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महाराष्ट्र में 15 अगस्त को मांस बिक्री पर रोक पर बवाल, CM फडणवीस बोले, 'ये पुराना फैसला'

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुद इस नियम के बारे में पहले जानकारी नहीं थी, लेकिन मीडिया के जरिए पता चला. उन्होंने कहा, "जब मैंने महानगरपालिका के अधिकारियों से पूछा कि आपने ऐसा निर्णय क्यों लिया, तो उन्होंने मुझे 1988 का सरकारी आदेश (जीआर) दिखाया." फडणवीस ने उद्धव पर साधा निशाना

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14 Aug 2025
( Updated: 09 Dec 2025
01:07 PM )
महाराष्ट्र में 15 अगस्त को मांस बिक्री पर रोक पर बवाल, CM फडणवीस बोले, 'ये पुराना फैसला'
IANS

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कबूतरों को दाना खिलाने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखा. कोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि वह मनमाने ढंग से फैसले नहीं बदल सकती. इसी बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कबूतरखाना विवाद और स्वतंत्रता दिवस पर मीट बिक्री पर पाबंदी को लेकर बयान दिया. 

कबूतरखाना विवाद पर क्या बोले सीएम फडणवीस 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हमें दो बातों को ध्यान में रखना चाहिए. पहली बात यह है कि लोगों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और उसकी रक्षा जरूरी है. दूसरी बात है कि यह मामला आस्था से जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता."

उन्होंने कहा कि कबूतरों को दाना डालना समाज की एक परंपरा है, लेकिन इससे लोगों की सेहत पर असर न हो, यह भी देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "यह कोई विवाद नहीं है, बल्कि समाज और परंपरा से जुड़ा हुआ मुद्दा है. हमें दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए बीच का रास्ता निकालना चाहिए."

मांस बिक्री बैन पर CM फडणवीस बोले, 'ये पुराना फैसला'

स्वतंत्रता दिवस पर मीट की बिक्री पर पाबंदी को लेकर चल रही खबरों पर भी फडणवीस ने सफाई दी. उन्होंने कहा, "सबसे पहले तो मैं साफ करना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने ऐसा कोई नया फैसला नहीं लिया है. यह नियम 1988 से लागू है और कई महानगरपालिकाओं में पहले से ही यह नियम चल रहा है."

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुद इस नियम के बारे में पहले जानकारी नहीं थी, लेकिन मीडिया के जरिए पता चला. उन्होंने कहा, "जब मैंने महानगरपालिका के अधिकारियों से पूछा कि आपने ऐसा निर्णय क्यों लिया, तो उन्होंने मुझे 1988 का सरकारी आदेश (जीआर) दिखाया."

फडणवीस ने उद्धव पर साधा निशाना 

फडणवीस ने यह भी कहा कि जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने इसी तरह का आदेश दिया था. हमारी सरकार की इस बात में कोई व्यक्तिगत रुचि नहीं है कि कौन क्या खा रहा है. सरकार के पास और भी बहुत काम हैं.

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