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'टाइम-टेस्टेड दोस्ती...', ट्रंप की धमकियों के बावजूद रूस के साथ खड़ा रहेगा भारत, कर दिया अपना स्टैंड क्लियर, कहा- 'राष्ट्रहित सर्वोपरि'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी टिप्पणियों और टैरिफ की धमकियों के बीच भारत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि रूस के साथ उसके संबंध 'टाइम-टेस्टेड' और पूरी तरह से राष्ट्रहित में आधारित हैं. विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत की रणनीतिक साझेदारियां जांचे-परखे रिश्तों पर टिकी हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के दबाव या दूसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाएगा.

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01 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:24 AM )
'टाइम-टेस्टेड दोस्ती...', ट्रंप की धमकियों के बावजूद रूस के साथ खड़ा रहेगा भारत, कर दिया अपना स्टैंड क्लियर, कहा- 'राष्ट्रहित सर्वोपरि'
Image: Randhir Jayaswal (File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर किए गए तीखे हमलों के बीच भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि रूस के साथ उसके संबंध किसी बाहरी दबाव से संचालित नहीं होते है और न होंगे. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि भारत अपने द्विपक्षीय रिश्ते अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र नीति के आधार पर बनाता है, न कि किसी तीसरे देश की अनुमति या नजरिये से. इसके साथ ही मंत्रालय ने इशारों ही इशारों में ट्रंप और अन्य देशों को सलाह दी कि बाइलेटरल रिलेशन को इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग में साफ-साफ शब्दों में कहा कि अलग-अलग देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध हमारी शर्तों पर आधारित हैं और इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से न देखा जाए और न ही इस कारण रिश्ते प्रभावित होने देना चाहिए." 

'रूस के साथ हमारे टाइम टेस्टेड रिश्ते'
रूस के साथ संबंधों पर बात करते हुए विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक शब्दों में साफ कर दिया कि हमारे बीच एक स्थिर और जांची-परखी (टाइम टेस्टेड) साझेदारी है." उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ हमारे संबंध उसकी योग्यता पर आधारित हैं और उन्हें किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. 

अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जो साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जनसंपर्क आधारित रिश्तों पर आधारित है. यह साझेदारी समय-समय पर हुए अनेक बदलावों और चुनौतियों का सामना करते हुए भी मजबूत बनी रही है.
 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “भारत और अमेरिका के बीच साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है. यह साझेदारी कई बदलावों और चुनौतियों से गुजर चुकी है. दोनों देश अपने ठोस एजेंडे पर केंद्रित हैं और हमें विश्वास है कि यह संबंध आगे भी प्रगति करेगा.”

ईरान के साथ कारोबार पर भी बोला MEA

ईरान के साथ व्यापार करने वाली भारतीय कंपनियों पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने की घोषणा किए जाने पर विदेश मंत्रालय के  प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने प्रतिबंधों पर ध्यान दिया है और हम इस पर विचार कर रहे हैं." हालांकि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत भी एक दिन पाकिस्तान से तेल खरीद सकता है.

विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारत पर नए शुल्क (टैरिफ) और रूस के साथ ऑयल-हथियार खरीदने वाले रिश्ते रखने के कारण जुर्माना लगाने की घोषणा की है.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत से आने वाले सामानों पर 25 प्रतिशत का ‘पारस्परिक शुल्क’ लगाया जाएगा और रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर एक अलग दंडात्मक शुल्क भी लगाया जाएगा, जो 1 अगस्त से प्रभावी होगा.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, “भारत 1 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क देगा.” साथ ही उन्होंने यह कहा कि भारत को रूस से ऊर्जा खरीदने पर अतिरिक्त दंड भी भुगतना होगा. ट्रंप ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में जब तक रूस युद्धविराम नहीं करता, तब तक जो देश रूस से ऊर्जा खरीदते रहेंगे, उन पर अमेरिका की ओर से 100 प्रतिशत तक का ‘सेकेंडरी टैरिफ’ लगाया जाएगा.

ट्रंप के इस कदम को विशेषज्ञों ने एक रणनीतिक दबाव के रूप में देखा है ताकि भारत को किसी समझौते के लिए प्रेरित किया जा सके, खासकर तब जब अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक जैसे अधिकारी यह संकेत दे चुके हैं कि भारत जल्द ही कोई व्यापारिक समझौता कर सकता है. ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “याद रखिए, भारत हमारा मित्र है, लेकिन हमने वर्षों से उनके साथ अपेक्षाकृत बहुत कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके टैरिफ विश्व में सबसे अधिक हैं.”

उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा अपनी अधिकांश सैन्य खरीद रूस से की है और वह रूस से ऊर्जा खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार है. वह भी ऐसे समय में जब पूरी दुनिया चाहती है कि रूस यूक्रेन में नरसंहार बंद करे.”

कुल मिलाकर विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर सवाल उठाते हुए यहां तक कह दिया था कि भारत और रूस अपनी 'बर्बाद होती अर्थव्यवस्थाओं' को साथ लेकर गर्त में जा सकते हैं. मंत्रालय ने साफ अल्फाज में कह दिया कि रूस के साथ उसके साथ हर कसौटी पर कसे हुए रिश्ते हैं और किसी दूसरे देश के कारण इसे खत्म या खराब नहीं किया जाएगा. 

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