इसके साथ ही बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रमाशंकर विद्यार्थी राजभर, लाल जी वर्मा, छोटेलाल खरवार, सनातन पांडेय, लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, विधायक ओम प्रकाश सिंह, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव और प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सोलंकी को इस सूची में जगह दी गई है. 

क्या सपा में शुरू हुई पारिवारिक कलह?

समाजवादी पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची तैयार करते समय इसे विभिन्न सामाजिक समीकरणों को साधने का दावा किया है, जिसमें अलग-अलग समुदायों के नेताओं को शामिल किया गया है. लेकिन पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ सपा को एक मजबूत पार्टी बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले शिवपाल यादव का नाम इस सूची से नदारद होना कई अहम संकेत दे रहा है. शिवपाल यादव वो नेता हैं जो सीधे पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़े रहते हैं और जिनकी जमीनी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है. ऐसे में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उन्हें स्टार प्रचारक न बनाना इस ओर इशारा करता है कि उनके और शिवपाल यादव के बीच रिश्तों में फिर से दूरियां आ गई हैं. वहीं, इससे प्रो राम गोपाल यादव का नाम भी इस लिस्ट में नहीं है लेकिन वो अक्सर यूपी से बाहर के चुनाव में प्रचार कार्यक्रम में कम ही शामिल होते थे, लेकिन शिवपाल यादव ग्रामीण चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक हर चुनाव में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. इसका परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देखा गया, जब पार्टी के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक 37 सांसद लोकसभा में पहुंचे. 

आजम खान ने भी बनाई दूरी

बिहार में चुनाव प्रचार के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता आजम खान को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है, लेकिन उनके तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि वह शायद बिहार में प्रचार के लिए नहीं जाएंगे. स्टार प्रचारक बनाए जाने के बाद, न्यूज़ एजेंसी एएनआई के संवाददाता ने जब उनसे सवाल किया, तो आजम खान ने कहा कि उनका स्वास्थ्य फिलहाल ठीक नहीं है और वे दिल्ली में इलाज करवा रहे हैं. वहीं, शिवपाल यादव का नाम स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर होने पर उन्होंने कहा कि शिवपाल हमारे पार्टी के जिम्मेदार नेता हैं और पार्टी के हितों के लिए कार्यरत हैं. 

BJP ने कसा तंज 

समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में शिवपाल यादव के नाम शामिल ना होने के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आने लगी है. यूपी की सत्ताधारी दल बीजेपी के प्रवक्ता एस एन सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर कसते हुए कहा कि 'सपा तो वैसे पारिवारिक पार्टी रही है लेकिन अब व्यक्तिगत पार्टी हो गई है. अखिलेश किसे प्रचारक बनाते हैं ये उनका मामला जरूर है लेकिन इस पर राजनीतिक पार्टियां टिप्पणी जरूर करेंगी. 

क्या शिवपाल यादव फिर करेंगे बगावत?

यूपी विधानसभा चुनाव में भले ही अभी करीब दो साल बाकी हों, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह उनके चाचा शिवपाल यादव माने जा रहे हैं. अगर शिवपाल ने फिर से दूरी बना ली तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी पर पड़ेगा. दरअसल, 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव के परिवार में बड़ा विवाद हुआ था, जिसके बाद शिवपाल यादव ने सपा छोड़कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया था. उस समय उनका आरोप था कि अखिलेश यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. शिवपाल का कहना था कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन इस बात से नाराज होकर अखिलेश ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया. शिवपाल ने तब कहा था कि जब परिवार में ही टकराव बढ़ जाए, तो किसी के पास पार्टी छोड़ने के अलावा विकल्प नहीं बचता. यही वजह थी कि सपा की कई लोकप्रिय योजनाओं के बावजूद 2017 में पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी. ऐसे में अगर शिवपाल यादव फिर कोई बड़ा कदम उठाते हैं, तो 2027 के चुनाव में अखिलेश यादव की राह मुश्किल हो सकती है.

विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी अखिलेश ने किया था हैरान

अखिलेश यादव ने कई बार ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे शिवपाल यादव नाराज होते रहे हैं. इनमें यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का निर्णय भी अहम रहा है. दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से सांसद पद छोड़कर मैनपुरी की करहल सीट से जीत दर्ज की और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर कन्नौज से सांसद का चुनाव जीता. इसके बाद यह चर्चा तेज हुई कि अखिलेश अब अपने चाचा शिवपाल यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाकर सम्मान देंगे. लेकिन अखिलेश ने सभी को चौंकाते हुए यह जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय को सौंप दी. बताया जाता है कि इस फैसले से शिवपाल नाराज तो हुए, लेकिन उन्होंने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं की.

बताते चलें कि इन तमाम घटनाक्रमों से यह साफ झलकता है कि समाजवादी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. स्टार प्रचारकों की सूची से शिवपाल यादव का नाम गायब होना और अखिलेश यादव के लगातार ऐसे फैसले लेना जो परिवार के वरिष्ठ नेताओं को खटकें, ये संकेत देते हैं कि सपा में फिर से मतभेद उभर सकते हैं. अब देखना यह होगा कि आने वाले बिहार चुनाव और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपने परिवार और पार्टी दोनों में तालमेल बैठा पाते हैं या सपा एक बार फिर अंदरूनी खींचतान की शिकार बनती है.

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