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पुष्कर मेला 2025 में 16 इंच ऊंची पुंगनूर गाय बनी चर्चा का विषय, पीएम मोदी से जुड़ा खास संबंध

पुंगनूर नस्ल की गायों के साथ ही तिवारी अपने फार्म से सबसे छोटी नस्ल के घोड़े भी पुष्कर मेले में लेकर आए हैं, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. यह छोटे कद की देसी गाय और मिनी घोड़े न केवल मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं, बल्कि देसी नस्लों के संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि पशुपालन का भी संदेश दे रहे हैं.

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29 Oct 2025
( Updated: 10 Dec 2025
09:37 PM )
पुष्कर मेला 2025 में 16 इंच ऊंची पुंगनूर गाय बनी चर्चा का विषय, पीएम मोदी से जुड़ा खास संबंध

विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेला 2025 इस बार एक अनोखी देसी नस्ल की पुंगनूर गाय के कारण सुर्खियों में है. आंध्र प्रदेश मूल की यह विलुप्तप्राय प्रजाति अपने छोटे कद, कम देखभाल में अधिक उत्पादन और औषधीय गुणों वाले दूध के लिए जानी जाती है.

पुंगनूर नस्ल की गाय बनी आकर्षण का केंद्र

जयपुर से आए अभिराम ब्रीडिंग फार्म के संचालक अभिनव तिवारी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि पुंगनूर नस्ल की गाय की ऊंचाई केवल 16 से 36 इंच तक होती है, जबकि इसका वजन लगभग 150 से 200 किलोग्राम तक होता है. आश्चर्यजनक रूप से यह गाय प्रतिदिन केवल तीन किलो चारा खाती है और डेढ़ से छह लीटर दूध देती है.

तिवारी ने बताया कि पुंगनूर नस्ल की गाय के दूध में ए2 प्रोटीन पाया जाता है, जो औषधीय दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है. यह दूध न सिर्फ पचने में आसान होता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है. इस नस्ल की गायों की कीमत उनके गुण और शुद्धता के आधार पर दो लाख से दस लाख रुपए तक है.

PM मोदी ने अपने घर में पुंगनूर नस्ल की गाय पालने का किया था जिक्र

उन्होंने बताया कि इन गायों की लोकप्रियता में एक बड़ा बदलाव तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने घर में पुंगनूर नस्ल की गाय पालने का जिक्र किया. पीएम मोदी के वीडियो और संदेशों के बाद इस प्रजाति की पहचान पूरे देश में फैल गई और इसकी कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई. तिवारी ने कहा कि हम इस मेले में इन गायों को बेचने के लिए नहीं लाए हैं, बल्कि उनका उद्देश्य इनके संरक्षण, प्रचार और पहचान बढ़ाने का है, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी देसी नस्लों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़े.

अभिनव तिवारी ने बताया कि उनके फार्म पर वर्तमान में 30 से अधिक पुंगनूर नस्ल की गायें हैं और वे इनके प्रजनन और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह नस्ल सूखे और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि इनकी देखभाल में कम लागत आती है और ये स्थानीय वातावरण में आसानी से ढल जाती हैं.

पुंगनूर नस्ल की गायों के साथ मिनी घोड़े ने बढ़ाई मेले की रौनक

पुंगनूर नस्ल की गायों के साथ ही तिवारी अपने फार्म से सबसे छोटी नस्ल के घोड़े भी पुष्कर मेले में लेकर आए हैं, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. यह छोटे कद की देसी गाय और मिनी घोड़े न केवल मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं, बल्कि देसी नस्लों के संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि पशुपालन का भी संदेश दे रहे हैं.

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