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जोधपुर में भव्य अक्षरधाम मंदिर की इस दिन होगी प्रतिष्ठा, 7 दिवसीय होगा उत्सव

इस दिव्य परिसर का 25 सितंबर 2025 को गुरुहरि महंत स्वामीजी महाराज के करकमलों से प्रतिष्ठा महोत्सव होगा. इस अवसर पर शाम की सभा में भव्य लोकार्पण समारोह होगा. यह भव्य मंदिर महोत्सव 7 दिवसीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित होगा.

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17 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:34 AM )
जोधपुर में भव्य अक्षरधाम मंदिर की इस दिन होगी प्रतिष्ठा, 7 दिवसीय होगा उत्सव

राजस्थान के जोधपुर में बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) द्वारा अक्षरधाम मंदिर का निर्माण पूर्णता की ओर बढ़ाया जा रहा है. प्रतिष्ठा विधि 25 सितंबर को होगी.

बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था एक वैश्विक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना वैदिक सिद्धांतों के आधार पर 1907 में हुई थी. वर्तमान में परम पूज्य महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में यह संस्था विश्वभर में मानव कल्याण, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिकता का संदेश दे रही है. संस्था द्वारा विश्वभर में भव्य मंदिर, संस्कार शिविर, सेवा कार्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है, जो भारतीय सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार का आधार है.

40 बीघा भूमि पर हो रहा है अक्षरधाम मंदिर का निर्माण

जोधपुर की ऐतिहासिक धरती पर काली बेरी क्षेत्र में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा एक भव्य अक्षरधाम मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. यह दिव्य धाम लगभग 40 बीघा भूमि पर विस्तृत है. इसका सम्पूर्ण निर्माण जोधपुरी पत्थर से हो रहा है, जिसमें अत्यंत सुंदर शिल्पकला एवं नक्काशी की गई है, जो प्राचीन सनातन संस्कृति की गरिमा को सजीव करती है. मंदिर की दीवारों, स्तंभों व गुम्बदों पर की गई कलाकृतियां अद्वितीय हैं, जो मरुधरा की सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम देंगी.

25 सितंबर को होगा प्रतिष्ठा महोत्सव

इस दिव्य परिसर का 25 सितंबर 2025 को गुरुहरि महंत स्वामीजी महाराज के करकमलों से प्रतिष्ठा महोत्सव होगा. इस अवसर पर शाम की सभा में भव्य लोकार्पण समारोह होगा. यह भव्य मंदिर महोत्सव 7 दिवसीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित होगा, जिसमें स्वयं परम पूज्य महंत स्वामी महाराज की पावन उपस्थिति रहेगी. आयोजन के दौरान भारत ही नहीं, अपितु विश्व के कोने-कोने से लगभग लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है.

यह भव्य अक्षरधाम न सिर्फ जोधपुर, बल्कि पूरे मारवाड़ में प्राचीन सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में स्थापित होगा. यह धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्यात्म, संस्कृति और सेवा का प्रेरणास्रोत बनकर मरुभूमि में एक नवजीवन का संचार करेगा.

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