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यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से फोन पर की बातचीत, रूस से चल रहे युद्ध पर जल्द लगेगा विराम

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने फोन पर पीएम मोदी से बातचीत की है. इस दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से रूस से चल रहे युद्ध पर विराम लगवाने का एक बड़ा वादा किया है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से फोन पर की बातचीत, रूस से चल रहे युद्ध पर जल्द लगेगा विराम

पिछले 3 साल से अधिक वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर से पीएम मोदी ने युद्धविराम के लिए एक खास भूमिका निभाने की कोशिश की है. बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने पीएम मोदी से बातचीत की है. इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति ने अपने देश के हालातों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी से जानकारी साझा की और  मोदी ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि वह युद्धविराम को लेकर शांतिपूर्ण समाधान के पक्षधर में है. 

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से की बातचीत 

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने एक बार फिर से पीएम मोदी से बातचीत की है. इस दौरान पीएम मोदी ने जेलेंस्की से वादा किया है कि वह इस दिशा में सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों ही नेताओं के बीच द्विपक्षीय भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई. इनमें आपसी हितों के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की भी चर्चा शामिल है. पीएम मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आगे भी एक दूसरे के साथ संपर्क साधे रहने पर अपनी सहमति जताई. 

अमेरिकी और रूसी राष्ट्रपति के बीच होगी मुलाकात 

भारत के स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक खास मुलाकात होने वाली है. ऐसे में इस मुलाकात को ध्यान में रखते हुए मोदी और जेलेंस्की की बातचीत भी काफी अहम मानी जा रही है. 

पीएम मोदी ने बातचीत में क्या कहा? 

पीएम मोदी से फोन पर बातचीत के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि 'हमने सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने हमारे लोगों के प्रति समर्थन को लेकर उत्साह भरी बातें कही हैं, ऐसे में उसको लेकर उनके प्रति आभारी हूं. मैंने कहा कि रूसी ऊर्जा खासकर तेल के निर्यात को सीमित करने की जरूरत है.'

2022 से चल रहा रूस-यूक्रेन जंग  

बता दें कि साल 2022 फरवरी में रूस ने यूक्रेन पर अचानक से आक्रमण कर देश के अधिक से अधिक हिस्सों पर कब्जा करना शुरू कर दिया था. यह द्वितीय युद्ध के बाद यूरोप में अब तक का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है. इसमें अब तक लाखों की संख्या में लोगों की मौत हुई है. इनमें कई शरणार्थी शामिल हैं.

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