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आतंकी नसरल्लाह से हमदर्दी और शहीद जवान Hilal पर चुप्पी, आखिर ऐसा क्यों Mahbooba Mufti ?

हिलाल तेरे खून से… इंकलाब आएगा… आसमान चीरते ये नारे किसी बुरहान वानी जैसे आतंकवादी के लिए नहीं लग रहे हैं… ये नारे लग रहे हैं कश्मीर में शहीद हुए जवान हिलाल अहमद के लिए और यही बदलते कश्मीर की असली तस्वीर है जहां किसी आतंकवादी के जनाजे में भीड़ नहीं उमड़ती है देश के लिए शहादत देने वाले जवान के लिए जनसैलाब उमड़ता है

आतंकी नसरल्लाह से हमदर्दी और शहीद जवान Hilal पर चुप्पी, आखिर ऐसा क्यों Mahbooba Mufti ?

आसमान चीरते ये नारे किसी बुरहान वानी जैसे आतंकवादी के लिए नहीं, बल्कि कश्मीर में शहीद हुए जवान हिलाल अहमद के लिए हैं। यही बदलते कश्मीर की असली तस्वीर है, जहां किसी आतंकवादी के जनाजे में भीड़ नहीं उमड़ती, बल्कि देश के लिए शहादत देने वाले जवान के लिए जनसैलाब उमड़ता है।कश्मीर के जिला अनंतनाग में भी कुछ ऐसा ही हुआ। मंगलवार को सेना के जवान हिलाल अहमद अचानक लापता हो गए। उनकी तलाश में सेना ने जबरदस्त तलाशी अभियान चलाया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका, क्योंकि धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के दुश्मन आतंकियों ने उन्हें मौत की नींद सुला दी। उनका शव उतरासू में सांगलान वन इलाके से बरामद किया गया।

हिलाल अहमद की शहादत पर श्रीनगर में मौजूद चिनार कोर ने कहा:

"खुफिया जानकारी के आधार पर 8 अक्टूबर को भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कोकेरनाग के कजवान जंगल में एक ज्वाइंट आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया। ऑपरेशन रातभर जारी रहा, लेकिन राष्ट्र के लिए कर्तव्य निभाते हुए बहादुर जवान हिलाल अहमद भट शहीद हो गए। उनका साहस और समर्पण सदैव प्रेरित करता रहेगा। भारतीय सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवार के साथ एकजुटता के साथ खड़ी है।"

हिलाल अहमद चार साल पहले टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती हुए थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बच्चे और माता-पिता हैं।देश के लिए शहीद हुए हिलाल अहमद की शहादत को सोशल मीडिया पर भी लोग नमन कर रहे हैं। अक्षित सिंह नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, "ये भारतीय सेना के जवान शहीद हिलाल अहमद का अंतिम संस्कार है, जिनका कल रात आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। ये हमारे हीरो हैं।"

चंदन नाम के एक यूजर ने लिखा, "हिलाल अहमद भट को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने शहीद कर दिया। क्या किसी भी सेक्युलर एक्टिविस्ट ने शहीदों पर ट्वीट किया या शहीदों की जान लेने वालों के खिलाफ बोले?"

एक अन्य यूजर ने लिखा, "घाटी में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ बड़े सेना के मूवमेंट की बैखलाहट आतंकियों में अब साफ दिखाई दे रही है। मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवान हिलाल अहमद के शौर्य को सलाम।"

कश्मीर के जिला अनंतनाग में शहीद हुए हिलाल अहमद के लिए सोशल मीडिया पर लोग इसी तरह से आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि हजारों किलोमीटर दूर ईरान में मारे गए आतंकवादी नसरल्लाह के गम में रैलियां रद्द करने वालीं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हमारे जवान हिलाल के लिए दो शब्द क्यों नहीं कहे? क्या महबूबा जैसी नेताओं के लिए आतंकवादियों के लिए ही आंसू बहते हैं, कश्मीर की हिफाजत के लिए अपना खून बहाने वाले जवान हिलाल के लिए नहीं?

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