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उत्तराखंड कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता नियमावली को मंजूरी दी, सीएम धामी बोले- 'वादा पूरा किया'

CM Dhami: सीएम ने कहा कि जब हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता के बीच गए थे, तब हमने उनसे वादा किया था कि राज्य में सरकार बनने के बाद हमारा पहला कदम उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का होगा।

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20 Jan 2025
( Updated: 05 Dec 2025
06:13 PM )
उत्तराखंड कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता नियमावली को मंजूरी दी, सीएम धामी बोले- 'वादा पूरा किया'
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CM Dhami: उत्तराखंड कैबिनेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लिए नियमावली को मंजूरी दे दी। सीएम धामी ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमने जो वादा किया था उसे पूरा किया है।आइए जानते है इस खबर को विस्तार से ....

सरकार बनने के बाद हम यूसीसी विधेयक लाए - सीएम धामी 

सीएम ने कहा कि जब हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता के बीच गए थे, तब हमने उनसे वादा किया था कि राज्य में सरकार बनने के बाद हमारा पहला कदम उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार बनने के बाद हम यूसीसी विधेयक लाए। ड्राफ्ट कमेटी ने इसका प्रारूप तैयार किया। इसे विधानसभा में पास किया गया, फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून (एक्ट) बना। अब प्रशिक्षण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। आज कैबिनेट की बैठक में यूसीसी के नियमावली को मंजूरी दी गई है। हम प्रदेश में सभी जीचों की समीक्षा करने के बाद यूसीसी लागू करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा। बता दें कि यूसीसी के लागू होने से उत्तराखंड में नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा।

यूसीसी कानून में सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किया गया है - सीएम धामी 

यूसीसी कानून में सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किया गया है। सीएम धामी ने इस नियमावली को राज्य के विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। गौरतलब है कि पिछले साल 6 फरवरी को उत्तराखंड में यूसीसी बिल (विधेयक) पहली बार विशेष विधानसभा सत्र में पेश किया गया था। वहीं, 7 फरवरी को इसे विधानसभा में भारी बहुमत से पास कर दिया गया था। इसके बाद 13 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बिल पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का दर्जा दिया था। 

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