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अपने प्यारे घोड़े की मौत से दुखी मालिक ने रखा भोग समागम, कार्ड छपवाकर हजारों लोगों को बुलाया, पढ़िए दिलचस्प कहानी?

चरणजीत सिंह मिंटा ने बताया कि 'उनका परिवार 3 पीढ़ियों से घोड़े पाल रहा है. घोड़े पालन और उनसे प्यार करना उनके खून में बसा है. इससे पहले पिता और दादा भी घोड़े पालते थे और बेटे की तरह ही उसकी सेवा करते थे.' चरणजीत सिंह ने आगे बताया कि फतेहजंग घोड़े का जन्म उनके घर में ही हुआ था.

अपने प्यारे घोड़े की मौत से दुखी मालिक ने रखा भोग समागम, कार्ड छपवाकर हजारों लोगों को बुलाया, पढ़िए दिलचस्प कहानी?

पंजाब के लुधियाना शहर से इंसान और घोड़े के बीच दोस्ती और प्यार की एक भावुक कहानी सामने आई है. खबरों के मुताबिक, लुधियाना शहर के रहने वाले चरणजीत सिंह मिंटा अपने घोड़े फतेहजंग की मौत से इतने दुखी हो गए कि उन्होंने उसकी आत्मा की शांति के लिए भोग समागम रख दिया. इसमें चरणजीत ने अपने सभी जान-पहचान वाले रिश्तेदारों और आस-पड़ोस के लोगों को न्योता दिया. इसके लिए उन्होंने बाकायदा कार्ड भी छपवाया और सभी लोगों को बांटे. यह कार्यक्रम आज 15 अक्टूबर को उनके निवास पर हो रहा है. 

घोड़े की मौत से दुखी मालिक ने रखी भोग समागम 

खबरों के मुताबिक, पंजाब के लुधियाना शहर के खासी कलां के रहने वाले चरणजीत सिंह मिंटा ने अपने घोड़े फतेहजंग की मौत के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए भोग समागम रखा है. इसमें उनके रिश्तेदार, परिवार और आसपास के अन्य लोग भी पहुंचे हैं. सोशल मीडिया पर घोड़े और इंसान की यह प्रेम कहानी जमकर वायरल हो रही है. लोग चरणजीत की तारीफ कर रहे हैं.

मृतक घोड़े को अपना तीसरा बेटा मानते थे 

चरणजीत सिंह मिंटा ने बताया कि 'उनका परिवार 3 पीढ़ियों से घोड़े पाल रहा है. घोड़े पालन और उनसे प्यार करना उनके खून में बसा है. इससे पहले पिता और दादा भी घोड़े पालते थे और बेटे की तरह ही उसकी सेवा करते थे.' चरणजीत सिंह ने आगे बताया कि 'फतेहजंग घोड़े का जन्म उनके घर में ही हुआ था. बचपन से ही उस घोड़े के साथ उनका दोस्ताना था, उसका रंग नीला था इसलिए उन्हें प्यार हो गया और उनकी पत्नी भी घोड़े को अपना बच्चा मानने लगी.' चरणजीत के दो बच्चे हैं, जो विदेश में हैं, जिसकी वजह से वह सारा दिन अपने प्रिय घोड़े फतेहजंग के साथ ही गुजारा करते थे. 

दोनों बेटे विदेश में बसे 

चरणजीत ने आगे बताया कि 'उनके 2 बेटे हैं और दोनों विदेश में रहते हैं. उनकी पत्नी उनके साथ लुधियाना में ही रहती है. इस दौरान चरणजीत ने एक दिल जीतने वाला वाकया बताया उन्होंने कहा कि 'जब कोई उनसे पूछता है कि आपके कितने बच्चे हैं, तो मैं एकदम से जवाब देता कि 3 बच्चे हैं, इनमें एक बच्चे का नाम गुरइकबाल सिंह है, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है. दूसरे का नाम मनलोचन सिंह है, जो अमेरिका में रहता है और तीसरे बेटे का नाम फतेहजंग है, जो कि उनका प्रिय घोड़ा था. वह लुधियाना में ही रहता था.

कैसे हुई फतेहजंग की मौत? 

चरणजीत सिंह ने आगे बताया कि 'फतेहजंग की उम्र 38 महीने थी. वह बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन 8 अक्टूबर को अचानक से उसकी तबीयत खराब हो गई और उसकी मौत हो गई. हमने उसकी मौत के बाद भी कई टेस्ट करवाए, तो पता चला कि उसके अंगों ने अचानक से काम करना बंद कर दिया है, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई.' उन्होंने बताया कि 'पूरे उत्तर भारत में फतेहजंग को प्रदर्शनियों में लेकर जाते थे, लोग उसे बहुत प्यार करते थे. इसी साल वह फतेहजंग को जोधपुर के महाराजा के पास भी ले गए थे और उन्होंने भी जमकर तारीफ की थी.' 

रिश्तेदारों ने दिया दूसरा घोड़ा 

फतेहजंग की मौत के बाद जब चरणजीत सिंह उदास रहने लगे, तो इसकी जानकारी रिश्तेदारों को लगी, उसके बाद उन्होंने पटियाला से एक नीले रंग का घोड़ा उन्हें दे दिया, चरणजीत ने इस घोड़े का नाम भी फतेहजंग ही रखा है. 

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