UP Assembly Bypolls: 9 सीटों पर बीजेपी बनाम एसपी की टक्कर, कांग्रेस ने किया नामांकन से इनकार

13 नवंबर को भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होगी। कांग्रेस ने इन चुनावों में भाग नहीं लेने का फैसला किया है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। कहानी में प्रमुख सीटों, उम्मीदवारों और चुनाव के महत्व को दर्शाया गया है, जो 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। यह चुनाव न केवल सत्ताधारी भाजपा के लिए, बल्कि एसपी के लिए भी प्रतिष्ठा की परीक्षा है।

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25 Oct 2024
( Updated: 25 Oct 2024
11:34 AM )
UP Assembly Bypolls: 9 सीटों पर बीजेपी बनाम एसपी की टक्कर, कांग्रेस ने किया नामांकन से इनकार
UP Assembly Bypolls: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 13 नवंबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव ने एक बार फिर गर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि वह नौ सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी, जिससे यह चुनाव सीधे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (एसपी) के बीच होने जा रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि वह अपने INDIA गठबंधन के साथी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करेगी।
योगी बनाम अखिलेश
कांग्रेस के बाहर होने से अब यह मुकाबला सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच का रह गया है। इन उपचुनावों का महत्व इस बात में है कि ये 2024 के लोकसभा चुनावों के कुछ महीनों बाद हो रहे हैं, जहां INDIA गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीती थीं। SP ने 37 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें अपने नाम की थीं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सीटों में भी गिरावट आई थी, जो 2019 में 66 से घटकर केवल 36 रह गई।
योगी और अखिलेश के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
यह उपचुनाव न केवल सत्ताधारी भाजपा के लिए एक प्रतिष्ठा की लड़ाई है, बल्कि एसपी के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, "ये उपचुनाव बताएंगे कि क्या बीजेपी की स्थिति वास्तव में यूपी में कमजोर हो गई है या 2024 का चुनाव केवल एक चरण था और मोदी-योगी का संयोजन अभी भी काम करता है।"
उपचुनाव में किस सीट पर कौन उम्मीदवार?
इन नौ विधानसभा सीटों में से आठ पर उपचुनाव की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि यहां के विधायक 2024 में लोकसभा के लिए चुने गए थे। इनमें से चार सीटें एसपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीती थीं, जबकि चार भाजपा के खाते में गई थीं। आइए एक नजर डालते हैं इन सीटों और उनके उम्मीदवारों पर:

करहल: यहाँ एसपी उम्मीदवार के रूप में अखिलेश यादव के चचेरे भाई तेज प्रताप यादव मैदान में हैं। भाजपा ने अनुजेश यादव को उम्मीदवार बनाया है।

गाजियाबाद: भाजपा ने यहाँ संजीव शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। एसपी ने इस सीट पर सिंह राज जातव को उतारा है।

सिसामऊ: एसपी ने नसीम सोलंकी को मैदान में उतारा है, जो कि पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी हैं। भाजपा ने सुरेश अवस्थी को नामित किया है।

फूलपुर: एसपी ने मोहम्मद मुस्तफा सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने दीपक पटेल को फिर से मैदान में उतारा है।

कतेहरी: यहाँ एसपी ने शोभावती वर्मा को और भाजपा ने धर्मराज निषाद को उतारा है।

कुंदरकी: एसपी ने पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद रिजवान को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने रामवीर ठाकुर को फिर से उतारा है।

माझवान: यहाँ भाजपा की तरफ से सुचिस्मिता मौर्य और एसपी की तरफ से ज्योति बिंद मैदान में हैं।

खैर: एसपी ने डॉ. चारू काइन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने सुरेंद्र दिलेर को उतारा है।

मीराबाद: यहाँ एसपी ने सुम्बुल राना को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा की सहयोगी पार्टी, आरएलडी ने मिथिलेश पाल को मैदान में उतारा है।

ये उपचुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा और एसपी दोनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों को तय करेगा। 13 नवंबर को होने वाले इन चुनावों में जनता का मूड और उनकी राय जानने का यह एक बड़ा मौका होगा, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हो सकता है।

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