Advertisement

बुलडोज़र पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, सपा नेता अबू आजमी ने कर दी बड़ी मांग

बुलडोज़र पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद लगातार बयानबाज़ी हो रही है और योगी सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में अबु आज़मी और मौलाना अरशद मदनी ने क्या कहा, सुनिए

Author
18 Nov 2024
( Updated: 06 Dec 2025
05:06 AM )
बुलडोज़र पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, सपा नेता अबू आजमी ने कर दी बड़ी मांग
2017 से यूपी की सत्ता संभाल रहे योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के साथ की क़ानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों का इलाज कैसे किया जाए इसका भी तोड़ निकाल लिया था। जिसकी वजह से गुंडे, माफ़िया, अपराधी डर की वजह से ख़ुद थाने में सरेंडर कर रहें थे, विकास दुबे, अतीक अहमद, मुख़्तार अंसारी जैसे माफ़ियों के ख़िलाफ़ जिस तरह से योगी राज में एक्शन लिया गया और बुलडोज़र से उनकी अकड़ रौंदी गई उससे योगी राज में क़ानून व्यवस्था का इक़बाल बुलंद हुआ, धीरे-धीरे कई राज्य में योगी मॉडल को लागू किया गया, कई मुख्यमंत्रियों ने बुलडोज़र की ताक़त अपने राज्य में दिखाई, लेकिन कई मौक़े ऐसे भी आए जब बुलडोज़र के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया गया और मामला कोर्ट में पहुंचा।


ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बुलडोजर पर बड़ा फैसला सुनाया, जिसके बाद राजनीति शुरु हो गई है, दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर से लोगों के घर गिराए जाने को असंवैधानिक बता दिया, बस फिर क्या था योगी सरकार के खिलाफ विरोधियों ने हल्ला बोल दिया, महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आजमी ने कहा "हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं, अब जिन-जिन अधिकारियों ने बेगुनाह लोगों के घर गिराए हैं, उनपर सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें जेल में डाला जाएगा, हम मांग करते हैं कि अबतक जितने भी लोगों के घरों पर बुलडोजर चला है उसका हर्जाना सरकार से वसूला जाए, किसी एक के जुर्म की सजा पूरे परिवार को नहीं मिल सकती है" 

तो अबु आज़मी को लगता है कि बाबा का बुलडोज़र अब दहाड़ना बंद कर देगा, तो उन्हें पूरी पिक्चर समझ लेनी चाहिए, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझना होगा 

बुलडोजर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त आदेश ।एक व्यक्ति की गलती, सजा पूरे परिवार को क्यों ? गलत तरीके से घर तोड़ने पर मुआवजा दिया जाए।सत्ता का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बुलडोजर एक्शन पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकता है। बुलडोजर की मनमानी पर अधिकारियों पर एक्शन। घर तोड़ने की हालत में संबंधित पक्ष को समय मिले। किसी अपराध की सजा देना अदालत का काम है। बिना फैसले के किसी को भी दोषी न माना जाए। रजिस्टर्ड पोस्ट से नोटिस भेजें, 15 दिन का वक्त मिले।

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोज़र पर फ़ैसला सुनाते हुए सख़्त रुख़ जरुर अपनाया, लेकिन बुलडोज़र कार्रवाई पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई गई, बस सख़्त आदेश दिया गया है अब उसी के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी, ऐसे में अबु आज़मी ने जिस तरह से बुलडोज़र को लेकर बयान दिया है, उससे ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि मुख़्तार और अतीक पर हुई कार्रवाई का दर्द उन्हें भी है, खैर अबु आज़मी ही नहीं, इसके अलावा भी तमाम नेता, मौलवी, मौलाना बुलडोज़र पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहें हैं, मौलाना अरशद मदनी ने कहा " एक दिन में, एक घंटे में किसी की जिंदगी तबाह कर दी जाती है, इसी बुनियाद के ऊपर हम लोग कोर्ट गए थे, हमने मुसीबत में फंसे लोगों की कोशिश की, हमने सुप्रीम कोर्ट में अच्छे से अच्छे वकील रखे जिन्होंने मजलूमों और गरीबों का पक्ष रखा, हम बहुत खुश हैं, हम यह समझते हैं कि कोर्ट ने बहुत सही स्टैंड अपनाया है, उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने बुलडोजर से लोगों के घर गिराए, सरकारों को चाहिए कि जिनके घर गिराए गए उनको मुआवजा दिया जाए"

तो कुछ इस तरह से बुलडोज़र पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद लगातार बयानबाज़ी हो रही है और योगी सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें